हमेशा से ही सच्चाई से ‘डरती’ रही है चीन की वामपंथी सरकार
Tuesday - February 11, 2020 12:46 pm ,
Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस मामले में हो रही है चीन सरकार की ‘फ़जीयत’
कोरोना वायरस की सच्चाई को सामने लाने वालों को ‘प्रताड़ित’ कर रही चीन की वामपंथी सरकार
FEB 11 (WTN) – दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की वामपंथी सरकार हमेशा से ही सच्चाई से डरती रही है। प्रेस पर पाबंदी हो या फ़िर सेंसरशिप, या फ़िर 1989 में छात्रों के लोकतंत्र समर्थन आन्दोलन को बेरहमी से कुचलना, यह सभी उदाहरण बताते हैं कि चीन की वामपंथी सरकार को ख़ुद की अव्यवस्था के ख़िलाफ़ एक भी आवाज़ बर्दाश्त नहीं है। और चीन की वामपंथी सरकार अपने ख़िलाफ़ उठी हर एक आवाज़ को दबा देती है। कुछ ऐसा ही इन दिनों एक बार फ़िर से कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में चीन की वामपंथी सरकार के रवैये से साबित हो रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में फैला कोरोना वायरस संक्रमण अब वहां पर महामारी बन गया है। चीन सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, अभी तक कोरोना वायरस के कारण चीन में 1000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है, और 42,000 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हैं। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने, और कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम में चीन की वामपंथी सरकार नाकाम ही नज़र आई है। चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से ना फैलकर वुहान स्थित वायरोलॉजी लैब से फैला है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस वायरोलॉजी लैब में चीन सरकार की सहमति से जैविक हथियार बनाए जा रहे थे।
अब चुंकि चीन में मीडिया पर तमाम तरह की पाबंदियां हैं, ऐसे में कोरोना वायरस की सही सच्चाई पूरी दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है। विदेशी मीडिया का आरोप है कि चीन की सरकार कोरोना वायरस के मामले में बहुत कुछ पूरी दुनिया से छिपा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यहां तक दावा है कि कोरोना वायरस के कारण मौतों और संक्रमण के कारण मरीज़ों की संख्या का आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है, लेकिन चीन सरकार सच्चाई को बाहर नहीं आने दे रही है। दरअसल, शुरू से ही चीन सरकार कोरोना वायरस मामले में बैकफुट पर है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में कोरोना वायरस को लेकर पहली बार चेतावनी देने वाले डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत से चीनी लोग काफ़ी गुस्से में हैं। बता दें कि डॉ ली ने ही सबसे पहले बताया था कि लोगों में फैल रहा संक्रमण कोरोना वायरस है। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार ने स्थानीय पुलिस की मदद से डॉक्टर ली को डराया और धमकाया था कि वे कोरोना वायरस की सच्चाई को किसी को ना बताएं। डॉक्टर ली ही नहीं, बल्कि कई अन्य डॉक्टर्स को भी कोरोना वायरस की सच्चाई बताने से रोका गया था। डॉक्टर ली के साथ चीन की वामपंथी सरकार ने जो भी सलूक किया, उससे चीन की जनता अपनी सरकार से नाराज़ है। लेकिन सरकार के ख़िलाफ़ बोलने पर पाबंदी होने के कारण चीनी जनता अपने गुस्से को प्रदर्शित नहीं कर पा रही है।
कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस की सच्चाई बताने के बाद चीन की सरकार ने डॉक्टर ली को प्रताड़ित किया था। वहीं अब कोरोना वायरस की सच्चाई बताने वाले चीन के एक नागरिक पत्रकार चेन कुशी के गायब होने से मामला और भी ज़्यादा संवेदनशील हो गया है। जानकारी के लिए बता दें कि चेन कुशी वुहान से कोरोना वायरस पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। दरअसल, चीन के लोग की मांग है कि कोरोना वायरस को लेकर जो भी सच्चाई है वो सबके सामने आनी चाहिए। ऐसे में कोरोना वायरस की रिपोर्टिंग कर रहे चेन कुशी गुरुवार से ही गायब हैं। कुशी के गायब होने के बाद चीनी लोगों में गुस्सा है कि चीन सरकार बोलने की आज़ादी पर प्रहार कर रही है और सच्चाई को सामने नहीं आने देना चाहती है।
पहले डॉक्टर ली और अब पत्रकार चेन कुशी के साथ चीन की वामपंथी सरकार ने जो किया है, उससे चीन की जनता में नाराज़गी फैलती जा रही है। सोशल मीडिया पर चीनी लोग अब अपनी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं, और लोगों की मांग है कि सरकार को अपनी ग़लती के लिए सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगना चाहिए। हालांकि, पत्रकार चेन कुशी के गायब होने पर पुलिस का कहना है कि संक्रमण से बचाने के लिए कुशी को अलग रखा गया है। लेकिन चेन के रिश्तेदारों और दोस्तों का कहना है कि संक्रमण के बहाने चेन कुशी को हिरासत में रखा गया है। चेन के गायब होने के बाद चीन की सोशल मीडिया पर चेन कुशी की रिहाई की मांग तेज़ हो गई है।
