राज्यसभा में हंगामा करने वाले सांसदों पर अब होगी ‘सख़्ती’
Thursday - February 20, 2020 3:42 pm ,
Category : WTN HINDI
संसद का उच्च सदन कहलाता है राज्यसभा
‘यह ग़लतियां’ करने पर राज्यसभा सांसदों से छिन सकता है विधेयक पर वोटिंग का अधिकार
FEB 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के उच्च सदन को राज्यसभा कहा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है, और यह कभी भंग नहीं होती है। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य हर दो साल के बाद रिटायर्ड होते हैं। कहा जाता है कि राज्यसभा के सांसदों में गम्भीरता होती है, और लोकसभा की तुलना में यहां पर कम हंगामा होता है। लेकिन समय के साथ-साथ अब राज्यसभा में भी हंगामा होने लगा है। लेकिन राज्यसभा में बढ़ते हंगामे के मद्देनज़र जल्द ही एक बड़ा फ़ैसला लिया जा सकता है, जिसमें हंगामा करने वाले सांसदों से विधेयक पर वोटिंग का अधिकार तक छीना जा सकता है।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा की एक कमेटी ने कुछ ऐसी सिफारिशें की हैं जिनके लागू होने के बाद हंगामा करने वाले सांसदों से विधेयक पर वोटिंग का अधिकार छीना जा सकता है। बता दें कि राज्यसभा की जनरल पर्पस कमेटी ने कार्यवाही को सुचारू तरीके से चलाने के लिए 124 नए नियमों को लागू करने के साथ ही 77 नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। अब यह कमेटी नियमों से जुड़ी कमेटी को अपने प्रस्ताव सौंपेगी, जिसके बाद इन्हें लागू करने पर विचार किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक़, यदि राज्यसभा में नये नियम लागू होते हैं, तो लोकसभा की तरह ही वेल में आकर हंगामा करने वाले सांसद सदन की कार्यवाही से निलम्बित हो सकते हैं। इतना ही नहीं, वेल में आकर हंगामा करने पर उन्हें पांच दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर भी रहना पड़ सकता है। यानी साफ़ है कि अब लोकसभा की ही तरह राज्यसभा में भी कार्यवाही के दौरान हंगामा करने वाले सांसदों के ख़िलाफ़ सख़्ती के नियम लागू हो सकते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकसभा की जगह पर राज्यसभा में विपक्ष का ज़्यादा हंगामा देखने को मिल रहा है। राज्यसभा में गतिरोध की सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां पर सत्ता पक्ष के सांसद कम हैं, और विपक्ष के सांसद ज़्यादा हैं। ऐसे में सरकार की नीतियों, क़ानूनों या निर्देशों के ख़िलाफ़ राज्यसभा में इन दिनों ज़्यादा हंगामा देखने को मिल रहा है। राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चले इसके लिए राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा समय-समय पर सांसदों को समझाइश दी जाती है और शान्ति की अपील की जाती है। लेकिन इसके बाद भी विपक्षी सांसदों द्वारा लगातार हंगामा किया जाता रहा है।
बता दें कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में जनरल पर्पज कमेटी की मीटिंग में 23 राजनीति दलों के नेता शामिल हुए थे। इस कमेटी को सभापति ने मई 2018 में गठित किया था, जिससे राज्यसभा के नियमों की समीक्षा हो सके। इस कमेटी में राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री और कानून मंत्रालय के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी दिनेश भारद्वाज भी शामिल। क़रीब 51 बैठकों के बाद कमेटी ने नये नियमों का प्रस्ताव दिया है। जानकारी के मुताबिक़, कमेटी की ओर से मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई है और उनको लागू करने और उनके परिणामों पर गहन विचार किया गया है।
अब इन सिफारिशों के आने के बाद सभापति वेंकैया नायडू और उपसभापति हरिवंश ने सभी राजनीतिक दलों के सामने प्रस्तावित सुझाव रखे हैं, और इन्हें सभी की सहमति के बाद लागू किया जा सकता है। बता दें कि राज्यसभा के नियमों को लेकर पिछले 50 सालों में यह सबसे बड़ी समीक्षा मानी जा रही है। इससे पहले जनरल पर्पज कमेटी 13 रिपोर्ट दे चुकी है, जिनमें से कई सुझावों को लागू भी किया गया है। अब देखना होगा कि राजनीतिक दल इन सिफारिशों को स्वीकार करते हैं या नहीं। कहा जा सकता है कि यदि यह सिफारिशें लागू होती हैं, तो राज्यसभा में हंगामा होने के कम आसार होंगे, और राज्ससभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकेगी।
