बड़ा सवाल: कोरोना वायरस फैला है या फिर फैलाया गया है?
Wednesday - March 18, 2020 12:52 pm ,
Category : WTN HINDI
सैकड़ों लोगों की जान ले चुका है कोरोना वायरस
चीन और अमेरिका लगा रहे एक दूसरे पर कोरोना वायरस संक्रमण ‘फैलाने’ का आरोप
MARCH 18 (WTN) – कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में 7,989 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया के 162 देशों में कोरोना वायरस संक्रमण पहुंच चुका है और इन देशों की सरकारें कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के उपाय कर रही हैं। लेकिन ऐसे में एक सवाल बार-बार सभी के मन में उठ रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण आख़िर कैसे फैला है? जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण की शुरूआत चीन के वुहान शहर से हुई है। पूरी दुनिया को इस बीमारी के बारे में पता चलने के बाद चीन सरकार ने दावा किया था वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है। अब चूंकि संक्रमण शुरूआती स्टेज में था, तो पूरी दुनिया ने चीन सरकार की इस बात पर यक़ीन कर लिया कि कोरोना वायरस वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है।
लेकिन समय के साथ चीन सरकार की इस बात पर संशय पैदा होने लगा कि कोरोना वायरस संक्रमण सच में ही सीफूड मार्केट से फैला है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया पर पाबंदी और सेन्सरशिप है, तो ऐसे में चीन सरकार ने कोरोना वायरस के बारे में जो भी जानकारी पूरी दुनिया को दी, वही जानकारी को दुनिया सच मान रही थी। लेकिन अब दुनिया की दो बड़ी शक्तियां चीन और अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रही हैं। जीहां, इस समय पूरी दुनिया में इस बात पर बहस जारी है कि आख़िर कोरोना वायरस संक्रमण फैला कैसे?
दरअसल, अब दुनिया में इस बात पर बहस हो रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है, बल्कि इस संक्रमण को पैदा किया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए अमेरिका जहां चीन पर आरोप लगा रहा है, तो वहीं चीन, रूस और ईरान जैसे देश अमेरिका को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में जब चीन सरकार ने दावा किया था कि यह संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, तो इसके बाद पूरी दुनिया चीन सरकार के इस दावे पर शंका करने लगी। इसी कड़ी में 24 जनवरी को वाशिंगटन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक़, “यह वायरस चीन के जैविक हथियारों के एक प्रोग्राम के कारण पैदा हुआ है, और इसे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी में तैयार किया गया है।” लेकिन बाद में अख़बार ने इसका खण्डन करते हुए कहा कि वुहान का यह इंस्टीटयूट जैविक हथियार बनाने में सक्षम नहीं है।
इसके बाद फरवरी में रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टॉम कॉटन और फ्रांसिस बोयले ने चीन सरकार पर आरोप लगा हुआ कहा था, “यह वायरस चीन सरकार द्वारा बनाए जा रहे जैविक हथियारों से पैदा हो सकता है।” वहीं एक और अमेरिकी नेता लिंबग ने कहा कि सम्भव है कि चीन की किसी लैब में हो रहे परीक्षण से ही कोरोना वायरस निकला हो। कोरोना वायरस संक्रमण पर शुरूआती दौर में अमेरिका और उससे जुड़ी संस्थाओं ने इसके लिए चीन सरकार पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जमकर आरोप लगाए कि कोरोना वायरस संक्रमण को पैदा किया गया है।
