जानिए डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित रखने आरबीआई ने उठाए क्या बड़े क़दम?
Friday - March 20, 2020 3:56 pm ,
Category : WTN HINDI
रिज़र्व बैंक ने ग्राहकों के हित में जारी किए बड़े दिशा निर्देश
अब 2,000 रुपये से ज़्यादा के डिजिटल भुगतान के लिए ओटीपी होगा ज़रूरी
MARCH 20 (WTN) – यदि आप डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो आपके डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने नये निर्देश जारी किये हैं। रिज़र्व बैंक का दावा है कि नए निर्देशों का सही तरीक़े से पालने होने के बाद डिजिटल तरीक़े से भुगतान करने वाले यूज़र्स के अकाउंट पहले की तुलना में और भी ज़्यादा सुरक्षित होंगे। यह सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर रिज़र्व बैंक ने ऐसे कौन से निर्देश जारी किये हैं, जिनकी मदद से यूज़र्स के बैंक अकाउंट पहले की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे, तो आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, अब डिजिटल पेमेंट करने के लिए यूज़र्स को ओटीपी (OTP) का ही इस्तेमाल करना होगा। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के नये निर्देशों के मुताबिक़, 2,000 रूपये से ज़्यादा के भुगतान के लिए ग्राहक अब सत्यापन के लिए सिर्फ़ ओटीपी का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। ऐसा होने से देश में जितने भी पेमेंट एग्रीगेटर्स हैं, अब वे ऑनलाइन लेनदेन का भुगतान पूरा करने के लिए ग्राहकों से एटीएम पिन नहीं मांग सकेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक द्वारा इन दिशा निर्देशों को पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे कम्पनियों के लिए जारी किया गया है।
इस पूरी कवायद के पीछे रिज़र्व बैंक का उद्देश्य है कि ऐसा करने से डिजिटल पेमेंट करना ग्राहकों के लिए और भी ज़्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बन जाएगा। रिज़र्व बैंक का दावा है कि ऐसा करने से डिजिटल भुगतान में फ्रॉड के जोखिम को घटाने में मदद मिलेगी, और ऐसा करने से ग्राहकों के वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। दरअसल, अब जबकि पेमेंट करते समय पेमेंट करने वाले ग्राहक की एटीएम पिन एग्रीगेटर या पेमेंट गेटवे या फ़िर हैकर को ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो सकेगी, तो ऐसे में स्वाभाविक है कि ग्राहक का डिजिटल पेमेंट सुरक्षित रहेगा।
इतना ही नहीं, रिज़र्व बैंक ने ग्राहकों के हित में एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब एग्रीगेटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी रिफंड को भुगतान के मूल स्रोत में वापस जमा कराएं। ऐसा विशेष तौर पर जबकि कोई ग्राहक किसी वैकल्पिक स्रोत को क्रेडिट करने के लिए विशेष रूप से सहमति नहीं देता है। दरअसल, अभी कई ई-कॉमर्स कम्पनियां या तो अनिवार्य रूप से या फिर डिफॉल्ट तौर पर ग्राहकों के ई-वॉलेट में रिफंड को क्रेडिट करती हैं, और ऐसा होने से ग्राहकों को अपने बैंक खाते में पैसा वापस नहीं मिल पाता है। जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियां रिफंड को ग्राहक के बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड आदि में क्रेडिट नहीं करती हैं, जहां से मूल भुगतान किया जाता है। ऐसा ना होने से ग्राहक इस राशि का इस्तेमाल सिर्फ़ उस ई-कॉमर्स कम्पनी के प्लेटफॉर्म पर ही कर पाता है।
इतना ही नहीं, रिज़र्व बैंक ने पेमेंट एग्रीगेटर्स को मर्चेंट की पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए निर्देश दिये हैं। रिज़र्व बैंक की अधिसूचना के अनुसार, पेमेंट एग्रीगेटर मर्चेंट के बैकग्राउंड की जांच करेंगे जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे मर्चेंट का ग्राहकों को धोखा देने का तो कोई इरादा नहीं है। इतना ही नहीं, मर्चेंट की वेबसाइट पर रिटर्न और रिफंड की प्रोसेसिंग के लिए सेवा की शर्तों और समय सीमा का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना ज़रूरी होगा। कहा जा सकता है कि रिज़र्व बैंक के इन दिशा निर्देशों से ग्राहकों के बैंक अकाउंट अब पहले की तुलना में और भी ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे।
