अमेरिका और चीन के बीच एक ‘बड़ा विवाद’ बना कोरोना वायरस
Friday - March 20, 2020 10:47 am ,
Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस पर अमेरिका और चीन के बीच जारी है आरोपों का दौर
कोरोना वायरस संक्रमण के लिए अमेरिका और चीन ने एक दूसरे पर लगाए ‘गम्भीर आरोप’
MARCH 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारत समेत दुनिया के 170 से ज़्यादा देश कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस से अभी तक पूरी दुनिया में 10,047 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई एडाइज़री जारी की हैं। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी कर रहे हैं। जहां तक भारत की बात है, तो कोरोना वायरस के कारण भारत में अभी तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस को आगे फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ़्यू का आह्वान किया है।
ख़ैर, कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए दुनिया भर के देश अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्र्मण को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनातनी का माहौल है, और दोनों ही देश एकदूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाजी कर रहे हैं। दरअसल, जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से फैला है। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में अभी तक दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। अर्थव्यवस्था की हालत यह है कि विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका समेत पूरी दुनिया के शेयर बाज़ारों में ऐतिहासिक रूप से गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में अमेरिका अब सीधे तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है।
लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को दोषी बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प कई बार कोरोना वायरस को चीनी वायरस कह चुके हैं। हालांकि, कोरोना वायरस को किसी देश विशेष के नाम से जोड़ने पर ट्रम्प की कई लोग आलोचना कर रहे हैं। ट्रम्प के विरोधियों का कहना है कि कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहना ट्रम्प की नस्लवादी और चीन विरोधी सोच है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने में कुछ भी ग़लत नहीं लगता है। दरअसल, ट्रम्प का कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने के पीछे तर्क है कि कोरोना वायरस चूंकि चीन से आया है इसलिए इसे चीनी वायरस कहा जाना चाहिए।
जैसा कि आप जानते हैं कि पूंजीवादी मानसिकता वाले देश अमेरिका और वामपंथी विचारधारा वाले देश चीन के बीच पिछले काफ़ी लम्बे समय से वैश्विक राजनीतिक और अर्थव्यवस्था पर आधिपत्य को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। ऐसे में अमेरिका राष्ट्रपति द्वारा कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने पर चीन ने कड़ी आपत्ति दर्ज़ कराई है। चीन का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प की इस तरह की बयानबाजी से कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई कमज़ोर होगी, और इससे दोनों देशों के बीच विवाद और भी बढ़ेगा। इतना ही नहीं, चीन का कहना है कि कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने से दुनियाभर में एशियाई मूल के लोगों को ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ेगी, क्योंकि चीनी वायरस एक तरह की नस्लवादी टिप्पणी है।
लेकिन चीन कितना भी विरोध कर ले, अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को समय-समय पर टारगेट कर रहे हैं। चीन के ख़िलाफ़ अपनी भड़ास निकालते हुए ट्रम्प ने साफ़ कहा कि वे कोरोना वायरस के साथ चीन का नाम इसलिए जोड़ रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस के बारे में चीन अपने देश के लोगों को और दुनिया के लोगों को ग़लत जानकारियां दे रहा है। ट्रम्प ने चीन पर पलटवार करते हुए कहा कि चीन यह झूठ फैला रहा है कि अमेरिकी सैनिकों ने चीन के वुहान में कोरोना वायरस फैलाया है। आगे ट्रम्प ने कहा कि चीन हमारे सैनिकों को बदनाम कर रहा है। चीन को आड़े हाथों लेते हुए ट्रम्प ने साफ़ कहा कि चूंकि कोरोना वायरस संक्रमण की शुरूआत चीन से हुई है, इसलिए इसे चीनी वायरस कहने में कोई भी समस्या नहीं है।
वैसे अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वाले अधिकारी कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने से बच रहे हैं। पर वहीं व्हाइट हाउस ने इस पूरे विवाद को यह कहते हुए स्पष्ट करने की कोशिश की है कि पहले भी वायरस का नाम उसकी उत्पति की जगह के नाम पर दिया जाता रहा है। व्हाइट हाउस ने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया, “स्पैनिश फ्लू, वेस्ट नील वायरस, जीका वायरस और इबोला वायरस। यह सारे वायरस के नाम जगहों के नाम से ही हैं। मीडिया में फर्जी की बहस चल रही है, लेकिन सीएनएन ने भी सबसे पहले कोरोना वायरस को चीनी वायरस ही कहा था।”
ट्रेड वॉर के कारण पहले से ही चीन और अमेरिका के बीच विवाद जारी था। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद अब इन दोनों ही देशों के बीच इस वायरस को लेकर एक दूसरे को आरोपित करने का नया विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, अमेरिका की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का ऐसा दावा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान में स्थित एक वायरोलॉजी लैब से फैला है। क्योंकि चीन वहां पर विनाशकारी जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, चीन का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन अमेरिका ही नहीं, दुनिया की कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बात कही जा रही है कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है।
