एटीएम से पैसा निकालने की फ्री लिमिट हो सकती है कम, बढ़ सकता है इंटरचेंज चार्ज
Monday - February 17, 2020 3:18 pm ,
Category : WTN HINDI
एटीएम से एक तय सीमा के बाद पैसे निकालने पर लगता है चार्ज
जल्द महंगा हो सकता है एटीएम से फ्री लिमिट के बाद पैसा निकालना
FEB 17 (WTN) – एक समय था जब बैंक से पैसा निकालने के लिए आपको बैंक में लम्बी-लम्बी लाइनों में लगना पड़ता था। स्वाभाविक है कि बैंक से पैसा निकलने के लिए लाइनों में लगने से आपका क़ीमती समय बर्बाद होता था। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस युग में ATM (Automated Teller Machine) का इस्तेमाल होने से बैंक में जाकर पैसे निकालने की झंझट से लोगों को मुक्ति मिल गई है। जीहां, अब ATM के इस्तेमाल से आप किसी भी समय पैसा निकाल सकते हैं, और पैसा निकालने के लिए आपको बैंक जाने की भी ज़रूरत नहीं है। समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी में और भी बदलाव हुए, और बैंक के जागरूक उपभोक्ता नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल करने लगे। आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल तुलनात्मक रूप से काफ़ी कम हो गया है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल लोग कम रहे हैं। ऐसे में हो सकता है कि आने वाले दिनों में एटीएम से पैसा निकालने के लिए लगने वाला चार्ज बढ़ जाए। अब आप सोच रहे होंगे कि एटीएम के कम इस्तेमाल से आख़िर क्यों एटीएम से पैसा निकालने का चार्ज बढ़ेगा? तो आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एटीएम से एक तय सीमा के बाद पैसा निकालने पर चार्ज लगता है। ऐसे में जब डिजिटल ट्रांजैक्शन कम होता था, तो लोग तय सीमा से ज़्यादा बार एटीएम से पैसा निकालते थे। और इसी कारण से एटीएम के ज़रिये बैंक और एटीएम का रखरखाव करने वाली कम्पनी की कमाई होती थी। लेकिन अब चूंकि डिजिटल ट्रांजैक्शन के कारण लोग एटीएम का इस्तेमाल कम कर रहे हैं, ऐसे में भारतीय ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भारतीय रिज़र्व बैंक को एक पत्र लिखकर ग्राहकों द्वारा ATM से पैसा निकालने पर लगने वाली इंटरचेंज फीस को बढ़ाने की मांग की है।
जानकारी के लिए बता दें कि ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि अगर रिज़र्व बैंक इंटरचेंज फीस बढ़ाने की इज़ाज़त नहीं देता है, तो इससे उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का तर्क है कि इंटरचेंज चार्ज नहीं बढ़ाए जाने से नई ATM मशीनों को इंस्टॉल करने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। और यह सब उन परिस्थितियों में होगा, जब देश में ATM मशीनों की पहुंच बढ़ाने के लिए लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।
दरअसल, ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का तर्क है कि ख़र्च बढ़ने और एटीएम का कम इस्तेमाल होने से उनके राजस्व पर असर पड़ रहा है। वहीं कमाई ना होने से नये ATM इंस्टॉल करने की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। एसोसिएशन का कहना है कि इधर रिज़र्व बैंक ने एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव के अनुपालन के स्टैण्डर्ड को बढ़ा दिया है। ऐसे में रिज़र्व बैंक के निर्देशों के बाद किसी भी एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव का ख़र्च पहले की तुलना में बढ़ गया है। लेकिन इसी अनुपात में ATM सुविधा प्रदान करने वाली कम्पनियों के राजस्व में किसी भी तरह की कोई भी वृद्दि नहीं हुई है।
जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ATM से पैसा निकालने पर इंटरचेंज फीस को 15 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखा गया है। बता दें कि यह चार्ज प्रति ग्राहक प्रति महीने 5 फ्री ट्रांजैक्शन के बाद लगता है। इसी चार्ज को लेकर एसोसिएशन का कहना है कि ATM की रोजाना सुरक्षा और रखरखाव के बढ़ते ख़र्चों के मद्देनज़र यह चार्ज पर्याप्त नहीं है। वहीं इस सबके बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन एटीएम की कमी से सम्बन्धित शिकायतों के सन्दर्भ में किया था। रिज़र्व बैंक द्वारा गठित इस कमिटी की ज़िम्मेदारी थी कि वो यह बताये कि देश में ATM की संख्या को कैसे बढ़ाया जाएगा, और दूरदराज के इलाक़ों में एटीएम की पहुंच को कैसे बढ़ाया जाए। 6 सदस्यीय इस कमेटी ने इस सम्बन्ध में काफ़ी सुझाव दिये थे, जिसमें सबसे प्रमुख सुझाव था इंटरचेंज चार्ज को बढ़ाया जाना।
