आर्थिक सुस्ती के बाद अब लॉक डाउन से लगेगा भारतीय अर्थव्यवस्था को 'बड़ा झटका'
लॉक डाउन से हो सकता है 9 लाख करोड़ का नुकसान
MARCH 15 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया इस समय मुसीबत का सामना कर रही है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से 19,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। दुनिया के 190 से ज़्यादा देशों में इस समय कोरोना वायरस संक्रमण फैल चुका है। जहां तक भारत की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत भी इस समय कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है। अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण भारत में 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से ज़्यादा लोग इससे संक्रमित बताए जाते हैं।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण इंसानी सम्पर्क से फैलता है, ऐसे में भारत सरकार ने 21 दिनों के लॉक डाउन का ऐलान किया है। जैसा कि आप समझ ही गए होंगे कि लॉक डाउन के दौरान आर्थिक उत्पादन ठप रहता है। स्वाभाविक है कि ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
इसी कड़ी में बार्कलेज (Barclays) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, लॉक डाउन से भारत को क़रीब 9 लाख करोड़ रुपयों का नुकसान हो सकता है। अनुमान के मुताबिक़ यह नुकसान भारत की जीडीपी के 4 प्रतिशत के बराबर है।
बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार, 21 दिन के लॉक डाउन के कारण भारत को क़रीब 6.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। लेकिन महाराष्ट्र समेत कई अन्य बड़े राज्य पहले से ही बंद हो गए हैं, इसलिए देश का आर्थिक नुकसान और भी ज़्यादा हो सकता है। वहीं आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए यदि सरकार राहत पैकेज देती है, तो ऎसा होने पर भारत सरकार का वित्तीय घाटा बढ़कर 5 प्रतिशत से ज़्यादा हो सकता है।
लॉक डाउन के बाद की स्थिति से निपटने के लिए मोदी सरकार जल्द ही राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक की 3 अप्रैल को होने वाली समीक्षा बैठक में ब्याज़ दरें घटाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कई बड़ेे ऐलान किए है, जिसमें लोगों को राहत मिल सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की डेडलाइन को बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया है। इसी तरह के कई अन्य फ़ैसले लोगों को राहत देने के लिए किए गए हैं।
स्वाभाविक है कि लॉक डाउन से तेज़ी से विकास करती भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है। पिछले 20 महीनों की आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास की रफ़्तार को रोक दिया था। वहीं अब लॉक डाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास की रफ़्तार पर लम्बा ब्रेक लग जाएगा। दरसअल, यही समय रबी की फसल कटाई का भी है। ऐसे में यदि रबी फसल की कटाई प्रभावित होती है, तो इससे किसानों के साथ-साथ अनाज व्यापारियों को भी नुकसान होगा। लेकिन यदि जान है तो ज़िन्दगी है। कोरोना वायरस संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए इंसानी सम्पर्क को ख़त्म करना काफ़ी ज़रूरी है। आशा है कि 21 दिनों के लॉक डाउन के बाद एक बार फिर से भारत में आर्थिक गतिविधियां ज़ोर पकड़ने लगेंगी।