अब जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण के पीछे चीन सरकार की किसी साजिश पर शक कर रही है, तो ऐसे में चीन सरकार ने उल्टा अमेरिका पर ही कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने का आरोप लगा दिया। चीन सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बाक़ायदा अपने ट्वीट में अमेरिका पर गम्भीर आरोप लगाएं हैं। चीन का कहना है कि कुछ दिनों पहले वुहान में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स हुए थे, जिसमें अमेरिकी सैनिकों ने भी शिककत थी। अमेरिकी सैनिक जिस होटल में ठहरे हुए थे वो होटल उस सीफूड मार्केट के पास ही स्थित है जहां से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है। चीन सरकार ने अमेरिका सैनिकों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका सैनिकों ने ही वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलाया है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को तबाह किया जा सके।
जैसा कि हमने आपको बताया कि चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही सम्बन्धों में कड़वाहट है। ऐसे में कोरोनो वायरस के कारण इन दोनों ही देशों के बीच कड़वाहट और भी बढ़ेगी। दरअसल, अमेरिका ने चीन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को चीन ने ठीक तरह से नियंत्रित नहीं किया है, और इसी कारण से संक्रमण वुहान के बाद पूरी दुनिया में फैल गया। अमेरिकी मीडिया के बाद अब ट्रम्प प्रशासन में भी इस बात पर चर्चा हो रही है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान में स्थित सीफूड मार्केट से नहीं फैला है बल्कि कोरोना वायरस चीन सरकार की वुहान स्थित एक लैब से फैला है क्योंकि इस लैब में जैविक हथियारों को लेकर रिसर्च का काम चल रहा है।
हालांकि, अभी भी यह विवाद का विषय है कि वुहान शहर से कोरोना वायरस संक्रमण कैसे फैला? चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, जबकि विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स आरोप लगा रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान स्थित एक वायरोलॉजी लैब से फैला है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया पर पाबन्दी और सेन्सरशिप है। ऐसे में चीन से सही जानकारी बाहर आना फ़िलहाल मुश्किल ही है। लेकिन कोरोना वायरस के कारण अमेरिका लगातार चीन के ख़िलाफ़ बयानबाजी करता रहेगा, जिससे वो इस महामारी के लिए चीन को पूरी दुनिया के सामने दोषी ठहरा सके। हालांकि, अमेरिकी की बयानबाजी के ख़िलाफ़ चीन भी अपना पक्ष रख रहा है, लेकिन फ़िलहाल तो पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी के लिए चीन को ही ज़िम्मेदार मान रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन यदि इस बीमारी को नहीं छिपाता और तुरन्त ही इससे निपटने की कोशिश करता, तो आज यह बीमारी पूरी दुनिया में हज़ारों लोगों की मौत का कारण नहीं बनती।
MARCH 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण इस समय पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारत समेत दुनिया के 170 से ज़्यादा देश कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस से अभी तक पूरी दुनिया में 10,047 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई एडाइज़री जारी की हैं। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी कर रहे हैं। जहां तक भारत की बात है, तो कोरोना वायरस के कारण भारत में अभी तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस को आगे फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ़्यू का आह्वान किया है।
ख़ैर, कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए दुनिया भर के देश अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्र्मण को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनातनी का माहौल है, और दोनों ही देश एकदूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाजी कर रहे हैं। दरअसल, जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से फैला है। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में अभी तक दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। अर्थव्यवस्था की हालत यह है कि विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका समेत पूरी दुनिया के शेयर बाज़ारों में ऐतिहासिक रूप से गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में अमेरिका अब सीधे तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है।
लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को दोषी बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प कई बार कोरोना वायरस को चीनी वायरस कह चुके हैं। हालांकि, कोरोना वायरस को किसी देश विशेष के नाम से जोड़ने पर ट्रम्प की कई लोग आलोचना कर रहे हैं। ट्रम्प के विरोधियों का कहना है कि कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहना ट्रम्प की नस्लवादी और चीन विरोधी सोच है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने में कुछ भी ग़लत नहीं लगता है। दरअसल, ट्रम्प का कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने के पीछे तर्क है कि कोरोना वायरस चूंकि चीन से आया है इसलिए इसे चीनी वायरस कहा जाना चाहिए।
