जल्द हो सकता है जीएसटी स्लैब में परिवर्तन पर बड़ा फ़ैसला
Saturday - February 8, 2020 3:55 pm ,
Category : WTN HINDI
एक जुलाई 2017 को लागू हुआ था देश में जीएसटी
जीएसटी के स्लैब और दरों में बदलाव पर जल्द होगा मंथन
FEB 08 (WTN) – मोदी सरकार जल्द ही गुड्स एण्ड सर्विसेस टैक्स की मौजूदा दरों और स्लैब में बड़े बदलाव कर सकती है। जानकारी के मुताबिक़, सरकार जीएसटी में मौजूदा 9 दरों की बजाय सिर्फ़ 3 दरें ही रखना चाहती है। यानी यदि ऐसा होता है, तो इससे जीएसटी में सिर्फ़ तीन स्लैब 8%, 18% और 28% ही होंगी। हालांकि, ऐसा करते समय सरकार इस बात का पूरा ध्यान रखने की कोशिश करेगी कि जीएसटी दरों में बदलाव से खाने-पीने की वस्तुएं महंगी ना हो जाएं। दरअसल, कहा जा रहा है कि बजट के बाद सरकार जीएसटी दरों में सामंजस्य बैठाने की कवायद शुरू करेगी, क्योंकि सरकार ज़्यादातर आइटम्स के रेट रेवेन्यू न्यूट्रल से थोड़ा अधिक रखने के पक्ष में है।
वहीं कहा जा रहा है कि सरकार खाद्य महंगाई को लेकर एक विशेष रणनीति अपना सकती है, और खाने-पीने और ज़रूरी वस्तुओं को लेकर एक नया स्लैब बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। दरअसल, काफ़ी समय से जानकार मांग कर रहे हैं कि जीएसटी में ज़्यादा स्लैब नहीं रखे जाने चाहिए, क्योंकि जीएसटी स्लैबों या दरों में बार-बार बदलाव होने से समस्याएं पैदा होती हैं और इससे व्यापार पर असर पड़ता है।
जानकारी के लिए बता दें कि बहुप्रतीक्षित जीएसटी एक जुलाई, 2017 से पूरे देश में लागू हुआ था, और जीएसटी लागू होने के बाद सभी अप्रत्यक्ष कर इसमें शामिल हो गए हैं। दरअसल, जीएसटी के लागू होने के बाद से कई बार जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया है। इस समय जीएसटी के तहत चार स्लैब, 5%, 12%, 18% और 28% हैं। वहीं कई ऐसे उत्पाद हैं जिन पर जीएसटी नहीं लगता। साथ ही पांच ऐसे भी उत्पाद हैं, जिन पर जीएसटी के अलावा उपकर या सेस भी लगता है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, ज़्यादातर आइटम के रेट 18% वाले स्लैब में लाए जा सकते हैं। जबकि निचले सभी स्लैब को मिलाकर सिर्फ़ एक 8% का स्लैब बनाने पर विचार हो सकता है। वहीं लग्जरी और डी-मेरिट गुड्स के लिए अधिकतम 28% का स्लैब जारी रखा जा सकता है। वैसे जीएसटी पर बनी एक समिति ने सरकार से सिर्फ़ दो स्लैब 10 और 20 प्रतिशत बनाने के सुझाव दिये हैं। लेकिन यदि ऐसा होता है तो रोजमर्रा के सामान महंगा होने की आशंका बढ़ जाएगी।
वहीं बता दें कि GST बिल को डिजिटल पेमेंट मोड से देने पर छूट की सुविधा 1 अप्रैल से शुरू हो सकती है। इस नई स्कीम के तहत ग्राहकों को 20 प्रतिशत तक का कैशबैक मिलेगा, वहीं यूपीआई, BHIM, रुपे कार्ड से पेमेंट देने पर छूट मिल सकती है। दरअसल, पिछले साल नवम्बर में जीएसटी काउंसिल ने इसकी मंजूरी दी थी। अब देखना होगा कि जीएसटी स्लैब और दर में कितना परिवर्तन आने वाले समय में होता है। वैसे सरकार की पूरी कोशिश रहेगी की खाने पीने के सामान महंगे ना होने पाएं, क्योंकि यदि ऐसा है तो इससे आम जनता को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
