कोरोना वायरस से ‘जागे’ चीन लोगों ने वामपंथी सरकार से मांगी ‘बोलने की आज़ादी’!
Monday - February 10, 2020 12:44 pm ,
Category : WTN HINDI
चीन में कोरोना वायरस बना महामारी
चीन में कोरोना वायरस से 900 से ज़्यादा लोगों की मौत, अब अपनी ही सरकार से जवाब मांग रहे चीनी लोग
FEB 10 (WTN) – चीन में कोरोना वायरस से 900 से ज़्यादा लोगों की मौत के बाद चीन की वामपंथी सरकार कठघरे में खड़ी है। पहले दबी जुबान में, लेकिन अब खुले आम चीन के लोग अपनी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं कि चीन की वामपंथी सरकार की तानाशाही और लापरवाही के कारण ही कोरोना वायरस एक महामारी बन गया है। बता दें कि कोरोना वायरस की ऐसी दहशत है कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। और तो और कोरोना वायरस के कारण चीन में ऑफिस और उद्योग तक बंद पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक़, कोरोना वायरस से चीन की अर्थव्यवस्था को क़रीब 140 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। दरअसल, कोरोना वायरस के कारण चीन में कई कम्पनियों के प्लांट्स बंद पड़े हैं। वहीं कई देशों ने चीन के साथ आयात-निर्यात पर भी फि़लहाल पाबंदी लगा दी है, जिसके कारण चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से हिल गई है।
ख़ैर चीन की अर्थव्यवस्था तो कभी ना कभी तो पटरी पर आ ही जाएगी, लेकिन 900 से ज़्यादा लोगों की मौत के लिए चीन की जनता अपनी वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्से में है। चीनी लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस संक्रमण पर नियंत्रण पा लिया जाता, तो कोरोना वायरस के कारण इतने लोगों को जान से हाथ ना धोना पड़ता। दरअसल, चीन के एक डॉक्टर ली वेनलिआंग ने कोरोना वायरस के बारे में काफ़ी पहले ही जानकारी दे दी थी, लेकिन आरोप है कि चीन की वामपंथी सरकार ने स्थानीय पुलिस के ज़रिए डॉक्टर ली को चुप रहने का दबाव डाला। चीन की सरकार इस बीमारी को छिपाना चाहती थी, लेकिन चीन की सरकार की यह ग़लती भारी पड़ गई और कोरोना वायरस संक्रमण अब चीन में एक महामारी बन गया है।
जब डॉक्टर ली को कोरोना वायरस के बारे में जानकारी मिली, तो डॉक्टर ली ने इसके बारे में लोगों को बताना चाहा। लेकिन चीन की सरकार ने उन पर पुलिस के ज़रिए दबाव बनाया कि वे इस बात को किसी से ना कहें। हालांकि, डॉक्टर ली ने कोरोना वायरस के बारे में एक ग्रुप में सबसे पहले जानकारी दी थी कि संक्रमित मरीज कोरोना वायरस से पीड़ित हो सकते हैं। लेकिन पुलिस ने शुरुआत में इसे अफवाह मान लिया था। डॉक्टर ली ही नहीं अन्य डॉक्टर्स पर भी पुलिस ने दबाव डाला कि वे कोरोना वायरस के बारे में लोगों को जानकारी ना दें।
कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ते हुए 34 साल के व्हिस्लब्लोअर डॉक्टर ली वेनलिआंग बाद में ख़ुद भी कोरोना वायरस से पीड़ित हो गए थे, और फ़िर उनकी मौत हो गई। लेकिन डॉक्टर ली की मौत ने चीन को लोगों को जगा दिया है, और चीन के लोगों में अब अपनी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा है। ख़ासकर डॉक्टर्स और स्कॉलर्स अपने देश की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलन्द करने लगे हैं। चीन के डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि वे अब चीन में राजनीतिक बदलाव और फ्री स्पीच की मांग तक करने लगे हैं। हालांकि, यह आपको काफ़ी सामान्य बात लग रही है, लेकिन चीन के वामपंथी शासन में राजनीतिक बदलाव और फ्री स्पीच की मांग करना सीधे तौर पर सरकार को चुनौती देना है।
डॉक्टर ली की मौत के बाद कम से कम दो ओपन लेटर चीन की सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की मांग करने वाले एक लेटर पर वुहान के 10 प्रोफेसर्स के हस्ताक्षर हैं। पत्र में साफ़ लिखा है कि डॉक्टर ली ने पूरे जज़्बे और सामर्थ्य से देश और समाज के हित में काम किया था, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज़ दबा दी। इस ओपन लेटर में साफ़ कहा गया है कि सरकार को डॉक्टर ली से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगना चाहिए। लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया कि चीन की वामपंथी सरकार को ख़ुद के ख़िलाफ़ कुछ भी लिखना या बोलना पसन्द नहीं है। और इसी कारण से चीन की वामपंथी सरकार ने सोशल मीडिया Weibo पर कथित तौर से इस पत्र को सेंसर कर दिया है। वहीं एक दूसरे पत्र को बीजिंग की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी Tsinghua के एलुमनी समूह ने लिखा है। बता दें कि इस पत्र में लिखा है कि अधिकारी आम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की गारण्टी दें।
कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण इतना ज़्यादा नहीं फैलता, यदि चीन की वामपंथी सरकार इस संक्रमण की जानकारी दबाने की ग़लती नहीं करती। दरअसल, चीन की सरकार की मंशा थी कि इस संक्रमण के बारे में लोगों को नहीं बताया जाए, क्योंकि ऐसा होने पर चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता। हालांकि, चीन की अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस गहरा असर डाल चुका है। लेकिन अब चीन की जनता अपनी सरकार से जवाब मांग रही है कि आख़िर कब तक लोगों की आवाज़ को दबाया जाएगा, और सरकार अपनी मनमानी करती रहेगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति मिलने के बाद चीन की जनता अपनी वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।
