डरिये नहीं; इंसानी सम्पर्क से नहीं फैलता हंतावायरस
गिलहरियों और चूहों को खाने या उनके अपशिष्ट के सम्पर्क में आने से फैलता है हंतावायरस
MARCH 25 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना संक्रमण की बीमारी से पूरी दुनिया डरी हुई है। 190 से ज़्यादा देश इस समय कोरोना वायरस से ख़ुद को बचाने में लगे हुए हैं। इस लेख के लिखे जाने तक कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में 18,900 से ज़्यादा लोग मर चुके हैं। कोरोना वायरस के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में लॉक डाउन की स्थिति है। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में हज़ारों की तादाद में लोग संक्रमित हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस संक्रमण से निजात पाने की वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। अभी जबकि कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति मिली नहीं है कि चीन में एक नया वायरस परेशानी का कारण बनता जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के
Yunnan प्रांत में हंतावायरस से एक व्यक्ति संक्रमित पाया गया है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हंतावायरस एक पुराना वायरस है। बता दें कि साल 1990 की शुरुआत में सबसे पहले इस रहस्यमयी वायरस का पता चला था। उस समय अमेरिका के अरिजोना, कोलेरेडो, न्यू मैक्सिको और उटा में हंतावायरस के मामले दिखे थे। शुरुआत में इस वायरस को वैज्ञानिकों ने Sin Nombre वायरस नाम दिया था। बता दें यह वायरस हंतावायरस फैमिली का ही एक वायरस है। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ आमतौर पर rodent प्रजाति के जानवर खाने से हंतावायरस फैलता है।
जानकारों के मुताबिक़, हंतावायरस से संक्रमित होने के बाद के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह के होते हैं। इतना ही नहीं, अलग-अलग देशों में इस वायरस का नाम भी अलग -अलग है। जैसे अमेरिका में हंता वायरस को न्यू वर्ल्ड हंतावायरस कहा जाता है, जबकि यूरोप और एशिया के देशों में इसे ओल्ड वर्ल्ड हंतावायरस कहा जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में भी हंतावायरस के मामले आ चुके हैं। साल 2008 में तमिलनाडु के वेल्लूर में हंता वायरस से 28 लोग संक्रमित हुए थे हंतावायरस से संक्रमित लगभग सभी मरीज़ Irula जनजाति के थे, और इनका पेशा चूहे पकड़ना था। वहीं साल 2016 में मुम्बई में 12 साल का एक।बच्चा हंतावायरस बीमारी के अन्तिम चरण में पहुंच गया था।
जानकारी के लिए बता दें कि अलग-अलग जगहों पर इस वायरस का असर भी अलग होता है। बात करें अमेरिका की तो यहां पर हंतावायरस से संक्रमित मरीज़ Hantavirus Pulmonary Syndrome (HPS) का शिकार होते हैं। हंतावायरस से संक्रमित होने पर थकान, उल्टियां, बुख़ार और मांसपेशियों में दर्द होता है, लेकिन रोग बढ़ने पर इसके लक्षण गम्भीर होते जाते हैं। यदि शुरुआत में इसका इलाज मिल जाए तो भी हंता वायरस से संक्रमित होने के बाद इंसान के बचने की दर सिर्फ़ 38% है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों के मुताबिक़, हंतावायरस का इनक्यूबेशन पीरियड एक सप्ताह से लेकर आठ सप्ताह तक हो सकता है। वहीं यूरोप और एशियन देशों में इस बीमारी में मरीज Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS) का शिकार हो जाते हैं। दरअसल, संक्रमित चूहे या गिलहरी की पेशाब या लार के सम्पर्क में आने या उसके संक्रमित खून के इंसानी शरीर के किसी जख्मी हिस्से से सम्पर्क होने पर हंतावायरस का संक्रमण होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, हंतावायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता है बल्कि यह चूहों या गिलहरी आदि को खाने, या उनके मल-मूत्र या सलाइवा के संपर्क में आने से फैलता है। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, चूहों और गिलहरी आदि के काटने से भी हंतावायरस बीमारी हो सकती है। इतना ही नहीं, संक्रमित जीव के आसपास की हवा में भी हंतावायरस मौज़ूद रहते हैं, और इससे भी इंसान संक्रमित हो सकता है। सालों बाद भी इस वायरस की कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है। ऐसे में मरीज़ को यदि शुरूआती अवस्था में ही पहचान लिया जाए तो ICU में उसे कुछ दिन भर्ती कर ठीक किया जा सकता है। लेकिन यदि पीड़ित को समय पर इलाज़ न मिले तो उसकी मौत तक हो जाती है।