तमाम तरह के आरोप लगने के बाद चीन सरकार ने पहले तो चुप्पी साधे रखी, क्योंकि चीन सरकार पहले अपने देश में कोरोना वायरस की स्थिति सम्भालने में लगी हुई थी। लेकिन चीन में स्थिति थोड़ी नियंत्रित होने के बाद चीन सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण पर अमेरिका पर जवाबी हमले करना शुरू कर दिये। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने पहली बार ट्विट करके आशंका जाहिर की है कि कोरोना वायरस एक गहरी साजिश के कारण चीन में आया है। इतना ही नहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने तो कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के पीछे अमेरिका की सेना तक को ज़िम्मेदार बता दिया।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में चीन में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स हुए थे। इन गेम्स में अमेरिका ने भी अपने सैनिक एथलीटों की बड़ी टीम भेजी थी। चीन सरकार का कहना है कि जहां पर अमेरिका की टीम ठहरी थी, वो जगह वुहान के चर्चित सीफूड मार्केट के पास ही है। लेकिन मिलिट्री गेम्स ख़त्म होने के बाद नवम्बर महीने से ही वुहान में एक रहस्यमयी बीमारी फैलने लगी। इसी कारण से चीन की सोशल मीडिया में लम्बे समय से यह बात वायरल हो रही है कि अमेरिकी मिलिट्री टीम ने ही चीन में इस वायरस को प्लांट किया है।
इधर, अमेरिकी के पुराने प्रतिद्वंदी रूस में भी कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के पीछे अमेरिका को सीधे तौर पर दोषी ठहराया जाने लगा। दरअसल, रूस की मीडिया बड़े पैमाने पर इस तरह की स्टोरीज प्रसारित कर रही थी जिसमें यह बताया जा रहा था कि कोरोना वायरस बीमारी अमेरिका ने फैलाई है, जिससे चीन आर्थिक तौर पर कमज़ोर हो जाए और ट्रेड वार्ता में अमेरिकी की शर्तें उसे माननी पड़ें। हालांकि, बाद में रूस के विदेश मंत्री ने इस तरह की ख़बरों को फेक न्यूज़ क़रार दिया। लेकिन रूस की मीडिया का तो यह तक कहना है कि कोरोना वायरस फैलने के पीछे यूरोप और अमेरिका की बड़ी दवा कम्पनियों, सीआईए, पेंटागन और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की मिलीजुली साजिश है। इस वायरस को अमेरिकी लैब में विकसित किया गया और किसी तरह इसे वुहान शहर में फैला दिया गया है। इतना ही नहीं, रूस के एक टीवी शो में यहां तक दावा किया गया है कि जार्जिया में एक अमेरिकी सीक्रेट लैब है, जहां पर जैविक हथियार बनाने का काम हो रहा है।
लेकिन वहीं दूसरी तरह अमेरिकी की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस को वुहान की एक वैज्ञानिक ने ही पैदा किया है। बाद में एक वेबसाइट ने एक चाइनीज वैज्ञानिक की पहचान का दावा करते हुए उसका नाम और फ़ोटो ट्विटर पर सार्वजनिक की कि इसी वैज्ञानिक ने कोरोना वायरस संक्रमण को पैदा किया है। हालांकि, बाद में ट्विटर ने उसकी पोस्ट को वहां से हटा दिया। लेकिन बाद में वेबसाइट ने कहा कि उन्होंने यह दावा कभी नहीं किया कि इसी चीनी वैज्ञानिक ने ही कोरोना वायरस पैदा किया है और ना ही उन्होंने यह दावा किया कि ये वायरस मानव निर्मित है।
इतना ही नहीं, चीन की सोशल मीडिया पर यह क़यास भी लगने लगे थे कि कोरोना वायरस को वुहान के एक वैज्ञानिक ने तैयार किया है। लेकिन बाद में उस वैज्ञानिक ने इस बात का खण्डन किया कि उसने किसी भी तरह का कोई वायरस तैयार किया है। चीन की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन में जब यह बीमारी फैलनी शुरू हुई तो चीन के ही लोगों ने वुहान इंस्टीट्यूट की मुख्य शोधकर्ता शी झेंगली पर सोशल साइट्स के ज़रिए यह आरोप लगाने शुरू कर दिए कि यह वायरस उन्हीं ने पैदा किया है और फैलाया है। लेकिन बाद में शी झेंगली ने तमाम तरह के आरोपों का खण्डन करते हुए कहा कि उन्होंने इस वायरस को लैब में नहीं बनाया है।
इधर, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने संयुक्त राष्ट्र संघ को एक पत्र लिखकर दावा किया कि कोरोना वायरस को लैब में ही पैदा किया गया है, जिससे अमेरिका अपने इस जैविक हथियार के ज़रिए पूरी दुनिया पर वर्चस्व बनाकर रख सके। बता दें कि ईरान इस वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। वहीं ईरान के कुछ धार्मिक नेताओं का आरोप है कि अमेरिका ने एक सोची समझी चाल के तहत ईरान पर इस वायरस से हमला किया है। ख़ैर कोरोना वायरस फैलने का क्या कारण है, यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। लेकिन अभी तो अमेरिका और चीन एक दूसरे पर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन यदि सही में कोरोना वायरस संक्रमण लैब में पैदाकर फैलाया गया है, तो मानव सभ्यता कभी भी इसे क्षमा नहीं कर सकेगी।
