मोदी सरकार के ‘इस फ़ैसले’ से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा बंद
Wednesday - February 26, 2020 12:54 pm ,
Category : WTN HINDI
खुली मिठाइयों में मिलती है मिलावट और बासी होने की शिकायत
दुकानदारों को अब खुली मिठाइयों की मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट की देना होगी जानकारी
FEB 26 (WTN) – मिठाइयां भारतीय खान-पान पद्धति का एक अहम हिस्सा हैं। त्यौहारों से लेकर खुशी के किसी मौक़े पर मिठाइयां खाने और बांटने की एक समृद्ध भारतीय परम्परा रही है। विविधताओं भरे भारत देश के हर राज्य में कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं। भारत के किसी भी शहर या कस्बे में आपको मिठाई की कई दुकानें देखने मिल जाएंगी। लेकिन पिछले कुछ सालों से यह पाया गया है कि ज़्यादा मुनाफ़े के लालच में मिठाई की दुकानों पर नक़ली मावे की और बासी मिठाईयां बिकती हैं। स्वाभाविक है कि इस तरह की मिठाई खाने से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि यदि किसी कम्पनी की पैकेट बंद मिठाई है तो उसमें मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से लिखी रहती है। लेकिन दुकानों पर बिकने वाली खुली मिठाइयों के बारे में ग्राहकों को पता ही नहीं होता है कि दुकान में रखी हुई मिठाई को बने हुए कितने दिन हो गए हैं, और मिठाई की एक्सपायरी डेट क्या है। लेकिन सालों से ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर अब सख्ती होने जा रही है। दरअसल, मिठाई की दुकानों पर मिलने वाली खाने-पीने के सामान की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए मोदी सरकार एक नया नियम लागू करने जा रही है। क्या हैं यह नया नियम? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, अब 1 जून, 2020 के बाद से मिठाई की दुकानों में बिक्री के लिए रखी गई खुली मिठाइयों के निर्माण की तारीख़ और उसके उपयोग की उपयुक्ति अवधि जैसी जानकारियां प्रदर्शित करना ज़रूर होगा। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि अभी फ़िलहाल सिर्फ़ डिब्बाबंद मिठाई के डिब्बों पर ही इस तरह की जानकारियां लिखी होती हैं। लेकिन अब मिठाई की दुकानों पर बिकने वाली खुली मिठाई के ट्रे या कंटेनर पर दुकानदार को बकायदा इस बात की पूरी जानकारी देना होगी कि मिठाई कब बनी है, किन किन पदार्थों से मिलकर बनी है, और मिठाई को कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने लोगों के स्वास्थ्य पर ख़तरे को देखते हुए यह बड़ा क़दम उठाया है। FSSAI को शिकायतें मिली थीं कि कुछ दुकानदार ख़राब हो चुकी मिठाइयां भी बेच देते हैं। ऐसे में FSSAI की कोशिश है कि दुकानदार उपभोक्ताओं को बासी और मिलावटी मिठाईयां ना बेच सकें, इसके लिए इस तरह के कड़े क़दम उठाए जा रहे हैं। FSSAI का साफ़ तौर पर कहना है कि सार्वजनिक हित में और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया है कि खुली बिक्री वाली मिठाइयों के मामले में, बिक्री के लिए रखी मिठाई के ट्रे या कंटेनर पर 'निर्माण की तारीख़' और 'उपयोग की अवधि' जैसी जानकारियों को प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। FSSAI ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
FSSAI द्वारा लिये गये इस क़दम से आम लोगों को दुकानों पर मिलने वाली मिठाई के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी कि जो मिठाई वे ख़रीद रहे हैं वो कब बनी है, उसे बनाने में क्या-क्या पदार्थ इस्तेमाल किये गये हैं, और मिठाई को कब तक खाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दीवाली और अन्य त्यौहारों के दौरान नक़ली मावा और उससे बनी मिठाइयों की जब्ती एक आम बात है। लेकिन अब जबकि FSSAI द्वारा दुकानदारों को साफ़ निर्देश दिये गये हैं कि बिना डिब्बा बंद मिठाइयों के बारे में पूरी जानकारी उन्हें ग्राहकों को बतलानी होगी, तो ऐसे में आशा की जा सकती है कि ग्राहकों को मिलावटी और बासी मिठाइयों से छुटकारा मिलेगा।
लेकिन इधर, मिठाई विक्रेताओं के देश के सबसे बड़े संगठन FSNM (Federation of Sweets & Namkeen Manufacturers) ने FSSAI के आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए इसमें बदलाव की मांग शुरू कर दी है। इस बारे में FSNM का कहना है कि सरकार ने इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले न तो उनसे चर्चा की, और ना ही उन्हें भरोसे में लिया। दरअसल, मिठाई विक्रेताओं का तर्क है कि सुबह को बनाकर दोपहर या शाम तक बेच दी जाने वाली मिठाइयां जैसे जलेबी, इमरती और लड्डू के ट्रे पर मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट लिख पाना कैसे सम्भव होगा? FSNM का तर्क है कि देश में सिर्फ़ तीन प्रतिशत मिठाइयों की ही पैकिंग होती है, जबकि 97 प्रतिशत मिठाइयां खुली बिकती हैं। बता दें कि FSNM की FSSAI के साथ चर्चा शुरू हो गई है। वहीं कुछ ही दिनों में FSNM द्वारा सरकार को एक प्रस्ताव सौंपा जाएगा कि FSSAI के आदेश पर बीच का रास्ता निकाला जाए।
