कोरोना वायरस मामले में पूरी दुनिया को ‘धोखा’ दे रही चीन की वामपंथी सरकार
Wednesday - February 12, 2020 10:30 am ,
Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस से मौत के आंकड़े छिपा रही चीन की सरकार
चीन की वामपंथी सरकार की ‘ग़लती’ और ‘लापरवाही’ से बेमौत मारे जा रहे लोग
FEB 12 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन में अब एक महामारी बन गया है। चीन सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक क़रीब 1100 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कोरोना वायरस के कारण 40,000 से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हक़ीक़त यह है कि कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या क़रीब 25,000 है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया की आज़ादी पर पाबंदी और सेंसरशिप है। ऐसे में कोरोना वायरस की भयावहता के सही आंकड़े पूरी दुनिया के सामने नहीं आ पा रहे हैं। कोरोना वायरस से सम्बन्धित जो जानकारी चीन पूरी दुनिया को दे रहा है, वो ही जानकारी पूरी दुनिया के पास पहुंच रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस चीन में काफ़ी तबाही मचा चुका है।
अब चीन के लोग भी अपने देश की वामपंथी सरकार के रवैये से ख़ासे नाराज़ नज़र आ रहे हैं। चीनी लोगों का आरोप है कि उनकी सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाने की कोशिश की, और इस संक्रमण को फैलने से रोकने में लापरवाही बरती। जैसा कि हमने आपको बताया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चीन में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या क़रीब 25000 हो सकती है। इस आशंका को बल वुहान शहर समेत कुछ अन्य शहरों से मिली सेटेलाइट तस्वीरों से मिलता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वुहान शहर की सेटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि वहां पर आसमान में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा काफ़ी ज़्यादा है। ब्रिटेन की एक वेबसाइट के मुताबिक़, सेटेलाइट से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि वुहान शहर के आसमान में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा 1700 यूजी/क्यूबिक मीटर है, जो कि ख़तरे के स्तर से 21 गुना ज़्यादा है। ऐसी ही कुछ तस्वीरें वुहान से 900 किलोमीटर दूर चोंगक्विंग शहर की भी हैं, जहां पर कोरोना वायरस बीमारी बड़े पैमाने पर फैली है। वहीं चीन के दूसरे शहर बीजिंग और शंघाई में भी सल्फर डाइऑक्साइड खतरनाक स्तर पर है।
वैज्ञानिकों के अनुसार आसमान में इतनी भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड होने के दो ही कारण हो सकते हैं। पहला कारण है कि वहां पर भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट को जलाया जा रहा हो। वहीं दूसरा कारण हो सकता है कि वहां पर मानव शवों को जलाया गया हो। जानकारी के लिए बता दें कि शवों को जलाने के दौरान भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अकेले वुहान शहर में ही क़रीब 14000 से ज़्यादा लोगों के शवों को जलाया गया है। बता दें कि चीन में शवों को जलाए जाने की परम्परा नहीं है। ऐसे में आंशका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण से हुई हज़ारों लोगों की मौत के बाद उनके शवों को जला दिया गया है।
दरअसल, शुरू से ही चीन कोरोना वायरस से सम्बन्धित जानकारी को पूरी दुनिया से छिपा रहा है। सबसे पहले तो चीन की वामपंथी सरकार ने डॉक्टर्स पर दबाव डाला कि वे कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में लोगों को ना बताएं। वहीं बाद में इस संक्रमण के फैलने के बाद चीन की वामपंथी सरकार ने पूरी दुनिया से इस सच्चाई को छिपाकर रखा कि यह संक्रमण कितना ख़तरनाक रूप धारण कर चुका है, और इस संक्रमण के कारण कितने लोगों की मौत हो चुकी। लेकिन इधर चीन की सोशल मीडिया पर नज़र रखने वालों के मुताबिक़, चीनी सोशल मीडिया से जानकारी मिली है कि वुहान शहर के बाहरी हिस्से में बड़ी तादात में लोगों के शव जलाए जा रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ताइवान की मीडिया ने चीन में फैले जानलेवा कोरोना वायरस संक्रमण पर एक बड़ा खुलासा किया था। जानकारी के मुताबिक़, चीन की दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी टेनसेंट का कुछ डाटा लीक हुआ था, जिसमें कोरोना वायरस से मौत के जो आंकड़े दिए गए थे वो काफ़ी चौंकाने वाले थे। दरअसल, टेनसेंट कम्पनी के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण से चीन में क़रीब 24000 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन चीन की वामपंथी सरकार इस आंकड़े को छिपा रही है। कोरोना वायरस अब चीन में महामारी बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अकेले वुहान शहर में ही अगले कुछ दिनों में करीब 5 लाख लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ सकते हैं।
साफ़ है कि कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाना, और उससे निपटने के उपाय देरी से करना चीन के लिए जानलेवा साबित हो गया है। यदि समय रहते चीन की वामपंथी सरकार डॉक्टर्स की सलाह मान लेती, तो आज चीन में कोरोना वायरस के कारण इतने ज़्यादा लोगों की मौत नहीं होती। लेकिन इतना होने के बाद भी चीन की वामपंथी सरकार अपनी लापरवाही और ग़लती को स्वीकार करने के बजाय इस मामले को उठाने वाले लोगों की आवाज़ दबा रही है। चीनी जनता अपनी सरकार से सवाल करना चाहती है, लेकिन चीन के वामपंथी शासन में सरकार की ग़लतियों पर उससे सवाल करना मना है।