कमेटी के मुताबिक़, शहरी क्षेत्रों में, जहां की कुल जनसंख्या 10 लाख से अधिक है वहां पर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस को 17 रुपये, और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को 7 रुपये किया जाना चाहिए। वहीं कमेटी का सुझाव था कि डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल पहले की तुलना में कम हुआ है। ऐसे में एटीएम से फ्री विड्रॉल की सीमा को 5 से घटाकर 3 कर देना चाहिए। वहीं कमेटी ने अपने सुझाव में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहां पर कि जनसंख्या 10 लाख से कम है वहां पर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज चार्ज को 15 रुपये, और नॉन-फाइनेंशियल इंटरचेंज चार्ज को 8 रुपये कर देना चाहिए। साथ ही यहां पर एटीएम से फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा को घटाकर 6 कर देना चाहिए।
यह बात सही है कि डिटिजल ट्रांजैक्शन बढ़ने से फ्री लिमिट से ज़्यादा एटीएम लोग कम ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अब जबकि एटीएम का लोग इस्तेमाल कम कर रहे हैं, तो ऐसे में इंटरचेंज चार्ज भी पहले की तुलना में कम एकत्रित हो पा रहा है। साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा जारी नये दिशा निर्देशों के कारण भी एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव पर पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा ख़र्च हो रहा है। अब जबकि रिज़र्व बैंक द्वारा गठित समिति द्वारा इंटरचेंज चार्ज बढ़ाने की सिफ़ारिश की गई है, तो आने वाले दिनों में हो तय सीमा से ज़्यादा एटीएम से पैसा निकालने पर आपको इंटरचेंज चार्ज के लिए पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा चुकाने पड़े।
FEB 17 (WTN) – एक समय था जब बैंक से पैसा निकालने के लिए आपको बैंक में लम्बी-लम्बी लाइनों में लगना पड़ता था। स्वाभाविक है कि बैंक से पैसा निकलने के लिए लाइनों में लगने से आपका क़ीमती समय बर्बाद होता था। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस युग में ATM (Automated Teller Machine) का इस्तेमाल होने से बैंक में जाकर पैसे निकालने की झंझट से लोगों को मुक्ति मिल गई है। जीहां, अब ATM के इस्तेमाल से आप किसी भी समय पैसा निकाल सकते हैं, और पैसा निकालने के लिए आपको बैंक जाने की भी ज़रूरत नहीं है। समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी में और भी बदलाव हुए, और बैंक के जागरूक उपभोक्ता नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल करने लगे। आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल तुलनात्मक रूप से काफ़ी कम हो गया है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल लोग कम रहे हैं। ऐसे में हो सकता है कि आने वाले दिनों में एटीएम से पैसा निकालने के लिए लगने वाला चार्ज बढ़ जाए। अब आप सोच रहे होंगे कि एटीएम के कम इस्तेमाल से आख़िर क्यों एटीएम से पैसा निकालने का चार्ज बढ़ेगा? तो आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एटीएम से एक तय सीमा के बाद पैसा निकालने पर चार्ज लगता है। ऐसे में जब डिजिटल ट्रांजैक्शन कम होता था, तो लोग तय सीमा से ज़्यादा बार एटीएम से पैसा निकालते थे। और इसी कारण से एटीएम के ज़रिये बैंक और एटीएम का रखरखाव करने वाली कम्पनी की कमाई होती थी। लेकिन अब चूंकि डिजिटल ट्रांजैक्शन के कारण लोग एटीएम का इस्तेमाल कम कर रहे हैं, ऐसे में भारतीय ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भारतीय रिज़र्व बैंक को एक पत्र लिखकर ग्राहकों द्वारा ATM से पैसा निकालने पर लगने वाली इंटरचेंज फीस को बढ़ाने की मांग की है।