दरअसल, पत्रकार चेन कुशी ने वुहान आकर कोरोना वायरस के बारे में रिपोर्टिंग की थी, और चेन ने अपने वीडियोज के ज़रिये यह बताने की कोशिश की थी कि कोरोना वायरस के कारण वुहान में हालात काफ़ी खराब हो चुके हैं। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार को पत्रकार चेन कुशी की रिपोर्टिंग रास नहीं आई, और आरोप है कि चीन की सरकार ने संक्रमण से बचाने का बहाना बनाकर पत्रकार कुशी को हिरासत में ले लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि चेन कुशी कोरोना वायरस के बारे में वुहान में कवरेज करने से पहले हॉन्ग कॉन्ग में हुए विरोध प्रदर्शनों की भी कवरेज कर चुके हैं, जिसके बाद चीन सरकार की कई एजेंसियों ने उनसे कड़ी पूछताछ की थी।
बता दें कि चेन कुशी चीन की सोशल मीडिया में काफी ज़्यादा फेमस हैं, और यहां पर उनके लाखों में फालोअर्स हैं। लेकिन उनके सभी सोशल मीडिया एकाउंट को डिलीट कर दिया गया है। वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलन्द करते हुए चेन कुशी ने अपने एक वीडियो में कहा था कि बोलने की आज़ादी हर नागरिक का अधिकार है, और चीन के संविधान का आर्टिकल 35 उनको यह अधिकार देता है। चेन का कहना है कि वो एक ज़िम्मेदार नागरिक पत्रकार हैं, और चीन के हालात के बारे में सही-सही जानकारी देना उनकी ज़िम्मेदारी है। अपने एक वीडियो में चेन कुशी ने यह भी कहा था कि वे अपने कैमरे के ज़रिये वुहान की असली तस्वीर दुनिया के सामने लाएंगे।
डॉक्टर ली वेनलियांग के बाद अब नागरिक पत्रकार चेन कुशी चीन के लोगों के हीरो बन गए हैं। धीरे-धीरे चीनी लोगों को लगने लगा है कि उनकी वामपंथी सरकार उनकी आवाज़ को दबा रही है। दरअसल, चीन के लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि चीन की सरकार ने अपने ही देश के नागरिकों से कोरोना वायरस संक्रमण की सच्चाई छिपाना चाही। चीनी लोग अपनी सरकार से यह सवाल कर रहे हैं कि आख़िर क्या कारण था कि कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में सरकार ने इतनी बड़ी लापरवाही बरती? इधर, कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण मिलने के बाद चीन सरकार के ख़िलाफ़ वहां की जनता एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।
FEB 11 (WTN) – दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की वामपंथी सरकार हमेशा से ही सच्चाई से डरती रही है। प्रेस पर पाबंदी हो या फ़िर सेंसरशिप, या फ़िर 1989 में छात्रों के लोकतंत्र समर्थन आन्दोलन को बेरहमी से कुचलना, यह सभी उदाहरण बताते हैं कि चीन की वामपंथी सरकार को ख़ुद की अव्यवस्था के ख़िलाफ़ एक भी आवाज़ बर्दाश्त नहीं है। और चीन की वामपंथी सरकार अपने ख़िलाफ़ उठी हर एक आवाज़ को दबा देती है। कुछ ऐसा ही इन दिनों एक बार फ़िर से कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में चीन की वामपंथी सरकार के रवैये से साबित हो रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में फैला कोरोना वायरस संक्रमण अब वहां पर महामारी बन गया है। चीन सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, अभी तक कोरोना वायरस के कारण चीन में 1000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है, और 42,000 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हैं। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने, और कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम में चीन की वामपंथी सरकार नाकाम ही नज़र आई है। चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से ना फैलकर वुहान स्थित वायरोलॉजी लैब से फैला है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस वायरोलॉजी लैब में चीन सरकार की सहमति से जैविक हथियार बनाए जा रहे थे।
