कोरोना वायरस से लड़ने 'राम बाण' है 21 दिन का लॉक डाउन
कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ बहुत कारगर साबित होगा 21 दिन का लॉक डाउन
MARCH 26 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया इस समय परेशान है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में 21,296 लोग मारे जा चुके हैं। कोरोना वायरस महामारी का कहर भारत में भी है। अभी तक भारत में कोरोना वायरस से 12 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 600 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस के कारण संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि भारत में अभी तक कोरोना वायरस उस तेज़ी से नहीं फैल रहा है जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी। लेकिन बचाव में ही सावधानी है। इसी के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिन का लॉक डाउन लागू कर दिया है।
लेकिन आपके मन में यह सवाल तो उठ ही रहा होगा कि आख़िर प्रधानमंत्री मोदी ने 21 दिन के ही लॉक डाउन की घोषणा क्यों की? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक रिसर्च के मुताबिक़, COVID-19 से संक्रमित एक तिहाई लोगों में कोरोना वायरस का कोई लक्षण सामने नहीं आता है। ऐसे लोग अनजाने में सही संक्रमण फैलाते रहते हैं। वहीं डॉक्टर्स के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण 14 दिन तक सामने आ सकते हैं। ऐसे में जब लोग 21 दिन तक घरों में रहेंगे तो उनके संक्रमित होने के लक्षण सामने आने पर उन्हें तुरंत आइसोलेट किया जा सकता है।
यानी कि कोरोना वायरस से संक्रमित बिना लक्षणों वाला व्यक्ति 14 दिन तक किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। वहीं यदि कोरोना वायरस के लक्षण दिखते हैं तो संक्रमित मरीज़ को 14 दिन अकेले में रखने से उसके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में अगर 21 दिन तक लोग घरों में रहेंगे तो संक्रमित होने के कारण वो अन्य लोगों में संक्रमण नहीं फैला सकेंगे, साथ ही यदि कोई व्यक्ति इस दौरान संक्रमित होता है तो वो भी संक्रमण नहीं फैला पाएगा।
इतना ही नहीं, 21 दिन घर में रहने के दौरान यदि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण दिखते हैं, तो उसे आइसोलेट करके या क्वारंटीन करके उसका इलाज शुरू किया जा सकता है। इतना ही नहीं, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को ढूंढकर उन्हें क्वारंटीन करना भी इस दौरान आसान होगा। इटली समेत दुनिया के कई देशों ने लॉक डाउन करने में देरी की और इसी कारण से कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से फैलता गया।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और हांगकांग में किए गए कुछ रिसर्च काफ़ी चौकाने वाले है। रिसर्च के अनुसार, 23 जनवरी को वुहान के बंद होने से पहले वही लोग बीमारी फैलाने का कारण बने जिनमें कोरोना वायरस बीमारी के कोई भी लक्षण नहीं थे। और इसी कारण से लगभग 79 प्रतिशत लोग गम्भीर रूप से वायरस की चपेट में आ गए। ऐसे में भारत में 21 दिन के लॉक डाउन के कारण लोग घर में रहेंगे तो वे कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बचे रहेंगे। वहीं यदि किसी को कोरोना वायरस संक्रमण है तो उसके घर में रहने से संक्रमण नहीं फैल पाएगा।