कोरोना वायरस ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दिये ‘शुरूआती झटके’
Wednesday - March 4, 2020 10:51 am ,
Category : WTN HINDI
अमेरिकी डॉलर की तुलना में ‘कमज़ोर’ हो रहा है भारतीय रुपया
भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखा कोरोना वायरस का ‘संक्रमण’; शेयर बाज़ार से पैसे निकाल रहे निवेशक
MARCH 04 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन में एक महामारी बन चुका है। कोरोना वायरस के कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। एक अनुमान के मुताबिक़, कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को क़रीब 160 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। लेकिन जहां तक भारत की अर्थव्यवस्था की बात है, तो कोरोना वायरस के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को भी शुरूआती झटके लगने शुरु हो गये हैं। और यदि ऐसा ही रहा तो आनाे वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ने की आशंका है। आख़िर किस कारण से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का गहरा असर पड़ सकता है? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस के कारण चीन में क़रीब 3100 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हज़ारों की तादात में लोग कोरोना वायरस से संक्रमित बताए जा रहे हैं। चीन ही नही, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी कोरोना वायरस संक्रमण लोगों की जान ले चुका है। चीन के पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया के अलावा यूरोप के देश इटली, और पश्चिम एशिया के देश ईरान में भी कोरोना वायरस से कई लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक चीन के पड़ोसी देश भारत की बात है, तो भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की पहचान हो चुकी है।
स्वाभाविक है कि जिस तरह से चीन में कोरोना वायरस के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, ठीक उसी तरह से भारत में यदि कोरोना वायरस का क़हर हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका विपरित असर पड़ेगा। कोरोना वायरस के केस भारत में पाए जाने के बाद अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये में लगातार कमज़ोरी आती जा रही है। भारतीय रुपये में कमज़ोरी की प्रमुख वजह चीन में कोरोना वायरस के कारण भारतीय शेयर बाज़ार का लुढ़कना है। जहां तक शेयर बाज़ार के बड़े देशी और विदेशी निवेशकों की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन बड़े निवेशकों ने कोरोना वायरस के कारण शेयर बाज़ार में मंदी के चलते अपना पैसा गोल्ड में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया है।
अब जबकि बड़े निवेशक कोरोना वायरस के कारण बाज़ार पर होने वाले असर के कारण शेयर मार्केट में निवेश नहीं कर रहे हैं, तो ऐसे में शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज़ की जा रही है। जानकारों के मुताबिक, इसी साल फरवरी के महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार से 12,684.30 करोड़ रुपये निकाले हैं। वहीं मार्च के महीने में भी विदेशी निवेशक शेयर बाज़ार से अपना पैसा निकालकर गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहे हैं। लेकिन यदि शेयर बाज़ार में निवेश कम होगा, और शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज़ होगी तो इसका सीधा विपरित असर भारतीय करेंसी रुपये पर पड़ेगा। शेयर बाज़ार के लुढ़कने से भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी करेंसी डॉलर की तुलना में कमज़ोर होगी। और ऐसा होने पर भारतीय सरकार के साथ-साथ आम भारतीय उपभोक्ता की परेशानियां भी बढ़ेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। वहीं कच्चा तेल के अलावा कई अन्य ज़रूरी सामान भी भारत विदेश से आयात करता है। अब जैसा कि आप जानते हैं कि विदेश व्यापार ज़्यादातर अमेरिकन डॉलर में होता है, तो ऐसे में कच्चे तेल के आयात समेत अन्य सामान के आयात में भारत को पहले की तुलना में ज़्यादा विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ेगी। ऐसे में जब तेल कम्पनियां विदेश से महंगे में तेल ख़रीदेंगी, तो स्वाभाविक है कि घरेलू स्तर पर भी पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ेंगे। अब जब डीज़ल महंगा होगा तो इससे परिवहन महंगा होने से रोज़मर्रा के ज़रूरत के सामान भी महंगे होंगे।
एक आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये के एक रुपये कमज़ोर होने से भारत की तेल कम्पनियों पर कच्चे तेल के आयात में 8,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अब जबकि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट से भारतीय तेल कम्पनियां कच्चा तेल महंगे दाम पर ख़रीदेंगी, तो स्वाभाविक है कि घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ेंगे। सर्वे के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पाद की क़ीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि से महंगाई क़रीब 0.8 प्रतिशत बढ़ जाती है।
वहां जानकारी के लिए बता दें कि भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेल और दालों का भी आयात करता है। ऐसे में रुपये के कमज़ोर होने से खाद्य तेल और दालों की क़ीमतें भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ेगा। स्वाभाविक है कि कोरोना वायरस का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट के कारण भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट हो रही है, और बड़े निवेशकों ने शेयर बाज़ार से पैसा निकालना शुरू कर दिया, तो ऐसे में भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी करेंसी डॉलर की तुलना में कमज़ोर होती चली जाएगी। और ऐसा होने पर भारत में महंगाई और भी ज़्यादा बढ़ जाएगी, जिससे आम आदमी को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
MARCH 04 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन में एक महामारी बन चुका है। कोरोना वायरस के कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। एक अनुमान के मुताबिक़, कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को क़रीब 160 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। लेकिन जहां तक भारत की अर्थव्यवस्था की बात है, तो कोरोना वायरस के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को भी शुरूआती झटके लगने शुरु हो गये हैं। और यदि ऐसा ही रहा तो आनाे वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ने की आशंका है। आख़िर किस कारण से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का गहरा असर पड़ सकता है? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस के कारण चीन में क़रीब 3100 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हज़ारों की तादात में लोग कोरोना वायरस से संक्रमित बताए जा रहे हैं। चीन ही नही, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी कोरोना वायरस संक्रमण लोगों की जान ले चुका है। चीन के पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया के अलावा यूरोप के देश इटली, और पश्चिम एशिया के देश ईरान में भी कोरोना वायरस से कई लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक चीन के पड़ोसी देश भारत की बात है, तो भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की पहचान हो चुकी है।
स्वाभाविक है कि जिस तरह से चीन में कोरोना वायरस के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, ठीक उसी तरह से भारत में यदि कोरोना वायरस का क़हर हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका विपरित असर पड़ेगा। कोरोना वायरस के केस भारत में पाए जाने के बाद अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये में लगातार कमज़ोरी आती जा रही है। भारतीय रुपये में कमज़ोरी की प्रमुख वजह चीन में कोरोना वायरस के कारण भारतीय शेयर बाज़ार का लुढ़कना है। जहां तक शेयर बाज़ार के बड़े देशी और विदेशी निवेशकों की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन बड़े निवेशकों ने कोरोना वायरस के कारण शेयर बाज़ार में मंदी के चलते अपना पैसा गोल्ड में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया है।
अब जबकि बड़े निवेशक कोरोना वायरस के कारण बाज़ार पर होने वाले असर के कारण शेयर मार्केट में निवेश नहीं कर रहे हैं, तो ऐसे में शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज़ की जा रही है। जानकारों के मुताबिक, इसी साल फरवरी के महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार से 12,684.30 करोड़ रुपये निकाले हैं। वहीं मार्च के महीने में भी विदेशी निवेशक शेयर बाज़ार से अपना पैसा निकालकर गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहे हैं। लेकिन यदि शेयर बाज़ार में निवेश कम होगा, और शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज़ होगी तो इसका सीधा विपरित असर भारतीय करेंसी रुपये पर पड़ेगा। शेयर बाज़ार के लुढ़कने से भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी करेंसी डॉलर की तुलना में कमज़ोर होगी। और ऐसा होने पर भारतीय सरकार के साथ-साथ आम भारतीय उपभोक्ता की परेशानियां भी बढ़ेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। वहीं कच्चा तेल के अलावा कई अन्य ज़रूरी सामान भी भारत विदेश से आयात करता है। अब जैसा कि आप जानते हैं कि विदेश व्यापार ज़्यादातर अमेरिकन डॉलर में होता है, तो ऐसे में कच्चे तेल के आयात समेत अन्य सामान के आयात में भारत को पहले की तुलना में ज़्यादा विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ेगी। ऐसे में जब तेल कम्पनियां विदेश से महंगे में तेल ख़रीदेंगी, तो स्वाभाविक है कि घरेलू स्तर पर भी पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ेंगे। अब जब डीज़ल महंगा होगा तो इससे परिवहन महंगा होने से रोज़मर्रा के ज़रूरत के सामान भी महंगे होंगे।
एक आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये के एक रुपये कमज़ोर होने से भारत की तेल कम्पनियों पर कच्चे तेल के आयात में 8,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अब जबकि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट से भारतीय तेल कम्पनियां कच्चा तेल महंगे दाम पर ख़रीदेंगी, तो स्वाभाविक है कि घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ेंगे। सर्वे के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पाद की क़ीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि से महंगाई क़रीब 0.8 प्रतिशत बढ़ जाती है।
वहां जानकारी के लिए बता दें कि भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेल और दालों का भी आयात करता है। ऐसे में रुपये के कमज़ोर होने से खाद्य तेल और दालों की क़ीमतें भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ेगा। स्वाभाविक है कि कोरोना वायरस का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट के कारण भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट हो रही है, और बड़े निवेशकों ने शेयर बाज़ार से पैसा निकालना शुरू कर दिया, तो ऐसे में भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी करेंसी डॉलर की तुलना में कमज़ोर होती चली जाएगी। और ऐसा होने पर भारत में महंगाई और भी ज़्यादा बढ़ जाएगी, जिससे आम आदमी को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।