FEB 08 (WTN) – मोदी सरकार जल्द ही गुड्स एण्ड सर्विसेस टैक्स की मौजूदा दरों और स्लैब में बड़े बदलाव कर सकती है। जानकारी के मुताबिक़, सरकार जीएसटी में मौजूदा 9 दरों की बजाय सिर्फ़ 3 दरें ही रखना चाहती है। यानी यदि ऐसा होता है, तो इससे जीएसटी में सिर्फ़ तीन स्लैब 8%, 18% और 28% ही होंगी। हालांकि, ऐसा करते समय सरकार इस बात का पूरा ध्यान रखने की कोशिश करेगी कि जीएसटी दरों में बदलाव से खाने-पीने की वस्तुएं महंगी ना हो जाएं। दरअसल, कहा जा रहा है कि बजट के बाद सरकार जीएसटी दरों में सामंजस्य बैठाने की कवायद शुरू करेगी, क्योंकि सरकार ज़्यादातर आइटम्स के रेट रेवेन्यू न्यूट्रल से थोड़ा अधिक रखने के पक्ष में है।
वहीं कहा जा रहा है कि सरकार खाद्य महंगाई को लेकर एक विशेष रणनीति अपना सकती है, और खाने-पीने और ज़रूरी वस्तुओं को लेकर एक नया स्लैब बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। दरअसल, काफ़ी समय से जानकार मांग कर रहे हैं कि जीएसटी में ज़्यादा स्लैब नहीं रखे जाने चाहिए, क्योंकि जीएसटी स्लैबों या दरों में बार-बार बदलाव होने से समस्याएं पैदा होती हैं और इससे व्यापार पर असर पड़ता है।
जानकारी के लिए बता दें कि बहुप्रतीक्षित जीएसटी एक जुलाई, 2017 से पूरे देश में लागू हुआ था, और जीएसटी लागू होने के बाद सभी अप्रत्यक्ष कर इसमें शामिल हो गए हैं। दरअसल, जीएसटी के लागू होने के बाद से कई बार जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया है। इस समय जीएसटी के तहत चार स्लैब, 5%, 12%, 18% और 28% हैं। वहीं कई ऐसे उत्पाद हैं जिन पर जीएसटी नहीं लगता। साथ ही पांच ऐसे भी उत्पाद हैं, जिन पर जीएसटी के अलावा उपकर या सेस भी लगता है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, ज़्यादातर आइटम के रेट 18% वाले स्लैब में लाए जा सकते हैं। जबकि निचले सभी स्लैब को मिलाकर सिर्फ़ एक 8% का स्लैब बनाने पर विचार हो सकता है। वहीं लग्जरी और डी-मेरिट गुड्स के लिए अधिकतम 28% का स्लैब जारी रखा जा सकता है। वैसे जीएसटी पर बनी एक समिति ने सरकार से सिर्फ़ दो स्लैब 10 और 20 प्रतिशत बनाने के सुझाव दिये हैं। लेकिन यदि ऐसा होता है तो रोजमर्रा के सामान महंगा होने की आशंका बढ़ जाएगी।
वहीं बता दें कि GST बिल को डिजिटल पेमेंट मोड से देने पर छूट की सुविधा 1 अप्रैल से शुरू हो सकती है। इस नई स्कीम के तहत ग्राहकों को 20 प्रतिशत तक का कैशबैक मिलेगा, वहीं यूपीआई, BHIM, रुपे कार्ड से पेमेंट देने पर छूट मिल सकती है। दरअसल, पिछले साल नवम्बर में जीएसटी काउंसिल ने इसकी मंजूरी दी थी। अब देखना होगा कि जीएसटी स्लैब और दर में कितना परिवर्तन आने वाले समय में होता है। वैसे सरकार की पूरी कोशिश रहेगी की खाने पीने के सामान महंगे ना होने पाएं, क्योंकि यदि ऐसा है तो इससे आम जनता को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।