...तो कोरोना वायरस से होगी डेढ़ करोड़ लोगों की मौत!
Saturday - March 7, 2020 1:51 pm ,
Category : WTN HINDI
बढ़ती ही जा रही है कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की तादात
कोरोना वायरस पर ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के दावे ने उड़ाई लोगों की नीदें
MARCH 07 (WTN) – चीन के वुहान शहर के एक कथित सीफूड मार्केट से फैला कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए एक जानलेवा चुनौती बन गया है। जानकारी के मुताबिक़, अभी तक कोरोना वायरस के कारण चीन में तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इस वायरस के कारण क़रीब 80 हज़ार से ज़्यादा लोग चीन में संक्रमित बताए जाते हैं। चीन के अलावा कोरोना वायरस इटली और ईरान में भी महामारी बनता जा रहा है। इन दोनों ही देशों में कोरोना वायरस के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक भारत की बात है, तो भारत में भी कोरोना वायरस के कुछ संदिग्ध मरीज़ मिले हैं। हालांकि, अभी तक राहत की बात है कि भारत में कोरोना वायरस के कारण कोई भी मौत नहीं हुई है।
अब जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कारण डरी सहमी है। ऐसे में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के दावे से पूरी दुनिया में हड़कम्प मच गया है। यूनिवर्सिटी ने अपनी एक स्टडी के आधार पर दावा किया है कि कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में क़रीब डेढ़ करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। स्टडी में कहा गया है कि जैसी कि आशंका है कि महामारी और भी ज़्यादा फैल सकती है, ऐसे में एक साल के अन्दर इस बीमारी से डेढ़ करोड़ लोगों की जान जा सकती है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में चीन में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर का अनुमान 2 प्रतिशत लगाया गया है, वहीं वैश्विक स्तर पर दर फ़िलहाल 3.4 प्रतिशत है।
इतना ही नहीं, स्टडी में तो यहां तक दावा किया गया है कि यदि कोरोना वायरस की महामारी अपने सबसे विकराल रूप में पहुंचती है, तो इससे कई देशों में हाहाकार मच जाएगा और कोरोना वायरस के कारण क़रीब 6 करोड़ 80 लाख लोगों की जान जा सकती है। स्टडी में दावा किया गया है कि ऐसे स्थिति में जबकि कोरोना वायरस अपने सबसे विकराल रूप में होगा, भारत और चीन जैसे देशों में उचित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होने के कारण इन दोनों ही देशों में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की तादात लाखों में हो सकती है।
इतना ही नहीं, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के लोगों को भी कोरोना वायरस रूपी महामारी का सामना करना पड़ेगा, और अकेले अमेरिका में ही कोरोना वायरस से क़रीब 2 लाख 30 हज़ार लोगों की जान जा सकती है। वहीं स्टडी में कहा गया है कि कोरोना वायरस के कारण ब्रिटेन में क़रीब 64 हज़ार लोगों की मौत हो सकती हैं। वहीं जर्मनी में 79 हज़ार और फ्रांस में 60 हज़ार लोगों की मौत कोरोना वायरस से होने की आशंका स्टडी में व्यक्त की गई है। वहीं पहले से कोरोना वायरस से प्रभावित देशों दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान में मरने वालों की तादात कई गुना बढ़ जाएगी।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण के लिए अमेरिका समेत कई देशों ने चीन को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। वैसे चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कई विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का आरोप है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है बल्कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की असली जगह है चीन के वुहान शहर के पास स्थित वो वायरोलॉजी लैब जिसमें चीन सरकार के संरक्षण में विध्वंसकारी जैविक हथियार बनाए जा रहे थे। हालांकि, इस तरह के आरोप चीन सरकार पर मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिये लगते आ रहे हैं, लेकिन चीन सरकार की तरफ़ से इस पर कोई 'स्पष्ट सफाई' नहीं आई है।
इधर, चीन के नागरिक भी कोरोना वायरस पर अपनी सरकार के रवैये से काफ़ी नाराज़ हैं। चीनी लोगों का आरोप है कि दुनिया में बदनामी के डर से सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाने की ग़लती की, और सरकार की यही ग़लती सैकड़ों चीनियों की मौत का कारण बनी। दरअसल, चीन में जिस डॉक्टर ने सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में बताया था, उस डॉक्टर को चीन की वामपंथी सरकार ने कोरोना वायरस का सच ज़ाहिर करने के लिए इतना प्रताड़ित किया कि उसकी ख़ुद की मौत कथित रूप से कोरोना वायरस से हो गई। चीन की वामपंथी सरकार ने जो लापरवाही कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के दौरान दिखाई है, उसी के कारण चीन के साथ ही दुनिया के अन्य देशों में भी लोग मर रहे हैं। यदि समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं खोजा गया, और आने वाले समय में कोरोना वायरस और भी ज़्यादा भयावह हुआ तो ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की स्टडी का यह दावा सही साबित ना हो जाए, जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण के कारण डेढ़ करोड़ लोगों के मारे जाने की बात कही गई है।