जानकारी के लिए बता दें कि ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि अगर रिज़र्व बैंक इंटरचेंज फीस बढ़ाने की इज़ाज़त नहीं देता है, तो इससे उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का तर्क है कि इंटरचेंज चार्ज नहीं बढ़ाए जाने से नई ATM मशीनों को इंस्टॉल करने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। और यह सब उन परिस्थितियों में होगा, जब देश में ATM मशीनों की पहुंच बढ़ाने के लिए लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।
दरअसल, ATM ऑपरेटर्स एसोसिएशन का तर्क है कि ख़र्च बढ़ने और एटीएम का कम इस्तेमाल होने से उनके राजस्व पर असर पड़ रहा है। वहीं कमाई ना होने से नये ATM इंस्टॉल करने की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। एसोसिएशन का कहना है कि इधर रिज़र्व बैंक ने एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव के अनुपालन के स्टैण्डर्ड को बढ़ा दिया है। ऐसे में रिज़र्व बैंक के निर्देशों के बाद किसी भी एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव का ख़र्च पहले की तुलना में बढ़ गया है। लेकिन इसी अनुपात में ATM सुविधा प्रदान करने वाली कम्पनियों के राजस्व में किसी भी तरह की कोई भी वृद्दि नहीं हुई है।
जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ATM से पैसा निकालने पर इंटरचेंज फीस को 15 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखा गया है। बता दें कि यह चार्ज प्रति ग्राहक प्रति महीने 5 फ्री ट्रांजैक्शन के बाद लगता है। इसी चार्ज को लेकर एसोसिएशन का कहना है कि ATM की रोजाना सुरक्षा और रखरखाव के बढ़ते ख़र्चों के मद्देनज़र यह चार्ज पर्याप्त नहीं है। वहीं इस सबके बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन एटीएम की कमी से सम्बन्धित शिकायतों के सन्दर्भ में किया था। रिज़र्व बैंक द्वारा गठित इस कमिटी की ज़िम्मेदारी थी कि वो यह बताये कि देश में ATM की संख्या को कैसे बढ़ाया जाएगा, और दूरदराज के इलाक़ों में एटीएम की पहुंच को कैसे बढ़ाया जाए। 6 सदस्यीय इस कमेटी ने इस सम्बन्ध में काफ़ी सुझाव दिये थे, जिसमें सबसे प्रमुख सुझाव था इंटरचेंज चार्ज को बढ़ाया जाना।
कमेटी के मुताबिक़, शहरी क्षेत्रों में, जहां की कुल जनसंख्या 10 लाख से अधिक है वहां पर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस को 17 रुपये, और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को 7 रुपये किया जाना चाहिए। वहीं कमेटी का सुझाव था कि डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल पहले की तुलना में कम हुआ है। ऐसे में एटीएम से फ्री विड्रॉल की सीमा को 5 से घटाकर 3 कर देना चाहिए। वहीं कमेटी ने अपने सुझाव में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहां पर कि जनसंख्या 10 लाख से कम है वहां पर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज चार्ज को 15 रुपये, और नॉन-फाइनेंशियल इंटरचेंज चार्ज को 8 रुपये कर देना चाहिए। साथ ही यहां पर एटीएम से फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा को घटाकर 6 कर देना चाहिए।
यह बात सही है कि डिटिजल ट्रांजैक्शन बढ़ने से फ्री लिमिट से ज़्यादा एटीएम लोग कम ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अब जबकि एटीएम का लोग इस्तेमाल कम कर रहे हैं, तो ऐसे में इंटरचेंज चार्ज भी पहले की तुलना में कम एकत्रित हो पा रहा है। साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा जारी नये दिशा निर्देशों के कारण भी एटीएम की सुरक्षा और रखरखाव पर पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा ख़र्च हो रहा है। अब जबकि रिज़र्व बैंक द्वारा गठित समिति द्वारा इंटरचेंज चार्ज बढ़ाने की सिफ़ारिश की गई है, तो आने वाले दिनों में हो तय सीमा से ज़्यादा एटीएम से पैसा निकालने पर आपको इंटरचेंज चार्ज के लिए पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा चुकाने पड़े।