MARCH 18 (WTN) – कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में 7,989 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया के 162 देशों में कोरोना वायरस संक्रमण पहुंच चुका है और इन देशों की सरकारें कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के उपाय कर रही हैं। लेकिन ऐसे में एक सवाल बार-बार सभी के मन में उठ रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण आख़िर कैसे फैला है? जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण की शुरूआत चीन के वुहान शहर से हुई है। पूरी दुनिया को इस बीमारी के बारे में पता चलने के बाद चीन सरकार ने दावा किया था वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है। अब चूंकि संक्रमण शुरूआती स्टेज में था, तो पूरी दुनिया ने चीन सरकार की इस बात पर यक़ीन कर लिया कि कोरोना वायरस वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है।
लेकिन समय के साथ चीन सरकार की इस बात पर संशय पैदा होने लगा कि कोरोना वायरस संक्रमण सच में ही सीफूड मार्केट से फैला है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया पर पाबंदी और सेन्सरशिप है, तो ऐसे में चीन सरकार ने कोरोना वायरस के बारे में जो भी जानकारी पूरी दुनिया को दी, वही जानकारी को दुनिया सच मान रही थी। लेकिन अब दुनिया की दो बड़ी शक्तियां चीन और अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रही हैं। जीहां, इस समय पूरी दुनिया में इस बात पर बहस जारी है कि आख़िर कोरोना वायरस संक्रमण फैला कैसे?
दरअसल, अब दुनिया में इस बात पर बहस हो रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है, बल्कि इस संक्रमण को पैदा किया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए अमेरिका जहां चीन पर आरोप लगा रहा है, तो वहीं चीन, रूस और ईरान जैसे देश अमेरिका को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में जब चीन सरकार ने दावा किया था कि यह संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, तो इसके बाद पूरी दुनिया चीन सरकार के इस दावे पर शंका करने लगी। इसी कड़ी में 24 जनवरी को वाशिंगटन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक़, “यह वायरस चीन के जैविक हथियारों के एक प्रोग्राम के कारण पैदा हुआ है, और इसे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी में तैयार किया गया है।” लेकिन बाद में अख़बार ने इसका खण्डन करते हुए कहा कि वुहान का यह इंस्टीटयूट जैविक हथियार बनाने में सक्षम नहीं है।
इसके बाद फरवरी में रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टॉम कॉटन और फ्रांसिस बोयले ने चीन सरकार पर आरोप लगा हुआ कहा था, “यह वायरस चीन सरकार द्वारा बनाए जा रहे जैविक हथियारों से पैदा हो सकता है।” वहीं एक और अमेरिकी नेता लिंबग ने कहा कि सम्भव है कि चीन की किसी लैब में हो रहे परीक्षण से ही कोरोना वायरस निकला हो। कोरोना वायरस संक्रमण पर शुरूआती दौर में अमेरिका और उससे जुड़ी संस्थाओं ने इसके लिए चीन सरकार पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जमकर आरोप लगाए कि कोरोना वायरस संक्रमण को पैदा किया गया है।
तमाम तरह के आरोप लगने के बाद चीन सरकार ने पहले तो चुप्पी साधे रखी, क्योंकि चीन सरकार पहले अपने देश में कोरोना वायरस की स्थिति सम्भालने में लगी हुई थी। लेकिन चीन में स्थिति थोड़ी नियंत्रित होने के बाद चीन सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण पर अमेरिका पर जवाबी हमले करना शुरू कर दिये। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने पहली बार ट्विट करके आशंका जाहिर की है कि कोरोना वायरस एक गहरी साजिश के कारण चीन में आया है। इतना ही नहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने तो कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के पीछे अमेरिका की सेना तक को ज़िम्मेदार बता दिया।