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...तो पूरी दुनिया में ‘अलग-थलग’ पड़ जाएगा पाकिस्तान!

Saturday - February 29, 2020 3:49 pm , Category : WTN HINDI
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इमरान ख़ान सरकार ने दिखाई सख़्ती
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इमरान ख़ान सरकार ने दिखाई सख़्ती

डिजिटल सेंसरशिप क़ानून के ख़िलाफ़ फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने इमरान सरकार को दी बायकॉट की ‘चेतावनी’

FEB 29 (WTN) – पूरी दुनिया में पाकिस्तान एक असफ़ल देश के रूप में पहचाना जाता है। आतंकियों को फण्डिग के मामले में पहले से ही पाकिस्तान FATF के निशाने पर है। दरअसल, पाकिस्तान एक कट्टरपंथी देश है जहां पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार होना आम बात है। पूरी दुनिया इस बात को जानती है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र सिर्फ़ दिखाने के लिए है। बल्कि हक़ीक़त यह है कि पाकिस्तान में वहां की सेना ही अप्रत्यक्ष रूप से पूरी शासन व्यवस्था को देखती है। इसी पाकिस्तान में एक नए डिजिटल सेंसरशिप क़ानून के कारण अब दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर और गूगल समेत कई अन्य कम्पनियों ने पाकिस्तान में मोर्चा खोल दिया है। हालत यह है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने डिजिटल सेंसरशिप क़ानून को वापस नहीं लिया या फ़िर इसमें संशोधन नहीं किया, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पाकिस्तान पूरी दुनिया से अलग हो जाएगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक, गूगल और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कम्पनियों पर पाकिस्तान सरकार का सेंसरशिप का कानून अब पाकिस्तान को ही भारी पड़ने वाला है। दरअसल, पाकिस्तान में सोशल मीडिया के लिए लागू नए रेग्युलेशन के कारण इन प्लेटफॉर्म्स को अपनी सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण से सोशल मीडिया कम्पनियों ने पाकिस्तान सरकार को डिजिटल बायकॉट की चेतावनी तक दे डाली है।

सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में जो डिजिटल सेंसरशिप क़ानून बनाया गया है, उसमें आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कोई स्पष्ट पैमाना तय नहीं किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट या कमेण्ट किया कुछ भी आपत्तिजनक माना जा सकता है, और उसके ख़िलाफ़ अपील भी की जा सकती है। वहीं कथित आपत्तिजनक कंटेंट के ख़िलाफ़ अपील के 24 घण्टे के अन्दर सम्बन्धित सोशल मीडिया कम्पनी को उस कंटेंट को हटाना होगा जिसके ख़िलाफ़ अपील की गई है। वहीं आपत्तिजनक कंटेंट की जो भी शिकायत करेगा उसकी पहचान को गुप्त रखा जाएगा।

इतना ही नहीं, नए डिजिटल सेंसरशिप क़ानून में यह भी प्रावधान है कि समस्त सोशल मीडिया कम्पनियों को अपना एक स्थायी ऑफिस पाकिस्तान में खोलना होगा, और एक लोकल सर्वर भी बनाना होगा। आपतित्तजनक कंटेंट ना हटाने पर 50 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान तक रखा गया है। लेकिन पाकिस्तान सरकार के इस तुगलकी फरमान के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया कम्पनियों ने पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। अपना विरोध दर्ज़ कराते हुए सोशल मीडिया कम्पनियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को एक पत्र तक लिखा है, और इस पत्र में नए डिजिटल सेंसरशिप क़ानून में कुछ प्रावधानों को हटाने की बात कही गई है।

सोशल मीडिया कम्पनियों का पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार पर आरोप है कि किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की आज़ादी और उसकी निजता से जुड़ी शिकायतों को लेकर सरकार की तरफ़ से कोई भी उचित क़दम नहीं उठाए गये हैं। सोशल मीडिया कम्पनियों का कहना है कि नये क़ानून में नियम अस्पष्ट और मनमाने हैं, और यह नियम पाकिस्तान के 7 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स की गोपनीयता और अभिव्यक्ति की आज़ादी की उल्लंघन हैं। वहीं कम्पनियों का यहां तक आरोप है कि पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप क़ानून बनाते समय किसी एक्सपर्ट की राय लेना तक उचित नहीं समझा। वैसा आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में पहले से ही ऑनलाइन कंटेंट के लिए काफ़ी कड़े रेग्युलेशन हैं।

अब जबकि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार सोशल मीडिया कम्पनियों पर मनमर्जी के अस्पष्ट और मनमाने क़ानून थोपने की तैयारी में हैं, तो ऐसे में सोशल मीडिया कम्पनियों ने पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार से साफ़ कह दिया है कि यदि उनकी मांगों पर चर्चा नहीं किया गया या फ़िर कार्रवाई नहीं हुई तो वे पाकिस्तान से अपना कारोबर समेटने पर विचार कर सकती हैं। वैसे यदि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार के तुगलकी फरमान के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया कम्पनियां पाकिस्तान का बायकॉट करती हैं, तो इससे पाकिस्तान पूरी दुनिया से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कट जाएगा। अब देखना होगा कि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार क्या कुछ फ़ैसला सोशल मीडिया कम्पनियों की चेतावनी के बाद लेती है?