...तो सस्ते हो जाएंगे मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़े
Thursday - March 12, 2020 3:35 pm ,
Category : WTN HINDI
14 मार्च को है जीएसटी काउंसिल की बैठक
मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़ों पर कम हो सकता है जीएसटी रेट
MARCH 12 (WTN) – यदि सभी कुछ आशा के अनुसार रहा, तो आने वाले समय में मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़े सस्ते हो सकते हैं। जीहां, इंसान के ज़रूरत के यह सामान जल्द सस्ते हो सकते हैं यदि सरकार ने इन उत्पादों पर जीएसटी दर घटाने की मांग को मंजूरी दे दी तो। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रविवार 14 मार्च को जीएसटी परिषद की मीटिंग प्रस्तावित है। यदि इस मीटिंग में इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है कि मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़ों पर जीएसटी रेट को कम कर दिया जाए, तो आने वाले दिनों में यह उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी मोबाइल फ़ोन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। वहीं मोबाइल फ़ोन के कुछ कच्चे माल पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। इधर, निर्धारित मूल्य के जूते-चप्पल पर लगने वाले जीएसटी पर जीएसटी काउंसिल ने पिछले साल जून में ही कटौती की थी। बता दें कि काउंसिल ने 1,000 रुपये मूल्य तक के जूते-चप्पल पर पिछले साल जून में कटौती की थी और जीएसटी रेट 5 प्रतिशत पर आ गया था। वहीं 1,000 रुपये क़ीमत से ज़्यादा मूल्य के जूते-चप्पल पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत ही है। हालांकि, जूते-चप्पल में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर जीएसटी दर 5 से 18 प्रतिशत है।
बात करें कपड़ों पर लगने वाली जीएसटी की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल टेक्सटाइल क्षेत्र में जीएसटी की अलग-अलग दरें 5, 12 और 18 प्रतिशत है। जीएसटी की तीन अलग-अलग दरें होने के कारण निर्यातकों द्वारा रिफण्ड के दावे और उसे जारी करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कपड़ों का व्यापार करने वाले कई व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी की अलग-अलग दर होने के कारण उन्हें जीएसटी रिफण्ड दावों के लिए काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार काउंसिल की बैठक में कपड़ा व्यापारियों की इस मांग पर कोई ठोस फ़ैसला लिया जाए।
यानी जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़ों पर जीएसटी रेट कम करने की मांग पर विचार हो सकता है। इसी के साथ ही काउंसिल की बैठक में नए रिटर्न फ़ाइल करने की व्यवस्था और ई-इनवॉयस के इम्प्लीमेंटेशन को टाले जाने की सम्भावना है। जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में परिषद की बैठक में जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर परिचालन सम्बन्धित खामियों पर चर्चा होने की उम्मीद है, और बैठक में इन्फोसिस से इसके समाधान की योजना की मांग की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि आईटी कम्पनी इन्फोसिस को साल 2015 में जीएसटीएन नेटवर्क के तकनीकी प्रबंधन का ठेका दिया गया था।
वहीं जीएसटी की बैठक में राजस्व संग्रह बढ़ाने के बारे में भी चर्चा होगी क्योंकि केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्यों के पास जीएसटी के इम्प्लीमेंटेशन के कारण उसके पास राजस्व नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए कोष नहीं है। वहीं इस बैठक में जीएसटी ई-वे बिल प्रणाली के एनएचएआई की फास्टैग व्यवस्था के साथ अप्रैल से एकीकरण पर भी चर्चा होगी। दावा किया जा रहा है कि इससे वस्तुओं की ट्रांसपोर्टेशन और जीएसटी चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। वहीं इसके अलावा काउंसिल की बैठक में जीएसटी पंजीकृत करदाताओं के आधार नम्बर के तहत सत्यापन की तैयारी पर भी चर्चा हो सकती है। बता दें कि काउंसिल की बैठक में जीएसटी के तहत प्रस्तावित लॉटरी योजना पर भी चर्चा होने की सम्भावना है।