FEB 10 (WTN) – चीन में कोरोना वायरस से 900 से ज़्यादा लोगों की मौत के बाद चीन की वामपंथी सरकार कठघरे में खड़ी है। पहले दबी जुबान में, लेकिन अब खुले आम चीन के लोग अपनी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं कि चीन की वामपंथी सरकार की तानाशाही और लापरवाही के कारण ही कोरोना वायरस एक महामारी बन गया है। बता दें कि कोरोना वायरस की ऐसी दहशत है कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। और तो और कोरोना वायरस के कारण चीन में ऑफिस और उद्योग तक बंद पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक़, कोरोना वायरस से चीन की अर्थव्यवस्था को क़रीब 140 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। दरअसल, कोरोना वायरस के कारण चीन में कई कम्पनियों के प्लांट्स बंद पड़े हैं। वहीं कई देशों ने चीन के साथ आयात-निर्यात पर भी फि़लहाल पाबंदी लगा दी है, जिसके कारण चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से हिल गई है।
ख़ैर चीन की अर्थव्यवस्था तो कभी ना कभी तो पटरी पर आ ही जाएगी, लेकिन 900 से ज़्यादा लोगों की मौत के लिए चीन की जनता अपनी वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्से में है। चीनी लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस संक्रमण पर नियंत्रण पा लिया जाता, तो कोरोना वायरस के कारण इतने लोगों को जान से हाथ ना धोना पड़ता। दरअसल, चीन के एक डॉक्टर ली वेनलिआंग ने कोरोना वायरस के बारे में काफ़ी पहले ही जानकारी दे दी थी, लेकिन आरोप है कि चीन की वामपंथी सरकार ने स्थानीय पुलिस के ज़रिए डॉक्टर ली को चुप रहने का दबाव डाला। चीन की सरकार इस बीमारी को छिपाना चाहती थी, लेकिन चीन की सरकार की यह ग़लती भारी पड़ गई और कोरोना वायरस संक्रमण अब चीन में एक महामारी बन गया है।
जब डॉक्टर ली को कोरोना वायरस के बारे में जानकारी मिली, तो डॉक्टर ली ने इसके बारे में लोगों को बताना चाहा। लेकिन चीन की सरकार ने उन पर पुलिस के ज़रिए दबाव बनाया कि वे इस बात को किसी से ना कहें। हालांकि, डॉक्टर ली ने कोरोना वायरस के बारे में एक ग्रुप में सबसे पहले जानकारी दी थी कि संक्रमित मरीज कोरोना वायरस से पीड़ित हो सकते हैं। लेकिन पुलिस ने शुरुआत में इसे अफवाह मान लिया था। डॉक्टर ली ही नहीं अन्य डॉक्टर्स पर भी पुलिस ने दबाव डाला कि वे कोरोना वायरस के बारे में लोगों को जानकारी ना दें।
कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ते हुए 34 साल के व्हिस्लब्लोअर डॉक्टर ली वेनलिआंग बाद में ख़ुद भी कोरोना वायरस से पीड़ित हो गए थे, और फ़िर उनकी मौत हो गई। लेकिन डॉक्टर ली की मौत ने चीन को लोगों को जगा दिया है, और चीन के लोगों में अब अपनी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा है। ख़ासकर डॉक्टर्स और स्कॉलर्स अपने देश की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलन्द करने लगे हैं। चीन के डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि वे अब चीन में राजनीतिक बदलाव और फ्री स्पीच की मांग तक करने लगे हैं। हालांकि, यह आपको काफ़ी सामान्य बात लग रही है, लेकिन चीन के वामपंथी शासन में राजनीतिक बदलाव और फ्री स्पीच की मांग करना सीधे तौर पर सरकार को चुनौती देना है।
डॉक्टर ली की मौत के बाद कम से कम दो ओपन लेटर चीन की सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की मांग करने वाले एक लेटर पर वुहान के 10 प्रोफेसर्स के हस्ताक्षर हैं। पत्र में साफ़ लिखा है कि डॉक्टर ली ने पूरे जज़्बे और सामर्थ्य से देश और समाज के हित में काम किया था, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज़ दबा दी। इस ओपन लेटर में साफ़ कहा गया है कि सरकार को डॉक्टर ली से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगना चाहिए। लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया कि चीन की वामपंथी सरकार को ख़ुद के ख़िलाफ़ कुछ भी लिखना या बोलना पसन्द नहीं है। और इसी कारण से चीन की वामपंथी सरकार ने सोशल मीडिया Weibo पर कथित तौर से इस पत्र को सेंसर कर दिया है। वहीं एक दूसरे पत्र को बीजिंग की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी Tsinghua के एलुमनी समूह ने लिखा है। बता दें कि इस पत्र में लिखा है कि अधिकारी आम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की गारण्टी दें।
कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण इतना ज़्यादा नहीं फैलता, यदि चीन की वामपंथी सरकार इस संक्रमण की जानकारी दबाने की ग़लती नहीं करती। दरअसल, चीन की सरकार की मंशा थी कि इस संक्रमण के बारे में लोगों को नहीं बताया जाए, क्योंकि ऐसा होने पर चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता। हालांकि, चीन की अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस गहरा असर डाल चुका है। लेकिन अब चीन की जनता अपनी सरकार से जवाब मांग रही है कि आख़िर कब तक लोगों की आवाज़ को दबाया जाएगा, और सरकार अपनी मनमानी करती रहेगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति मिलने के बाद चीन की जनता अपनी वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।