रेलवे प्लेटफॉर्म पर अब कम ख़र्च में कराइये शरीर के 16 पैरामीटर्स की जाचें
Tuesday - February 11, 2020 10:41 am ,
Category : WTN HINDI
हेल्थ एटीएम से कम समय में होती हैं शरीर की जांच
नॉन फेयर रेवेन्यू बढ़ाने रेलवे ने प्लेटफॉर्म्स पर लगाए हेल्थ एटीएम
FEB 11 (WTN) – हर किसी की इच्छा रहती है कि उसे अपने स्वास्थ्य की जानकारी कम पैसों में और बिना किसी परेशानी के हासिल हो जाए। आधुनिक युग में मनुष्य की खाने पीने की ख़राब आदतों और अनियमित दिनचर्या के कारण उसे तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार समय ना होने, या पैसा ना होने के कारण भी लोग अपने स्वास्थ्य की रूटीन जांच नहीं करा पाते हैं। ऐसे में भारतीय रेलवे ने लोगों को त्वरित मेडिकल रिपोर्ट्स देने के लिए हेल्थ एटीएम की शुरुआत की है।
दरअसल, रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के इंतज़ार में यात्रियों का काफ़ी समय ख़राब होता है। ऐसे में इस समय का सही इस्तेमाल करते हुए यात्री बेहद ही कम क़ीमत में अपना मेडिकल चेकअप आसानी से करा सकते हैं। देश के चुनिंदा रेलवे स्टेशन्स पर रेलवे ने इन हेल्थ एटीएम को 'न्यू इनोवेटिव एण्ड आइडिया स्कीम' के तहत लगाया है, जिससे नॉन-फेयर रेवेन्यू हासिल किया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें साल 2010-11 में पहली बार नॉन-फेयर रेवेन्यू का विचार अस्तित्व में आया था, जिसके बाद इस पर अमल किया गया। लेकिन कई सालों तक इसके ज़रिये कुछ ज़्यादा कमाई नहीं हुई। हालांकि, रेलवे का दावा है कि पिछले साल रेलवे को इस पहल से अच्छी कमाई हुई है।
बात करें हेल्थ एटीएम की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसकी सहायता से जांच के बाद कुछ ही सेकेण्ड में मशीन से एक प्रिंटेड स्लिप निकलती है, जिसमें जांच कराने वाले व्यक्ति की मेडिकल जांच का रिजल्ट होता है। इस मशीन की सहायता से मास इंडेक्स, हाइड्रेजन लेवल, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और बॉडी में प्रोटील लेवल की जांच समेत 16 जाचें सिर्फ़ 50 से 100 रुपये में हासिल हो जाती हैं। रेलवे का दावा है कि यह सभी जांचे काफ़ी सस्ती दाम पर और कम समय में की जा रही हैं, जबकि इन्हीं जांचों के लिए कहीं ज़्यादा पैसा एक आदमी को ख़र्च करना पड़ता है। रेलवे के मुताबिक़, मेडिकल जांच के बाद त्वरित मेडिकल रिपोर्ट देने के लिए इन मशीनों में ख़ास तरीक़े का प्वाइंट ऑफ़ केयर डिवाइस और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है।
जानकारी के लिए बता दें कि फिट इण्डिया मूवमेंट' प्रोग्राम के तहत रेलवे की साझेदारी में यह पहल की गई है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सेहत का ध्यान रखने के लिए इस ख़ास सुविधा को शुरू किया है। बता दें कि हेल्थ एटीएम कियोस्क से आप बोन मास, बॉडी मास इंडेक्स, बीपी, मेटाबॉलिक ऐज, बॉडी फैट, हाईड्रेशन, पल्स रेट, हाइट, मसल मास, शरीर का तापमान, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा, और वजन सहित कई पैरामीटर्स की जांच करा सकते हैं।
दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि रेलवे को यात्री किराये और माल भाड़े से होने वाली आमदनी के बाद भी घाटे का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राजस्व की प्राप्ति बढ़ाने के लिए हाल ही में रेल किराये में वृद्धि भी की गई है, लेकिन इतना होने के बाद भी रेलवे का घाटा कम नहीं हो रहा है। वहीं रेल किराये में ज़्यादा वृद्धि कर जनता को नाराज़ भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में रेलवे अब नॉन फेयर रेवेन्यू के ज़रिये अपनी कमाई बढ़ा रहा है। बता दें कि रेलवे के सालाना कुल रेवेन्यू का क़रीब 15 से 20 प्रतिशत नॉन-फेयर रेवेन्यू से आता है। हाल फ़िलहाल तक रेलवे सिर्फ़ विज्ञापन के ज़रिये ही नॉन-फेयर रेवेन्यू जुटाता था, लेकिन अब रेलवे ने नॉन फेयर रेवेन्यू हासिल करने के लिए कई अन्य तरीक़ों को आजमाना शुरू कर दिया है।