MARCH 12 (WTN) – यदि सभी कुछ आशा के अनुसार रहा, तो आने वाले समय में मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़े सस्ते हो सकते हैं। जीहां, इंसान के ज़रूरत के यह सामान जल्द सस्ते हो सकते हैं यदि सरकार ने इन उत्पादों पर जीएसटी दर घटाने की मांग को मंजूरी दे दी तो। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रविवार 14 मार्च को जीएसटी परिषद की मीटिंग प्रस्तावित है। यदि इस मीटिंग में इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है कि मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़ों पर जीएसटी रेट को कम कर दिया जाए, तो आने वाले दिनों में यह उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी मोबाइल फ़ोन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। वहीं मोबाइल फ़ोन के कुछ कच्चे माल पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। इधर, निर्धारित मूल्य के जूते-चप्पल पर लगने वाले जीएसटी पर जीएसटी काउंसिल ने पिछले साल जून में ही कटौती की थी। बता दें कि काउंसिल ने 1,000 रुपये मूल्य तक के जूते-चप्पल पर पिछले साल जून में कटौती की थी और जीएसटी रेट 5 प्रतिशत पर आ गया था। वहीं 1,000 रुपये क़ीमत से ज़्यादा मूल्य के जूते-चप्पल पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत ही है। हालांकि, जूते-चप्पल में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर जीएसटी दर 5 से 18 प्रतिशत है।
बात करें कपड़ों पर लगने वाली जीएसटी की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल टेक्सटाइल क्षेत्र में जीएसटी की अलग-अलग दरें 5, 12 और 18 प्रतिशत है। जीएसटी की तीन अलग-अलग दरें होने के कारण निर्यातकों द्वारा रिफण्ड के दावे और उसे जारी करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कपड़ों का व्यापार करने वाले कई व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी की अलग-अलग दर होने के कारण उन्हें जीएसटी रिफण्ड दावों के लिए काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार काउंसिल की बैठक में कपड़ा व्यापारियों की इस मांग पर कोई ठोस फ़ैसला लिया जाए।
यानी जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में मोबाइल फ़ोन, जूते-चप्पल और कपड़ों पर जीएसटी रेट कम करने की मांग पर विचार हो सकता है। इसी के साथ ही काउंसिल की बैठक में नए रिटर्न फ़ाइल करने की व्यवस्था और ई-इनवॉयस के इम्प्लीमेंटेशन को टाले जाने की सम्भावना है। जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में परिषद की बैठक में जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर परिचालन सम्बन्धित खामियों पर चर्चा होने की उम्मीद है, और बैठक में इन्फोसिस से इसके समाधान की योजना की मांग की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि आईटी कम्पनी इन्फोसिस को साल 2015 में जीएसटीएन नेटवर्क के तकनीकी प्रबंधन का ठेका दिया गया था।
वहीं जीएसटी की बैठक में राजस्व संग्रह बढ़ाने के बारे में भी चर्चा होगी क्योंकि केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्यों के पास जीएसटी के इम्प्लीमेंटेशन के कारण उसके पास राजस्व नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए कोष नहीं है। वहीं इस बैठक में जीएसटी ई-वे बिल प्रणाली के एनएचएआई की फास्टैग व्यवस्था के साथ अप्रैल से एकीकरण पर भी चर्चा होगी। दावा किया जा रहा है कि इससे वस्तुओं की ट्रांसपोर्टेशन और जीएसटी चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। वहीं इसके अलावा काउंसिल की बैठक में जीएसटी पंजीकृत करदाताओं के आधार नम्बर के तहत सत्यापन की तैयारी पर भी चर्चा हो सकती है। बता दें कि काउंसिल की बैठक में जीएसटी के तहत प्रस्तावित लॉटरी योजना पर भी चर्चा होने की सम्भावना है।