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में चीन में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स हुए थे। इन गेम्स में अमेरिका ने भी अपने सैनिक एथलीटों की बड़ी टीम भेजी थी। चीन सरकार का कहना है कि जहां पर अमेरिका की टीम ठहरी थी, वो जगह वुहान के चर्चित सीफूड मार्केट के पास ही है। लेकिन मिलिट्री गेम्स ख़त्म होने के बाद नवम्बर महीने से ही वुहान में एक रहस्यमयी बीमारी फैलने लगी। इसी कारण से चीन की सोशल मीडिया में लम्बे समय से यह बात वायरल हो रही है कि अमेरिकी मिलिट्री टीम ने ही चीन में इस वायरस को प्लांट किया है।
इधर, अमेरिकी के पुराने प्रतिद्वंदी रूस में भी कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के पीछे अमेरिका को सीधे तौर पर दोषी ठहराया जाने लगा। दरअसल, रूस की मीडिया बड़े पैमाने पर इस तरह की स्टोरीज प्रसारित कर रही थी जिसमें यह बताया जा रहा था कि कोरोना वायरस बीमारी अमेरिका ने फैलाई है, जिससे चीन आर्थिक तौर पर कमज़ोर हो जाए और ट्रेड वार्ता में अमेरिकी की शर्तें उसे माननी पड़ें। हालांकि, बाद में रूस के विदेश मंत्री ने इस तरह की ख़बरों को फेक न्यूज़ क़रार दिया। लेकिन रूस की मीडिया का तो यह तक कहना है कि कोरोना वायरस फैलने के पीछे यूरोप और अमेरिका की बड़ी दवा कम्पनियों, सीआईए, पेंटागन और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की मिलीजुली साजिश है। इस वायरस को अमेरिकी लैब में विकसित किया गया और किसी तरह इसे वुहान शहर में फैला दिया गया है। इतना ही नहीं, रूस के एक टीवी शो में यहां तक दावा किया गया है कि जार्जिया में एक अमेरिकी सीक्रेट लैब है, जहां पर जैविक हथियार बनाने का काम हो रहा है।
लेकिन वहीं दूसरी तरह अमेरिकी की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस को वुहान की एक वैज्ञानिक ने ही पैदा किया है। बाद में एक वेबसाइट ने एक चाइनीज वैज्ञानिक की पहचान का दावा करते हुए उसका नाम और फ़ोटो ट्विटर पर सार्वजनिक की कि इसी वैज्ञानिक ने कोरोना वायरस संक्रमण को पैदा किया है। हालांकि, बाद में ट्विटर ने उसकी पोस्ट को वहां से हटा दिया। लेकिन बाद में वेबसाइट ने कहा कि उन्होंने यह दावा कभी नहीं किया कि इसी चीनी वैज्ञानिक ने ही कोरोना वायरस पैदा किया है और ना ही उन्होंने यह दावा किया कि ये वायरस मानव निर्मित है।
इतना ही नहीं, चीन की सोशल मीडिया पर यह क़यास भी लगने लगे थे कि कोरोना वायरस को वुहान के एक वैज्ञानिक ने तैयार किया है। लेकिन बाद में उस वैज्ञानिक ने इस बात का खण्डन किया कि उसने किसी भी तरह का कोई वायरस तैयार किया है। चीन की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन में जब यह बीमारी फैलनी शुरू हुई तो चीन के ही लोगों ने वुहान इंस्टीट्यूट की मुख्य शोधकर्ता शी झेंगली पर सोशल साइट्स के ज़रिए यह आरोप लगाने शुरू कर दिए कि यह वायरस उन्हीं ने पैदा किया है और फैलाया है। लेकिन बाद में शी झेंगली ने तमाम तरह के आरोपों का खण्डन करते हुए कहा कि उन्होंने इस वायरस को लैब में नहीं बनाया है।
इधर, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने संयुक्त राष्ट्र संघ को एक पत्र लिखकर दावा किया कि कोरोना वायरस को लैब में ही पैदा किया गया है, जिससे अमेरिका अपने इस जैविक हथियार के ज़रिए पूरी दुनिया पर वर्चस्व बनाकर रख सके। बता दें कि ईरान इस वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। वहीं ईरान के कुछ धार्मिक नेताओं का आरोप है कि अमेरिका ने एक सोची समझी चाल के तहत ईरान पर इस वायरस से हमला किया है। ख़ैर कोरोना वायरस फैलने का क्या कारण है, यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। लेकिन अभी तो अमेरिका और चीन एक दूसरे पर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन यदि सही में कोरोना वायरस संक्रमण लैब में पैदाकर फैलाया गया है, तो मानव सभ्यता कभी भी इसे क्षमा नहीं कर सकेगी।