अब चुंकि चीन में मीडिया पर तमाम तरह की पाबंदियां हैं, ऐसे में कोरोना वायरस की सही सच्चाई पूरी दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है। विदेशी मीडिया का आरोप है कि चीन की सरकार कोरोना वायरस के मामले में बहुत कुछ पूरी दुनिया से छिपा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यहां तक दावा है कि कोरोना वायरस के कारण मौतों और संक्रमण के कारण मरीज़ों की संख्या का आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है, लेकिन चीन सरकार सच्चाई को बाहर नहीं आने दे रही है। दरअसल, शुरू से ही चीन सरकार कोरोना वायरस मामले में बैकफुट पर है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में कोरोना वायरस को लेकर पहली बार चेतावनी देने वाले डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत से चीनी लोग काफ़ी गुस्से में हैं। बता दें कि डॉ ली ने ही सबसे पहले बताया था कि लोगों में फैल रहा संक्रमण कोरोना वायरस है। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार ने स्थानीय पुलिस की मदद से डॉक्टर ली को डराया और धमकाया था कि वे कोरोना वायरस की सच्चाई को किसी को ना बताएं। डॉक्टर ली ही नहीं, बल्कि कई अन्य डॉक्टर्स को भी कोरोना वायरस की सच्चाई बताने से रोका गया था। डॉक्टर ली के साथ चीन की वामपंथी सरकार ने जो भी सलूक किया, उससे चीन की जनता अपनी सरकार से नाराज़ है। लेकिन सरकार के ख़िलाफ़ बोलने पर पाबंदी होने के कारण चीनी जनता अपने गुस्से को प्रदर्शित नहीं कर पा रही है।
कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस की सच्चाई बताने के बाद चीन की सरकार ने डॉक्टर ली को प्रताड़ित किया था। वहीं अब कोरोना वायरस की सच्चाई बताने वाले चीन के एक नागरिक पत्रकार चेन कुशी के गायब होने से मामला और भी ज़्यादा संवेदनशील हो गया है। जानकारी के लिए बता दें कि चेन कुशी वुहान से कोरोना वायरस पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। दरअसल, चीन के लोग की मांग है कि कोरोना वायरस को लेकर जो भी सच्चाई है वो सबके सामने आनी चाहिए। ऐसे में कोरोना वायरस की रिपोर्टिंग कर रहे चेन कुशी गुरुवार से ही गायब हैं। कुशी के गायब होने के बाद चीनी लोगों में गुस्सा है कि चीन सरकार बोलने की आज़ादी पर प्रहार कर रही है और सच्चाई को सामने नहीं आने देना चाहती है।
पहले डॉक्टर ली और अब पत्रकार चेन कुशी के साथ चीन की वामपंथी सरकार ने जो किया है, उससे चीन की जनता में नाराज़गी फैलती जा रही है। सोशल मीडिया पर चीनी लोग अब अपनी सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं, और लोगों की मांग है कि सरकार को अपनी ग़लती के लिए सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगना चाहिए। हालांकि, पत्रकार चेन कुशी के गायब होने पर पुलिस का कहना है कि संक्रमण से बचाने के लिए कुशी को अलग रखा गया है। लेकिन चेन के रिश्तेदारों और दोस्तों का कहना है कि संक्रमण के बहाने चेन कुशी को हिरासत में रखा गया है। चेन के गायब होने के बाद चीन की सोशल मीडिया पर चेन कुशी की रिहाई की मांग तेज़ हो गई है।
दरअसल, पत्रकार चेन कुशी ने वुहान आकर कोरोना वायरस के बारे में रिपोर्टिंग की थी, और चेन ने अपने वीडियोज के ज़रिये यह बताने की कोशिश की थी कि कोरोना वायरस के कारण वुहान में हालात काफ़ी खराब हो चुके हैं। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार को पत्रकार चेन कुशी की रिपोर्टिंग रास नहीं आई, और आरोप है कि चीन की सरकार ने संक्रमण से बचाने का बहाना बनाकर पत्रकार कुशी को हिरासत में ले लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि चेन कुशी कोरोना वायरस के बारे में वुहान में कवरेज करने से पहले हॉन्ग कॉन्ग में हुए विरोध प्रदर्शनों की भी कवरेज कर चुके हैं, जिसके बाद चीन सरकार की कई एजेंसियों ने उनसे कड़ी पूछताछ की थी।
बता दें कि चेन कुशी चीन की सोशल मीडिया में काफी ज़्यादा फेमस हैं, और यहां पर उनके लाखों में फालोअर्स हैं। लेकिन उनके सभी सोशल मीडिया एकाउंट को डिलीट कर दिया गया है। वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलन्द करते हुए चेन कुशी ने अपने एक वीडियो में कहा था कि बोलने की आज़ादी हर नागरिक का अधिकार है, और चीन के संविधान का आर्टिकल 35 उनको यह अधिकार देता है। चेन का कहना है कि वो एक ज़िम्मेदार नागरिक पत्रकार हैं, और चीन के हालात के बारे में सही-सही जानकारी देना उनकी ज़िम्मेदारी है। अपने एक वीडियो में चेन कुशी ने यह भी कहा था कि वे अपने कैमरे के ज़रिये वुहान की असली तस्वीर दुनिया के सामने लाएंगे।
डॉक्टर ली वेनलियांग के बाद अब नागरिक पत्रकार चेन कुशी चीन के लोगों के हीरो बन गए हैं। धीरे-धीरे चीनी लोगों को लगने लगा है कि उनकी वामपंथी सरकार उनकी आवाज़ को दबा रही है। दरअसल, चीन के लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि चीन की सरकार ने अपने ही देश के नागरिकों से कोरोना वायरस संक्रमण की सच्चाई छिपाना चाही। चीनी लोग अपनी सरकार से यह सवाल कर रहे हैं कि आख़िर क्या कारण था कि कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में सरकार ने इतनी बड़ी लापरवाही बरती? इधर, कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण मिलने के बाद चीन सरकार के ख़िलाफ़ वहां की जनता एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।