FEB 11 (WTN) – हर किसी की इच्छा रहती है कि उसे अपने स्वास्थ्य की जानकारी कम पैसों में और बिना किसी परेशानी के हासिल हो जाए। आधुनिक युग में मनुष्य की खाने पीने की ख़राब आदतों और अनियमित दिनचर्या के कारण उसे तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार समय ना होने, या पैसा ना होने के कारण भी लोग अपने स्वास्थ्य की रूटीन जांच नहीं करा पाते हैं। ऐसे में भारतीय रेलवे ने लोगों को त्वरित मेडिकल रिपोर्ट्स देने के लिए हेल्थ एटीएम की शुरुआत की है।
दरअसल, रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के इंतज़ार में यात्रियों का काफ़ी समय ख़राब होता है। ऐसे में इस समय का सही इस्तेमाल करते हुए यात्री बेहद ही कम क़ीमत में अपना मेडिकल चेकअप आसानी से करा सकते हैं। देश के चुनिंदा रेलवे स्टेशन्स पर रेलवे ने इन हेल्थ एटीएम को 'न्यू इनोवेटिव एण्ड आइडिया स्कीम' के तहत लगाया है, जिससे नॉन-फेयर रेवेन्यू हासिल किया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें साल 2010-11 में पहली बार नॉन-फेयर रेवेन्यू का विचार अस्तित्व में आया था, जिसके बाद इस पर अमल किया गया। लेकिन कई सालों तक इसके ज़रिये कुछ ज़्यादा कमाई नहीं हुई। हालांकि, रेलवे का दावा है कि पिछले साल रेलवे को इस पहल से अच्छी कमाई हुई है।
बात करें हेल्थ एटीएम की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसकी सहायता से जांच के बाद कुछ ही सेकेण्ड में मशीन से एक प्रिंटेड स्लिप निकलती है, जिसमें जांच कराने वाले व्यक्ति की मेडिकल जांच का रिजल्ट होता है। इस मशीन की सहायता से मास इंडेक्स, हाइड्रेजन लेवल, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और बॉडी में प्रोटील लेवल की जांच समेत 16 जाचें सिर्फ़ 50 से 100 रुपये में हासिल हो जाती हैं। रेलवे का दावा है कि यह सभी जांचे काफ़ी सस्ती दाम पर और कम समय में की जा रही हैं, जबकि इन्हीं जांचों के लिए कहीं ज़्यादा पैसा एक आदमी को ख़र्च करना पड़ता है। रेलवे के मुताबिक़, मेडिकल जांच के बाद त्वरित मेडिकल रिपोर्ट देने के लिए इन मशीनों में ख़ास तरीक़े का प्वाइंट ऑफ़ केयर डिवाइस और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है।
जानकारी के लिए बता दें कि फिट इण्डिया मूवमेंट' प्रोग्राम के तहत रेलवे की साझेदारी में यह पहल की गई है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सेहत का ध्यान रखने के लिए इस ख़ास सुविधा को शुरू किया है। बता दें कि हेल्थ एटीएम कियोस्क से आप बोन मास, बॉडी मास इंडेक्स, बीपी, मेटाबॉलिक ऐज, बॉडी फैट, हाईड्रेशन, पल्स रेट, हाइट, मसल मास, शरीर का तापमान, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा, और वजन सहित कई पैरामीटर्स की जांच करा सकते हैं।
दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि रेलवे को यात्री किराये और माल भाड़े से होने वाली आमदनी के बाद भी घाटे का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राजस्व की प्राप्ति बढ़ाने के लिए हाल ही में रेल किराये में वृद्धि भी की गई है, लेकिन इतना होने के बाद भी रेलवे का घाटा कम नहीं हो रहा है। वहीं रेल किराये में ज़्यादा वृद्धि कर जनता को नाराज़ भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में रेलवे अब नॉन फेयर रेवेन्यू के ज़रिये अपनी कमाई बढ़ा रहा है। बता दें कि रेलवे के सालाना कुल रेवेन्यू का क़रीब 15 से 20 प्रतिशत नॉन-फेयर रेवेन्यू से आता है। हाल फ़िलहाल तक रेलवे सिर्फ़ विज्ञापन के ज़रिये ही नॉन-फेयर रेवेन्यू जुटाता था, लेकिन अब रेलवे ने नॉन फेयर रेवेन्यू हासिल करने के लिए कई अन्य तरीक़ों को आजमाना शुरू कर दिया है।