MARCH 07 (WTN) – चीन के वुहान शहर के एक कथित सीफूड मार्केट से फैला कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए एक जानलेवा चुनौती बन गया है। जानकारी के मुताबिक़, अभी तक कोरोना वायरस के कारण चीन में तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इस वायरस के कारण क़रीब 80 हज़ार से ज़्यादा लोग चीन में संक्रमित बताए जाते हैं। चीन के अलावा कोरोना वायरस इटली और ईरान में भी महामारी बनता जा रहा है। इन दोनों ही देशों में कोरोना वायरस के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक भारत की बात है, तो भारत में भी कोरोना वायरस के कुछ संदिग्ध मरीज़ मिले हैं। हालांकि, अभी तक राहत की बात है कि भारत में कोरोना वायरस के कारण कोई भी मौत नहीं हुई है।
अब जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कारण डरी सहमी है। ऐसे में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के दावे से पूरी दुनिया में हड़कम्प मच गया है। यूनिवर्सिटी ने अपनी एक स्टडी के आधार पर दावा किया है कि कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में क़रीब डेढ़ करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। स्टडी में कहा गया है कि जैसी कि आशंका है कि महामारी और भी ज़्यादा फैल सकती है, ऐसे में एक साल के अन्दर इस बीमारी से डेढ़ करोड़ लोगों की जान जा सकती है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में चीन में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर का अनुमान 2 प्रतिशत लगाया गया है, वहीं वैश्विक स्तर पर दर फ़िलहाल 3.4 प्रतिशत है।
इतना ही नहीं, स्टडी में तो यहां तक दावा किया गया है कि यदि कोरोना वायरस की महामारी अपने सबसे विकराल रूप में पहुंचती है, तो इससे कई देशों में हाहाकार मच जाएगा और कोरोना वायरस के कारण क़रीब 6 करोड़ 80 लाख लोगों की जान जा सकती है। स्टडी में दावा किया गया है कि ऐसे स्थिति में जबकि कोरोना वायरस अपने सबसे विकराल रूप में होगा, भारत और चीन जैसे देशों में उचित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होने के कारण इन दोनों ही देशों में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की तादात लाखों में हो सकती है।
इतना ही नहीं, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के लोगों को भी कोरोना वायरस रूपी महामारी का सामना करना पड़ेगा, और अकेले अमेरिका में ही कोरोना वायरस से क़रीब 2 लाख 30 हज़ार लोगों की जान जा सकती है। वहीं स्टडी में कहा गया है कि कोरोना वायरस के कारण ब्रिटेन में क़रीब 64 हज़ार लोगों की मौत हो सकती हैं। वहीं जर्मनी में 79 हज़ार और फ्रांस में 60 हज़ार लोगों की मौत कोरोना वायरस से होने की आशंका स्टडी में व्यक्त की गई है। वहीं पहले से कोरोना वायरस से प्रभावित देशों दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान में मरने वालों की तादात कई गुना बढ़ जाएगी।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण के लिए अमेरिका समेत कई देशों ने चीन को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। वैसे चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कई विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का आरोप है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है बल्कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की असली जगह है चीन के वुहान शहर के पास स्थित वो वायरोलॉजी लैब जिसमें चीन सरकार के संरक्षण में विध्वंसकारी जैविक हथियार बनाए जा रहे थे। हालांकि, इस तरह के आरोप चीन सरकार पर मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिये लगते आ रहे हैं, लेकिन चीन सरकार की तरफ़ से इस पर कोई 'स्पष्ट सफाई' नहीं आई है।
इधर, चीन के नागरिक भी कोरोना वायरस पर अपनी सरकार के रवैये से काफ़ी नाराज़ हैं। चीनी लोगों का आरोप है कि दुनिया में बदनामी के डर से सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को छिपाने की ग़लती की, और सरकार की यही ग़लती सैकड़ों चीनियों की मौत का कारण बनी। दरअसल, चीन में जिस डॉक्टर ने सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में बताया था, उस डॉक्टर को चीन की वामपंथी सरकार ने कोरोना वायरस का सच ज़ाहिर करने के लिए इतना प्रताड़ित किया कि उसकी ख़ुद की मौत कथित रूप से कोरोना वायरस से हो गई। चीन की वामपंथी सरकार ने जो लापरवाही कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के दौरान दिखाई है, उसी के कारण चीन के साथ ही दुनिया के अन्य देशों में भी लोग मर रहे हैं। यदि समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं खोजा गया, और आने वाले समय में कोरोना वायरस और भी ज़्यादा भयावह हुआ तो ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की स्टडी का यह दावा सही साबित ना हो जाए, जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण के कारण डेढ़ करोड़ लोगों के मारे जाने की बात कही गई है।