FEB 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के उच्च सदन को राज्यसभा कहा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है, और यह कभी भंग नहीं होती है। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य हर दो साल के बाद रिटायर्ड होते हैं। कहा जाता है कि राज्यसभा के सांसदों में गम्भीरता होती है, और लोकसभा की तुलना में यहां पर कम हंगामा होता है। लेकिन समय के साथ-साथ अब राज्यसभा में भी हंगामा होने लगा है। लेकिन राज्यसभा में बढ़ते हंगामे के मद्देनज़र जल्द ही एक बड़ा फ़ैसला लिया जा सकता है, जिसमें हंगामा करने वाले सांसदों से विधेयक पर वोटिंग का अधिकार तक छीना जा सकता है।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा की एक कमेटी ने कुछ ऐसी सिफारिशें की हैं जिनके लागू होने के बाद हंगामा करने वाले सांसदों से विधेयक पर वोटिंग का अधिकार छीना जा सकता है। बता दें कि राज्यसभा की जनरल पर्पस कमेटी ने कार्यवाही को सुचारू तरीके से चलाने के लिए 124 नए नियमों को लागू करने के साथ ही 77 नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। अब यह कमेटी नियमों से जुड़ी कमेटी को अपने प्रस्ताव सौंपेगी, जिसके बाद इन्हें लागू करने पर विचार किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक़, यदि राज्यसभा में नये नियम लागू होते हैं, तो लोकसभा की तरह ही वेल में आकर हंगामा करने वाले सांसद सदन की कार्यवाही से निलम्बित हो सकते हैं। इतना ही नहीं, वेल में आकर हंगामा करने पर उन्हें पांच दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर भी रहना पड़ सकता है। यानी साफ़ है कि अब लोकसभा की ही तरह राज्यसभा में भी कार्यवाही के दौरान हंगामा करने वाले सांसदों के ख़िलाफ़ सख़्ती के नियम लागू हो सकते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकसभा की जगह पर राज्यसभा में विपक्ष का ज़्यादा हंगामा देखने को मिल रहा है। राज्यसभा में गतिरोध की सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां पर सत्ता पक्ष के सांसद कम हैं, और विपक्ष के सांसद ज़्यादा हैं। ऐसे में सरकार की नीतियों, क़ानूनों या निर्देशों के ख़िलाफ़ राज्यसभा में इन दिनों ज़्यादा हंगामा देखने को मिल रहा है। राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चले इसके लिए राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा समय-समय पर सांसदों को समझाइश दी जाती है और शान्ति की अपील की जाती है। लेकिन इसके बाद भी विपक्षी सांसदों द्वारा लगातार हंगामा किया जाता रहा है।
बता दें कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में जनरल पर्पज कमेटी की मीटिंग में 23 राजनीति दलों के नेता शामिल हुए थे। इस कमेटी को सभापति ने मई 2018 में गठित किया था, जिससे राज्यसभा के नियमों की समीक्षा हो सके। इस कमेटी में राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री और कानून मंत्रालय के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी दिनेश भारद्वाज भी शामिल। क़रीब 51 बैठकों के बाद कमेटी ने नये नियमों का प्रस्ताव दिया है। जानकारी के मुताबिक़, कमेटी की ओर से मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई है और उनको लागू करने और उनके परिणामों पर गहन विचार किया गया है।
अब इन सिफारिशों के आने के बाद सभापति वेंकैया नायडू और उपसभापति हरिवंश ने सभी राजनीतिक दलों के सामने प्रस्तावित सुझाव रखे हैं, और इन्हें सभी की सहमति के बाद लागू किया जा सकता है। बता दें कि राज्यसभा के नियमों को लेकर पिछले 50 सालों में यह सबसे बड़ी समीक्षा मानी जा रही है। इससे पहले जनरल पर्पज कमेटी 13 रिपोर्ट दे चुकी है, जिनमें से कई सुझावों को लागू भी किया गया है। अब देखना होगा कि राजनीतिक दल इन सिफारिशों को स्वीकार करते हैं या नहीं। कहा जा सकता है कि यदि यह सिफारिशें लागू होती हैं, तो राज्यसभा में हंगामा होने के कम आसार होंगे, और राज्ससभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकेगी।