दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा पर पड़ी ‘महंगाई की मार’!
Thursday - February 13, 2020 1:54 pm ,
Category : WTN HINDI
महंगाई से परेशान दिल्ली की जनता ने भाजपा के ख़िलाफ़ जताई ‘नाराज़गी’
6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई दर मोदी सरकार के सामने एक बड़ी ‘चुनौती’
FEB 13 (WTN) - दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम केन्द्र की भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा सबक़ हैं। जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, उससे साबित होता है कि दिल्ली की जनता कहीं ना कहीं केन्द्र की भाजपा सरकार से नाराज़ थी। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की 60 से ज़्यादा विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ़ 8 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी है। वैसे तो भाजपा की हार और आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन दिनों-दिन बढ़ती महंगाई भी भाजपा की हार का एक बड़ा कारण है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जनवरी में देश की खुदरा महंगाई दर पिछले 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बता दें कि जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.59 प्रतिशत रही, जो कि 6 साल में सबसे ज़्यादा है। वहीं पिछले साल दिसम्बर के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.35 प्रतिशत थी, तो उससे पहले नवम्बर के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत थी। जानकारी के लिए बता दें कि यह लगातार चौथा महीना है, जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। साफ़ है कि 6 साल की उच्चतम महंगाई दर के कारण भी भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। दरअसल, रोज़मर्रा की खाद्य वस्तुओं जैसे अनाजों व दालों की क़ीमतों में वृद्धि होने से खुदरा महंगाई दर में इतनी तेज़ी देखी गई है।
हालांकि, जनवरी के महीने में सब्ज़ियों की क़ीमतों में गिरावट दर्ज़ की गई है। बता दें कि दिसम्बर 2019 में सब्ज़ियों की महंगाई दर 60.5 प्रतिशत थी, वहीं जनवरी में यह गिरकर 50.19 प्रतिशत रह गई। लेकिन अनाज और दालों की क़ीमतों में जनवरी के महीने में तेज़ी देखी गई। जनवरी के महीने में अनाजों की महंगाई दर 5.25 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यानी दिसम्बर में यह 4.36 प्रतिशत थी। वहीं दालों की महंगाई जनवरी में 16.71 प्रतिशत रही, जो कि दिसम्बर में 15.44 प्रतिशत थी।
इधर, पिछले साल दिसम्बर महीने की तुलना में जनवरी के महीने में मांस, मछली और अण्डों की क़ीमतों में भी वृद्धि दर्ज़ की गई है। जनवरी के महीने में मांस और मछली की महंगाई दर 10.5 प्रतिशत थी. जो कि पिछले महीने यानी दिसम्बर में 9.5 प्रतिशत थी। वहीं, अण्डों की महंगाई दर दिसम्बर के महीने में 8.7 प्रतिशत थी, तो यह जनवरी में बढ़कर 10.4 प्रतिशत हो गई। महंगाई की मार कपड़ों और फुटवियर पर भी देखी गई है। कपड़ों और फुटवियर की महंगाई दर जनवरी के महीने में बढ़कर 1.91 प्रतिशत हो गई, जो कि दिसम्बर के महीने में 1.50 प्रतिशत थी।
साफ़ ज़ाहिर है कि दिनों-दिन बढ़ती महंगाई से परेशान जनता ने दिल्ली में केन्द्र की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई है। हालांकि, दिल्ली में भाजपा की हार के पीछे सिर्फ़ एक ही कारण महंगाई नहीं है। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ 8 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा के लिए महंगाई आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यदि समय रहते महंगाई पर काबू नहीं पाया गया, तो बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम भी भाजपा को निराश कर सकते हैं।
कुछ दिनों पहले ईरान-अमेरिका युद्ध की आशंका के कारण कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण भी जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर में तेज़ी देखी गई है। वहीं वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफ़ी गहरा पड़ा है, ऐसे में उत्पादन पर भी काफ़ी असर देखा गया है। हालांकि, आर्थिक सुस्ती से निपटने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मोदी सरकार ने काफ़ी उपाय किये थे, लेकिन मोदी सरकार के उपाय खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने में असफ़ल नज़र आ रहे हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि दिनों-दिन बढ़ती महंगाई पर मोदी सरकार किस तरह से नियंत्रण हासिल कर पाती है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों में उसे हार का सामना ना करना पड़े।