MARCH 20 (WTN) – यदि आप डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो आपके डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने नये निर्देश जारी किये हैं। रिज़र्व बैंक का दावा है कि नए निर्देशों का सही तरीक़े से पालने होने के बाद डिजिटल तरीक़े से भुगतान करने वाले यूज़र्स के अकाउंट पहले की तुलना में और भी ज़्यादा सुरक्षित होंगे। यह सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर रिज़र्व बैंक ने ऐसे कौन से निर्देश जारी किये हैं, जिनकी मदद से यूज़र्स के बैंक अकाउंट पहले की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे, तो आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, अब डिजिटल पेमेंट करने के लिए यूज़र्स को ओटीपी (OTP) का ही इस्तेमाल करना होगा। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के नये निर्देशों के मुताबिक़, 2,000 रूपये से ज़्यादा के भुगतान के लिए ग्राहक अब सत्यापन के लिए सिर्फ़ ओटीपी का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। ऐसा होने से देश में जितने भी पेमेंट एग्रीगेटर्स हैं, अब वे ऑनलाइन लेनदेन का भुगतान पूरा करने के लिए ग्राहकों से एटीएम पिन नहीं मांग सकेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक द्वारा इन दिशा निर्देशों को पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे कम्पनियों के लिए जारी किया गया है।
इस पूरी कवायद के पीछे रिज़र्व बैंक का उद्देश्य है कि ऐसा करने से डिजिटल पेमेंट करना ग्राहकों के लिए और भी ज़्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बन जाएगा। रिज़र्व बैंक का दावा है कि ऐसा करने से डिजिटल भुगतान में फ्रॉड के जोखिम को घटाने में मदद मिलेगी, और ऐसा करने से ग्राहकों के वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। दरअसल, अब जबकि पेमेंट करते समय पेमेंट करने वाले ग्राहक की एटीएम पिन एग्रीगेटर या पेमेंट गेटवे या फ़िर हैकर को ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो सकेगी, तो ऐसे में स्वाभाविक है कि ग्राहक का डिजिटल पेमेंट सुरक्षित रहेगा।
इतना ही नहीं, रिज़र्व बैंक ने ग्राहकों के हित में एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब एग्रीगेटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी रिफंड को भुगतान के मूल स्रोत में वापस जमा कराएं। ऐसा विशेष तौर पर जबकि कोई ग्राहक किसी वैकल्पिक स्रोत को क्रेडिट करने के लिए विशेष रूप से सहमति नहीं देता है। दरअसल, अभी कई ई-कॉमर्स कम्पनियां या तो अनिवार्य रूप से या फिर डिफॉल्ट तौर पर ग्राहकों के ई-वॉलेट में रिफंड को क्रेडिट करती हैं, और ऐसा होने से ग्राहकों को अपने बैंक खाते में पैसा वापस नहीं मिल पाता है। जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियां रिफंड को ग्राहक के बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड आदि में क्रेडिट नहीं करती हैं, जहां से मूल भुगतान किया जाता है। ऐसा ना होने से ग्राहक इस राशि का इस्तेमाल सिर्फ़ उस ई-कॉमर्स कम्पनी के प्लेटफॉर्म पर ही कर पाता है।
इतना ही नहीं, रिज़र्व बैंक ने पेमेंट एग्रीगेटर्स को मर्चेंट की पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए निर्देश दिये हैं। रिज़र्व बैंक की अधिसूचना के अनुसार, पेमेंट एग्रीगेटर मर्चेंट के बैकग्राउंड की जांच करेंगे जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे मर्चेंट का ग्राहकों को धोखा देने का तो कोई इरादा नहीं है। इतना ही नहीं, मर्चेंट की वेबसाइट पर रिटर्न और रिफंड की प्रोसेसिंग के लिए सेवा की शर्तों और समय सीमा का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना ज़रूरी होगा। कहा जा सकता है कि रिज़र्व बैंक के इन दिशा निर्देशों से ग्राहकों के बैंक अकाउंट अब पहले की तुलना में और भी ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे।