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शिक्षित और आत्मनिर्भर होने पर ही महिलाओं के फ़ैसलों को मिलता है सम्मान: डॉ. रीनू यादव

Friday - March 6, 2020 4:02 pm , Category : WTN HINDI
महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन मिसाल हैं मिसेज इण्डिया इंटरनेशनल डॉ. रीनू यादव
महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन मिसाल हैं मिसेज इण्डिया इंटरनेशनल डॉ. रीनू यादव

बेटी की ज़िम्मेदारी से लेकर मॉडलिंग करियर तक, ख़ुद को एक ‘परफेक्ट वुमन’ साबित करती हैं डॉ. रीनू यादव

MARCH 06 (WTN) – Beauty with Brain...जीहां, यही कहा जा सकता है डॉ रीनू यादव को। मिसेज इण्डिया इंटरनेशनल डॉ रीनू यादव को अपने आप में एक सम्पूर्ण नारी की परिभाषा कहा जा सकता है। शादी के बाद घर परिवार की तमाम ज़िम्मेदारियों को बख़ूबी निभाते हुए डॉ रीनू यादव आज फैशन की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम हैं। कई फैशन शो में रीनू यादव रैम्प पर कैटवॉक कर अपनी प्रतिभा का परिचय करा चुकीं हैं। अपनी खूबसूरती, शानदार व्यक्तित्व और हाज़िर जवाबी के दम पर ही डॉ. रीनू यादव ने मिसेज इण्डिया इंटरनेशनल का टाइटल अपने नाम किया है। जैसा कि हमने सबसे पहले आपको बताया कि आप डॉ. रीनू यादव को Beauty with Brain कह सकते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि रीनू यादव एक सफल फैशन मॉडल होने के साथ-साथ एक यंग साइन्टिस्ट, मीडिया पेनेलिस्ट और समाज सेवी होने के साथ-साथ कई कम्पनियों और संस्थानों की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं।

डॉ. रीनू यादव महिला सशक्तिकरण की एक बुलंद आवाज़ हैं। अपनी प्रतिभा के दम पर डॉ. रीनू यादव ने जो मुक़ाम हासिल किया है, वो आजकल की लड़कियों के लिए एक मिसाल है। डॉ. रीनू यादव एक पत्नी हैं और एक मां हैं, साथ ही डॉ. यादव एक फैशन मॉडल और साइंटिस्ट भी हैं। यानी एक महिला हर तरह की ज़िम्मेदारी किस तरह से निभा सकती है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण डॉ. रीनू यादव हैं। 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौक़े पर Window to News ने डॉ. रीनू यादव से जानना चाहा कि आख़िर सही में महिला सशक्तिकरण क्या है?

WTN – रीनू जी, महिला सशक्तिकरण को आप किस नज़रिये से देखती हैं? क्या महिला सशक्तिकरण का मतलब पुरुषों से बराबरी मात्र है, या फ़िर महिला सशक्तिकरण का मतलब महिलाओं का ख़ुद का ख़ुद में विकास है?
 
Dr. Reenu Yadav – मेरा मानना है कि महिलाओं की किसी से तुलना होना ही नहीं चाहिए। महिला अपने आप में ख़ुद इतनी सक्षम है कि उसकी पुरुषों से तुलना करना कहीं से भी सही नहीं है। आज के समय की यदि पुराने समय से तुलना करें तो आज का ज़माना बदल गया है। महिलाएं अब शिक्षित हैं और अपने पैरों पर खड़ी हैं। ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां पर महिलाएं काम नहीं करती हैं। लेकिन फिर भी मेरा मानना है कि महिलाओं को अभी भी परिवार और समाज में फ़ैसला लेने का वो अधिकार नहीं दिया गया है जिसकी वे हक़दार हैं। किसी भी निर्णय को लेते समय उनकी राय सुनी जाती है, लेकिन उनकी राय मानी बहुत ही कम जाती है। जिस दिन महिलाओं को फ़ैसला लेने की आज़ादी मिलेगी, या फिर उनके फ़ैसलों पर अमल किया जाने लगेगा, मेरे मानना है तभी महिला सशक्तिकरण का सपना सच होगा।

WTN – सरकार की ओर से महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन फ़िर भी क्या कारण है कि महिलाओं के लिए आज भी बराबरी की सोच समाज में नहीं बन पाई है?
 
Dr. Reenu Yadav – कोई भी सरकार हो वो महिलाओं के उत्थान के लिए  योजनाएं बनाती है। लेकिन करप्शन के कारण इन योजनाओं का लाभ महिलाओं को नहीं मिल पाता है। हालांकि, सरकार के प्रयासों की तारीफ़ करना चाहिए, लेकिन कोशिश होना चाहिए कि इन योजनाओं का लाभ सबसे निचले तबके की महिलाओं को मिले। बिल्कुल सही बात है कि आज भी समाज में महिलाओं के लिए बराबरी की सोच विकसित नहीं हो पाई है। मेरा मानना है कि महिलाएं आर्थिक रूप से जितनी ज़्यादा सक्षम होंगी, समाज और परिवार में उनका सम्मान उतनी ही ज़्यादा बढ़ेगा। दरअसल, आज के 5जी युग में भी समाज की सोच यही है कि महिलाओं को सही फ़ैसला लेना नहीं आता है। लेकिन ऐसा नहीं है। मेरा माना है कि महिलाएं फ़ैसला लेने के मामले में पुरुषों की तुलना में ज़्यादा संवेदनशील और व्यवहारिक होती हैं।

WTN – आए दिन ख़बरें आती हैं कि बच्चियों से लेकर वृद्धा तक के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। चूंकि आप ख़ुद एक बच्ची की मां हैं, तो ऐसे में आप ख़ुद कितना सुरक्षित महसूस करती हैं अपनी बच्ची को घर से बाहर भेजते समय?

Dr. Reenu Yadav – मैं एक महिला हूं और एक बच्ची की मां भी हूं, तो मुझे इस बात का अहसास है कि मेरी बच्ची की सुरक्षा मेरे लिए कितनी ज़रूरी है। यह सही है कि आए दिन बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में एक बच्ची की मां होने के कारण मेरे दिल में डर पैदा होना स्वाभाविक है। लेकिन ना मैं और ना ही मेरी बेटी कमज़ोर हैं कि हम डरकर घर बैठ जाएं। एक मां होने की पूरी ज़िम्मेदारी निभाते हुए मैंने अपनी बेटी को गुड टच और बेड टच के बारे में समझाया है। इतना ही नहीं, समय-समय पर मैं अपनी बेटी की एक सहेली बनकर उससे जानती रहती हूं कि उसके साथ किसी ने ग़लत बातें तो नहीं की हैं। मेरी बच्ची ही नहीं बल्कि हर एक बच्ची को सुरक्षित समाज मिले इसके लिए तो ख़ुद समाज को ही बदलना होगा।
 
WTN – कुछ समय पहले मीटू कैम्पेन काफ़ी चर्चा में रहा था। लेकिन अब मीटू कैम्पेन के उद्देश्य पर ही सवाल उठने लगे हैं। कई लोगों का आरोप है कि मीटू कैम्पेन बदला लेने का एक ज़रिया मात्र बन गया है। क्या आपको भी ऐसा लगता है रीनू जी कि मीटू कैम्पेन अपनी दिशा भटक गया है?
 
Dr. Reenu Yadav – हर बात के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं। जहां तक मीटू कैम्पेन की बात है, तो मेरा मानना है कि यदि आपसी सहमति से पुरुष और स्त्री के बीच सम्बन्ध हैं और किसी कारण से कोई मनमुटाव हो जाता है तो इसमें मीटू का सवाल ही पैदा नहीं होता है। वहीं मेरा यह भी मानना है कि स्त्री के पास ईश्वर ने एक अलग से सिक्स्थ सेंस दिया है। यानी स्त्री को पता होता है कि सामने वाले पुरुष उससे किस उद्देश्य के लिए बात कर रहा है, उसकी नज़रें कहां हैं, और वो क्या चाहता है। यदि कोई भी पुरुष किसी भी महिला का यौन शोषण कर रहा है, तो इसके ख़िलाफ़ महिला को तुरन्त ही आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि इस तरह की घटनाओं में देरी से महिलाओं का पक्ष थोड़ा कमजोर हो जाता है। लेकिन डर और संकोच के कारण कई महिलाएं इस तरह के मामलों में तुरन्त ही प्रतिकार नहीं कर पाती हैं। लेकिन अब समय बदल रहा है, और मेरा मानना है कि किसी भी तरह की ग़लत हरकत के लिए तुरन्त ही NO कहना और उसका विरोध करना महिलाओं को आना चाहिए।
 
WTN – मूवी, मीडिया, फैशन और इंटरटेनमेंट की फील्ड में लड़कियों के साथ यौन शोषण के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। कई बार इस तरह के आरोप सही भी साबित हुए हैं। वहीं क्या सफलता हासिल करने के लिए लड़कियां आजकल शॉर्टकट का सहारा ले रही हैं?

Dr. Reenu Yadav – जीहां, यह सही बात है कि इस फील्ड में लड़कियों के साथ यौन शोषण कोई नई बात नहीं है। अब तो लड़कों के साथ भी इस तरह की घटनाएं सामने आने लगी हैं। दरअसल, इस फील्ड में नेम और फेम होता है, और कई लोगों में जल्दी से जल्दी फैमस होने का जुनून सवार होता है। ऐसे में यह लोग सफलता हासिल करने के लिए शॉर्टकट अपना लेते हैं। वैसे जिनके पास टैलेंट हैं और उन्हें अपने टैलेंट पर विश्वास है, वे सफलता हासिल करने के लिए इस तरह के शॉर्ट कट कभी नहीं अपनाते। मेरा मानना है कि लड़कियों को इस फील्ड में आने से पहले ख़ुद को मानसिक रूप से काफ़ी मज़बूत करना चाहिए क्योंकि काम दिलाने के नाम पर इस फील्ड में मौक़े का फ़ायदे उठाने वालों की कमी नहीं है।

WTN – जहां तक मॉडलिंग या फैशन वर्ल्ड का सवाल है, आज भी समाज में यही सोच है कि जो भी लड़कियां इस फील्ड में जाती हैं उनके चरित्र पर संदेह किया जाता है। क्या कपड़ों से किसी के चरित्र की पहचान करना सही है?
 
Dr. Reenu Yadav – सही सवाल किया आपने। दरअसल, समाज की सोच अभी भी यही है कि किसी लड़की ने मिनी स्कर्ट पहना है तो उसका चरित्र ख़राब है। मेरा मानना है कि किसी के कपड़ों से किसी के चरित्र का पता नहीं लगाया जा सकता है। और मेरा तो सवाल है कि जो कथित तौर पर सभ्य कपड़े पहनते हैं क्या उनका चरित्र साफ़ सुथरा है? कपड़ों से किसी के चरित्र का अनुमान लगाने मेरी नज़र में एक घटिया सोच है।

WTN – आपने शादी के बाद मॉडलिंग करियर को चुना जो कि अपने आप में बहुत बड़ा फ़ैसला था। आपके परिवार और पति का इसमें कितना सहयोग रहा?
 
Dr. Reenu Yadav – शादी के बाद मॉडलिंग की फील्ड में आना मेरे लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज था। मेरी मां चूंकि ग्रामीण परिवेश की थी, इसलिए शादी के पहले मैं इस फील्ड को नहीं चुन सकी। लेकिन शादी के बाद मैंने अपने पति को इस बात को समझाया कि मेरे रूचि किस बात में हैं। मेरे पति काफ़ी सहयोगी प्रवृत्ति के हैं, और मेरे समझाने पर वो राज़ी हो गए। आज मैं जो कुछ भी हूं उसमें मेरे पति का काफ़ी बड़ा योगदान है। मेरे पति के अलावा मेरा पूरा परिवार मेरे करियर में पूरा सहयोग देता है, और सभी के सहयोग के कारण ही मैं मिसेज इण्डिया इंटरनेशनल का खिताब हासिल कर सकी।
 
WTN – एक महिला के तौर पर अपने ख़ुद के घर के फ़ैसले लेते वक़्त क्या आपको जेंडर समस्या आती है। यानी कि क्या आपके फैसलों पर अमल किया जाता है, या फ़िर पुरुष प्रधान समाज में जो होता चला आ रहा वही होता है?
 
Dr. Reenu Yadav – इस सवाल के लिए मैं आपको धन्यवाद दूंगी। दरअसल, जैसा कि मैंने पहले आपको बताया कि आज भी भारतीय समाज में किसी भी बात पर फ़ैसला लेने के लिए महिलाओं की राय को बस सुना जाता है, लेकिन उस राय पर अमल करना या नहीं करना यह पुरुष प्रधान समाज के पुरुषों पर ही निर्भर है। जहां तक मेरे परिवार में मेरे फ़ैसलों की बात है, तो मेरे परिवार के फ़ैसलों में मैं अपनी राय देती हूं, और मेरी राय पर अमल भी किया जाता है। चूंकि मैं शिक्षित हूं और आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हूं, तो ऐसे में मेरे फ़ैसलों को अहमियत दी जाती है। मेरा मानना है कि जो भी महिला शिक्षित होगी और आत्मनिर्भर होगी, उसकी राय को उसके परिवार वाले अनसुना कर ही नहीं सकते हैं।