FEB 13 (WTN) - दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम केन्द्र की भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा सबक़ हैं। जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, उससे साबित होता है कि दिल्ली की जनता कहीं ना कहीं केन्द्र की भाजपा सरकार से नाराज़ थी। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की 60 से ज़्यादा विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ़ 8 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी है। वैसे तो भाजपा की हार और आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन दिनों-दिन बढ़ती महंगाई भी भाजपा की हार का एक बड़ा कारण है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जनवरी में देश की खुदरा महंगाई दर पिछले 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बता दें कि जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.59 प्रतिशत रही, जो कि 6 साल में सबसे ज़्यादा है। वहीं पिछले साल दिसम्बर के महीने में खुदरा महंगाई दर 7.35 प्रतिशत थी, तो उससे पहले नवम्बर के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत थी। जानकारी के लिए बता दें कि यह लगातार चौथा महीना है, जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। साफ़ है कि 6 साल की उच्चतम महंगाई दर के कारण भी भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। दरअसल, रोज़मर्रा की खाद्य वस्तुओं जैसे अनाजों व दालों की क़ीमतों में वृद्धि होने से खुदरा महंगाई दर में इतनी तेज़ी देखी गई है।
हालांकि, जनवरी के महीने में सब्ज़ियों की क़ीमतों में गिरावट दर्ज़ की गई है। बता दें कि दिसम्बर 2019 में सब्ज़ियों की महंगाई दर 60.5 प्रतिशत थी, वहीं जनवरी में यह गिरकर 50.19 प्रतिशत रह गई। लेकिन अनाज और दालों की क़ीमतों में जनवरी के महीने में तेज़ी देखी गई। जनवरी के महीने में अनाजों की महंगाई दर 5.25 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यानी दिसम्बर में यह 4.36 प्रतिशत थी। वहीं दालों की महंगाई जनवरी में 16.71 प्रतिशत रही, जो कि दिसम्बर में 15.44 प्रतिशत थी।
इधर, पिछले साल दिसम्बर महीने की तुलना में जनवरी के महीने में मांस, मछली और अण्डों की क़ीमतों में भी वृद्धि दर्ज़ की गई है। जनवरी के महीने में मांस और मछली की महंगाई दर 10.5 प्रतिशत थी. जो कि पिछले महीने यानी दिसम्बर में 9.5 प्रतिशत थी। वहीं, अण्डों की महंगाई दर दिसम्बर के महीने में 8.7 प्रतिशत थी, तो यह जनवरी में बढ़कर 10.4 प्रतिशत हो गई। महंगाई की मार कपड़ों और फुटवियर पर भी देखी गई है। कपड़ों और फुटवियर की महंगाई दर जनवरी के महीने में बढ़कर 1.91 प्रतिशत हो गई, जो कि दिसम्बर के महीने में 1.50 प्रतिशत थी।
साफ़ ज़ाहिर है कि दिनों-दिन बढ़ती महंगाई से परेशान जनता ने दिल्ली में केन्द्र की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई है। हालांकि, दिल्ली में भाजपा की हार के पीछे सिर्फ़ एक ही कारण महंगाई नहीं है। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ 8 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा के लिए महंगाई आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यदि समय रहते महंगाई पर काबू नहीं पाया गया, तो बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम भी भाजपा को निराश कर सकते हैं।
कुछ दिनों पहले ईरान-अमेरिका युद्ध की आशंका के कारण कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण भी जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर में तेज़ी देखी गई है। वहीं वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफ़ी गहरा पड़ा है, ऐसे में उत्पादन पर भी काफ़ी असर देखा गया है। हालांकि, आर्थिक सुस्ती से निपटने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मोदी सरकार ने काफ़ी उपाय किये थे, लेकिन मोदी सरकार के उपाय खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने में असफ़ल नज़र आ रहे हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि दिनों-दिन बढ़ती महंगाई पर मोदी सरकार किस तरह से नियंत्रण हासिल कर पाती है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों में उसे हार का सामना ना करना पड़े।