रिसर्च से हुआ ख़ुलासा; ‘इन’ ब्लड ग्रुप वाले लोगों पर कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा है ज़्यादा
Thursday - March 19, 2020 10:57 am ,
Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस के कारण अभी तक 8,960 से ज़्यादा लोगों की मौत
रिसर्च: ए ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना वायरस संक्रमण का है ज़्यादा ख़तरा
MARCH 19 (WTN) – कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से 8,969 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत समेत दुनिया के 170 से ज़्यादा देशों में फैल चुका कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई तरह की एडवाइज़री जारी की हैं। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोग कई तरह के उपाय अपना भी रहे हैं। इस सबसे बीच, कोरोना वायरस संक्रमण पर तरह-तरह के रिसर्च भी सामने आ रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक़, तांबे की सतह पर कोरोना वायरस जल्द ही ख़त्म हो जाता है। जबकि अन्य निर्जीव सतहों पर कोरोना वायरस 9 दिनों तक जीवित रहता है।
कोरोना वायरस संक्रमण पर हो रही तमाम तरह की रिर्सच के बीच एक नई रिसर्च सामने आई है। इस रिसर्च को अंजाम दिया है चीन के हुबेई प्रांत के जिनइंतान अस्पताल के शोधकर्ताओं ने। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च वुहान में किया है, जो कि चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि वुहान शहर से ही पूरी दुनिया में COVID-19 वायरस का संक्रमण फैला है। अपने रिसर्च में शोधकर्ताओं ने ख़ुलासा किया है कि आख़िर किस ब्लड ग्रुप वाले इंसानों को कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा रहता है। क्या हैं इस रिसर्च के परिणाम? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
रिसर्च के मुताबिक़, जिन व्यक्तियों का ब्लड ग्रुप ए होता है, उन लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होने की आशंका ज़्यादा रहती है। वहीं जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ओ होता है, उन लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा ज़रा कम होता है। जानकारी के लिए बता दें कि वुहान में चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित 2,173 लोगों पर अध्ययन किया था, और इनमें से 206 लोगों की मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हुई थी। रिसर्च के बाद पता चला है कि कोरोना वायरस के कारण मारे गये 206 लोगों में से 85 लोगों को ब्लड ग्रुप ए था।
आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि कोरोना वायरस के कारण मारे गये 206 लोगों में से मारे गये 41 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप ए था। जबकि सिर्फ़ 52 लोगों को ब्लड ग्रुप ओ था। यानी ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों के मरने का प्रतिशत सिर्फ़ 25 था। जहां तक कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होने की बात है, तो जिन 2,173 लोगों पर रिसर्च किया गया था, उनमें संक्रमित होने वाले ज़्यादातर लोग ब्लड ग्रुप ए वाले थे। रिसर्च के मुताबिक़, जिन 2,173 लोगों पर रिसर्च किया गया था, उनमें संक्रमित होने वाले 32 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप ए था। वहीं संक्रमित होने वाले लोगों में ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों की संख्या सिर्फ़ 26 प्रतिशत थी।
शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमित मरीज़ों और मृतकों पर रिसर्च करने के बाद यह परिणाम निकाला है कि ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मरने की आशंका बाक़ी अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों से कम है। इतना ही नहीं, रिसर्च के मुताबिक़, ओ ब्लड ग्रुप वाले लोग कोरोना वायरस से देर से संक्रमित भी होते हैं। वहीं ब्लड ग्रुप ए वाले लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मरने की आशंका काफ़ी ज़्यादा रहती है, साथ ही ब्लड ग्रुप ए वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज़्यादा संक्रमित होते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक़, SARS-COV-2 के समय भी ब्लड ग्रुप ओ वाले लोग कम बीमार पड़े थे, जबकि अन्य ब्लड ग्रुप के लोग काफ़ी ज़्यादा प्रभावित हुए थे।
वैसे शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप ए है, तो उसे चिन्ता करने की कोई भी ज़रूरत नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसका मतलब यह नहीं है कि यदि आपका ब्लड ग्रुप ए है तो आप कोरोना वायरस से संक्रमित हो ही जाएंगे। वहीं जिनका ब्लड ग्रुप ओ है वो इस मुग़ालते में ना रहें कि कोरोना वायरस संक्रमण का उन पर कम असर होगा। ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों को भी कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है, इसलिए उन्हें लापरवाही नहीं बरतना चाहिए।