जैसा कि आप जानते हैं कि पूंजीवादी मानसिकता वाले देश अमेरिका और वामपंथी विचारधारा वाले देश चीन के बीच पिछले काफ़ी लम्बे समय से वैश्विक राजनीतिक और अर्थव्यवस्था पर आधिपत्य को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। ऐसे में अमेरिका राष्ट्रपति द्वारा कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने पर चीन ने कड़ी आपत्ति दर्ज़ कराई है। चीन का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प की इस तरह की बयानबाजी से कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई कमज़ोर होगी, और इससे दोनों देशों के बीच विवाद और भी बढ़ेगा। इतना ही नहीं, चीन का कहना है कि कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने से दुनियाभर में एशियाई मूल के लोगों को ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ेगी, क्योंकि चीनी वायरस एक तरह की नस्लवादी टिप्पणी है।
लेकिन चीन कितना भी विरोध कर ले, अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चीन को समय-समय पर टारगेट कर रहे हैं। चीन के ख़िलाफ़ अपनी भड़ास निकालते हुए ट्रम्प ने साफ़ कहा कि वे कोरोना वायरस के साथ चीन का नाम इसलिए जोड़ रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस के बारे में चीन अपने देश के लोगों को और दुनिया के लोगों को ग़लत जानकारियां दे रहा है। ट्रम्प ने चीन पर पलटवार करते हुए कहा कि चीन यह झूठ फैला रहा है कि अमेरिकी सैनिकों ने चीन के वुहान में कोरोना वायरस फैलाया है। आगे ट्रम्प ने कहा कि चीन हमारे सैनिकों को बदनाम कर रहा है। चीन को आड़े हाथों लेते हुए ट्रम्प ने साफ़ कहा कि चूंकि कोरोना वायरस संक्रमण की शुरूआत चीन से हुई है, इसलिए इसे चीनी वायरस कहने में कोई भी समस्या नहीं है।
वैसे अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वाले अधिकारी कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने से बच रहे हैं। पर वहीं व्हाइट हाउस ने इस पूरे विवाद को यह कहते हुए स्पष्ट करने की कोशिश की है कि पहले भी वायरस का नाम उसकी उत्पति की जगह के नाम पर दिया जाता रहा है। व्हाइट हाउस ने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया, “स्पैनिश फ्लू, वेस्ट नील वायरस, जीका वायरस और इबोला वायरस। यह सारे वायरस के नाम जगहों के नाम से ही हैं। मीडिया में फर्जी की बहस चल रही है, लेकिन सीएनएन ने भी सबसे पहले कोरोना वायरस को चीनी वायरस ही कहा था।”
ट्रेड वॉर के कारण पहले से ही चीन और अमेरिका के बीच विवाद जारी था। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद अब इन दोनों ही देशों के बीच इस वायरस को लेकर एक दूसरे को आरोपित करने का नया विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, अमेरिका की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का ऐसा दावा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान में स्थित एक वायरोलॉजी लैब से फैला है। क्योंकि चीन वहां पर विनाशकारी जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, चीन का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन अमेरिका ही नहीं, दुनिया की कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बात कही जा रही है कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से नहीं फैला है।
अब जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण के पीछे चीन सरकार की किसी साजिश पर शक कर रही है, तो ऐसे में चीन सरकार ने उल्टा अमेरिका पर ही कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने का आरोप लगा दिया। चीन सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बाक़ायदा अपने ट्वीट में अमेरिका पर गम्भीर आरोप लगाएं हैं। चीन का कहना है कि कुछ दिनों पहले वुहान में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स हुए थे, जिसमें अमेरिकी सैनिकों ने भी शिककत थी। अमेरिकी सैनिक जिस होटल में ठहरे हुए थे वो होटल उस सीफूड मार्केट के पास ही स्थित है जहां से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है। चीन सरकार ने अमेरिका सैनिकों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका सैनिकों ने ही वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलाया है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को तबाह किया जा सके।
जैसा कि हमने आपको बताया कि चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही सम्बन्धों में कड़वाहट है। ऐसे में कोरोनो वायरस के कारण इन दोनों ही देशों के बीच कड़वाहट और भी बढ़ेगी। दरअसल, अमेरिका ने चीन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को चीन ने ठीक तरह से नियंत्रित नहीं किया है, और इसी कारण से संक्रमण वुहान के बाद पूरी दुनिया में फैल गया। अमेरिकी मीडिया के बाद अब ट्रम्प प्रशासन में भी इस बात पर चर्चा हो रही है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान में स्थित सीफूड मार्केट से नहीं फैला है बल्कि कोरोना वायरस चीन सरकार की वुहान स्थित एक लैब से फैला है क्योंकि इस लैब में जैविक हथियारों को लेकर रिसर्च का काम चल रहा है।
हालांकि, अभी भी यह विवाद का विषय है कि वुहान शहर से कोरोना वायरस संक्रमण कैसे फैला? चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, जबकि विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स आरोप लगा रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान स्थित एक वायरोलॉजी लैब से फैला है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन में मीडिया पर पाबन्दी और सेन्सरशिप है। ऐसे में चीन से सही जानकारी बाहर आना फ़िलहाल मुश्किल ही है। लेकिन कोरोना वायरस के कारण अमेरिका लगातार चीन के ख़िलाफ़ बयानबाजी करता रहेगा, जिससे वो इस महामारी के लिए चीन को पूरी दुनिया के सामने दोषी ठहरा सके। हालांकि, अमेरिकी की बयानबाजी के ख़िलाफ़ चीन भी अपना पक्ष रख रहा है, लेकिन फ़िलहाल तो पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी के लिए चीन को ही ज़िम्मेदार मान रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन यदि इस बीमारी को नहीं छिपाता और तुरन्त ही इससे निपटने की कोशिश करता, तो आज यह बीमारी पूरी दुनिया में हज़ारों लोगों की मौत का कारण नहीं बनती।