FEB 26 (WTN) – मिठाइयां भारतीय खान-पान पद्धति का एक अहम हिस्सा हैं। त्यौहारों से लेकर खुशी के किसी मौक़े पर मिठाइयां खाने और बांटने की एक समृद्ध भारतीय परम्परा रही है। विविधताओं भरे भारत देश के हर राज्य में कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं। भारत के किसी भी शहर या कस्बे में आपको मिठाई की कई दुकानें देखने मिल जाएंगी। लेकिन पिछले कुछ सालों से यह पाया गया है कि ज़्यादा मुनाफ़े के लालच में मिठाई की दुकानों पर नक़ली मावे की और बासी मिठाईयां बिकती हैं। स्वाभाविक है कि इस तरह की मिठाई खाने से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि यदि किसी कम्पनी की पैकेट बंद मिठाई है तो उसमें मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से लिखी रहती है। लेकिन दुकानों पर बिकने वाली खुली मिठाइयों के बारे में ग्राहकों को पता ही नहीं होता है कि दुकान में रखी हुई मिठाई को बने हुए कितने दिन हो गए हैं, और मिठाई की एक्सपायरी डेट क्या है। लेकिन सालों से ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर अब सख्ती होने जा रही है। दरअसल, मिठाई की दुकानों पर मिलने वाली खाने-पीने के सामान की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए मोदी सरकार एक नया नियम लागू करने जा रही है। क्या हैं यह नया नियम? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, अब 1 जून, 2020 के बाद से मिठाई की दुकानों में बिक्री के लिए रखी गई खुली मिठाइयों के निर्माण की तारीख़ और उसके उपयोग की उपयुक्ति अवधि जैसी जानकारियां प्रदर्शित करना ज़रूर होगा। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि अभी फ़िलहाल सिर्फ़ डिब्बाबंद मिठाई के डिब्बों पर ही इस तरह की जानकारियां लिखी होती हैं। लेकिन अब मिठाई की दुकानों पर बिकने वाली खुली मिठाई के ट्रे या कंटेनर पर दुकानदार को बकायदा इस बात की पूरी जानकारी देना होगी कि मिठाई कब बनी है, किन किन पदार्थों से मिलकर बनी है, और मिठाई को कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने लोगों के स्वास्थ्य पर ख़तरे को देखते हुए यह बड़ा क़दम उठाया है। FSSAI को शिकायतें मिली थीं कि कुछ दुकानदार ख़राब हो चुकी मिठाइयां भी बेच देते हैं। ऐसे में FSSAI की कोशिश है कि दुकानदार उपभोक्ताओं को बासी और मिलावटी मिठाईयां ना बेच सकें, इसके लिए इस तरह के कड़े क़दम उठाए जा रहे हैं। FSSAI का साफ़ तौर पर कहना है कि सार्वजनिक हित में और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया है कि खुली बिक्री वाली मिठाइयों के मामले में, बिक्री के लिए रखी मिठाई के ट्रे या कंटेनर पर 'निर्माण की तारीख़' और 'उपयोग की अवधि' जैसी जानकारियों को प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। FSSAI ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
FSSAI द्वारा लिये गये इस क़दम से आम लोगों को दुकानों पर मिलने वाली मिठाई के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी कि जो मिठाई वे ख़रीद रहे हैं वो कब बनी है, उसे बनाने में क्या-क्या पदार्थ इस्तेमाल किये गये हैं, और मिठाई को कब तक खाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दीवाली और अन्य त्यौहारों के दौरान नक़ली मावा और उससे बनी मिठाइयों की जब्ती एक आम बात है। लेकिन अब जबकि FSSAI द्वारा दुकानदारों को साफ़ निर्देश दिये गये हैं कि बिना डिब्बा बंद मिठाइयों के बारे में पूरी जानकारी उन्हें ग्राहकों को बतलानी होगी, तो ऐसे में आशा की जा सकती है कि ग्राहकों को मिलावटी और बासी मिठाइयों से छुटकारा मिलेगा।
लेकिन इधर, मिठाई विक्रेताओं के देश के सबसे बड़े संगठन FSNM (Federation of Sweets & Namkeen Manufacturers) ने FSSAI के आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए इसमें बदलाव की मांग शुरू कर दी है। इस बारे में FSNM का कहना है कि सरकार ने इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले न तो उनसे चर्चा की, और ना ही उन्हें भरोसे में लिया। दरअसल, मिठाई विक्रेताओं का तर्क है कि सुबह को बनाकर दोपहर या शाम तक बेच दी जाने वाली मिठाइयां जैसे जलेबी, इमरती और लड्डू के ट्रे पर मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट लिख पाना कैसे सम्भव होगा? FSNM का तर्क है कि देश में सिर्फ़ तीन प्रतिशत मिठाइयों की ही पैकिंग होती है, जबकि 97 प्रतिशत मिठाइयां खुली बिकती हैं। बता दें कि FSNM की FSSAI के साथ चर्चा शुरू हो गई है। वहीं कुछ ही दिनों में FSNM द्वारा सरकार को एक प्रस्ताव सौंपा जाएगा कि FSSAI के आदेश पर बीच का रास्ता निकाला जाए।