FEB 12 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन में अब एक महामारी बन गया है। चीन सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक क़रीब 1100 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कोरोना वायरस के कारण 40,000 से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हक़ीक़त यह है कि कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या क़रीब 25,000 है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया की आज़ादी पर पाबंदी और सेंसरशिप है। ऐसे में कोरोना वायरस की भयावहता के सही आंकड़े पूरी दुनिया के सामने नहीं आ पा रहे हैं। कोरोना वायरस से सम्बन्धित जो जानकारी चीन पूरी दुनिया को दे रहा है, वो ही जानकारी पूरी दुनिया के पास पहुंच रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस चीन में काफ़ी तबाही मचा चुका है।
अब चीन के लोग भी अपने देश की वामपंथी सरकार के रवैये से ख़ासे नाराज़ नज़र आ रहे हैं। चीनी लोगों का आरोप है कि उनकी सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाने की कोशिश की, और इस संक्रमण को फैलने से रोकने में लापरवाही बरती। जैसा कि हमने आपको बताया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चीन में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या क़रीब 25000 हो सकती है। इस आशंका को बल वुहान शहर समेत कुछ अन्य शहरों से मिली सेटेलाइट तस्वीरों से मिलता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वुहान शहर की सेटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि वहां पर आसमान में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा काफ़ी ज़्यादा है। ब्रिटेन की एक वेबसाइट के मुताबिक़, सेटेलाइट से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि वुहान शहर के आसमान में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा 1700 यूजी/क्यूबिक मीटर है, जो कि ख़तरे के स्तर से 21 गुना ज़्यादा है। ऐसी ही कुछ तस्वीरें वुहान से 900 किलोमीटर दूर चोंगक्विंग शहर की भी हैं, जहां पर कोरोना वायरस बीमारी बड़े पैमाने पर फैली है। वहीं चीन के दूसरे शहर बीजिंग और शंघाई में भी सल्फर डाइऑक्साइड खतरनाक स्तर पर है।
वैज्ञानिकों के अनुसार आसमान में इतनी भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड होने के दो ही कारण हो सकते हैं। पहला कारण है कि वहां पर भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट को जलाया जा रहा हो। वहीं दूसरा कारण हो सकता है कि वहां पर मानव शवों को जलाया गया हो। जानकारी के लिए बता दें कि शवों को जलाने के दौरान भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अकेले वुहान शहर में ही क़रीब 14000 से ज़्यादा लोगों के शवों को जलाया गया है। बता दें कि चीन में शवों को जलाए जाने की परम्परा नहीं है। ऐसे में आंशका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण से हुई हज़ारों लोगों की मौत के बाद उनके शवों को जला दिया गया है।
दरअसल, शुरू से ही चीन कोरोना वायरस से सम्बन्धित जानकारी को पूरी दुनिया से छिपा रहा है। सबसे पहले तो चीन की वामपंथी सरकार ने डॉक्टर्स पर दबाव डाला कि वे कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में लोगों को ना बताएं। वहीं बाद में इस संक्रमण के फैलने के बाद चीन की वामपंथी सरकार ने पूरी दुनिया से इस सच्चाई को छिपाकर रखा कि यह संक्रमण कितना ख़तरनाक रूप धारण कर चुका है, और इस संक्रमण के कारण कितने लोगों की मौत हो चुकी। लेकिन इधर चीन की सोशल मीडिया पर नज़र रखने वालों के मुताबिक़, चीनी सोशल मीडिया से जानकारी मिली है कि वुहान शहर के बाहरी हिस्से में बड़ी तादात में लोगों के शव जलाए जा रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ताइवान की मीडिया ने चीन में फैले जानलेवा कोरोना वायरस संक्रमण पर एक बड़ा खुलासा किया था। जानकारी के मुताबिक़, चीन की दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी टेनसेंट का कुछ डाटा लीक हुआ था, जिसमें कोरोना वायरस से मौत के जो आंकड़े दिए गए थे वो काफ़ी चौंकाने वाले थे। दरअसल, टेनसेंट कम्पनी के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण से चीन में क़रीब 24000 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन चीन की वामपंथी सरकार इस आंकड़े को छिपा रही है। कोरोना वायरस अब चीन में महामारी बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अकेले वुहान शहर में ही अगले कुछ दिनों में करीब 5 लाख लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ सकते हैं।
साफ़ है कि कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाना, और उससे निपटने के उपाय देरी से करना चीन के लिए जानलेवा साबित हो गया है। यदि समय रहते चीन की वामपंथी सरकार डॉक्टर्स की सलाह मान लेती, तो आज चीन में कोरोना वायरस के कारण इतने ज़्यादा लोगों की मौत नहीं होती। लेकिन इतना होने के बाद भी चीन की वामपंथी सरकार अपनी लापरवाही और ग़लती को स्वीकार करने के बजाय इस मामले को उठाने वाले लोगों की आवाज़ दबा रही है। चीनी जनता अपनी सरकार से सवाल करना चाहती है, लेकिन चीन के वामपंथी शासन में सरकार की ग़लतियों पर उससे सवाल करना मना है।