MARCH 19 (WTN) – कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से 8,969 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत समेत दुनिया के 170 से ज़्यादा देशों में फैल चुका कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई तरह की एडवाइज़री जारी की हैं। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोग कई तरह के उपाय अपना भी रहे हैं। इस सबसे बीच, कोरोना वायरस संक्रमण पर तरह-तरह के रिसर्च भी सामने आ रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक़, तांबे की सतह पर कोरोना वायरस जल्द ही ख़त्म हो जाता है। जबकि अन्य निर्जीव सतहों पर कोरोना वायरस 9 दिनों तक जीवित रहता है।
कोरोना वायरस संक्रमण पर हो रही तमाम तरह की रिर्सच के बीच एक नई रिसर्च सामने आई है। इस रिसर्च को अंजाम दिया है चीन के हुबेई प्रांत के जिनइंतान अस्पताल के शोधकर्ताओं ने। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च वुहान में किया है, जो कि चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि वुहान शहर से ही पूरी दुनिया में COVID-19 वायरस का संक्रमण फैला है। अपने रिसर्च में शोधकर्ताओं ने ख़ुलासा किया है कि आख़िर किस ब्लड ग्रुप वाले इंसानों को कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा रहता है। क्या हैं इस रिसर्च के परिणाम? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
रिसर्च के मुताबिक़, जिन व्यक्तियों का ब्लड ग्रुप ए होता है, उन लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होने की आशंका ज़्यादा रहती है। वहीं जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ओ होता है, उन लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा ज़रा कम होता है। जानकारी के लिए बता दें कि वुहान में चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित 2,173 लोगों पर अध्ययन किया था, और इनमें से 206 लोगों की मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हुई थी। रिसर्च के बाद पता चला है कि कोरोना वायरस के कारण मारे गये 206 लोगों में से 85 लोगों को ब्लड ग्रुप ए था।
आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि कोरोना वायरस के कारण मारे गये 206 लोगों में से मारे गये 41 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप ए था। जबकि सिर्फ़ 52 लोगों को ब्लड ग्रुप ओ था। यानी ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों के मरने का प्रतिशत सिर्फ़ 25 था। जहां तक कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होने की बात है, तो जिन 2,173 लोगों पर रिसर्च किया गया था, उनमें संक्रमित होने वाले ज़्यादातर लोग ब्लड ग्रुप ए वाले थे। रिसर्च के मुताबिक़, जिन 2,173 लोगों पर रिसर्च किया गया था, उनमें संक्रमित होने वाले 32 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप ए था। वहीं संक्रमित होने वाले लोगों में ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों की संख्या सिर्फ़ 26 प्रतिशत थी।
शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमित मरीज़ों और मृतकों पर रिसर्च करने के बाद यह परिणाम निकाला है कि ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मरने की आशंका बाक़ी अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों से कम है। इतना ही नहीं, रिसर्च के मुताबिक़, ओ ब्लड ग्रुप वाले लोग कोरोना वायरस से देर से संक्रमित भी होते हैं। वहीं ब्लड ग्रुप ए वाले लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मरने की आशंका काफ़ी ज़्यादा रहती है, साथ ही ब्लड ग्रुप ए वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज़्यादा संक्रमित होते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक़, SARS-COV-2 के समय भी ब्लड ग्रुप ओ वाले लोग कम बीमार पड़े थे, जबकि अन्य ब्लड ग्रुप के लोग काफ़ी ज़्यादा प्रभावित हुए थे।
वैसे शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप ए है, तो उसे चिन्ता करने की कोई भी ज़रूरत नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसका मतलब यह नहीं है कि यदि आपका ब्लड ग्रुप ए है तो आप कोरोना वायरस से संक्रमित हो ही जाएंगे। वहीं जिनका ब्लड ग्रुप ओ है वो इस मुग़ालते में ना रहें कि कोरोना वायरस संक्रमण का उन पर कम असर होगा। ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों को भी कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है, इसलिए उन्हें लापरवाही नहीं बरतना चाहिए।