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...तो क्या तापमान बढ़ने से ख़त्म हो जाएगा कोरोना वायरस संक्रमण का कहर?

Saturday - March 28, 2020 11:26 am , Category : WTN HINDI
कम तापमान वाले देशों में कोरोना वायरस का ज़्यादा असर
कम तापमान वाले देशों में कोरोना वायरस का ज़्यादा असर

एक रिसर्च का दावा; तापमान ज़्यादा होने पर कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा कम!

 

MARCH 28 (WTN) - पूरी मानव सभ्यता इस समय कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण 190 से ज़्यादा देश प्रभावित हो चुके हैं। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 27,365 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में इस समय कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की तादात एक लाख से ज़्यादा हो चुकी है। वहीं इटली में कोरोना वायरस के कारण 9,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

 

जहां तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत की बात है, तो भारत में कोरोना वायरस से 800 से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, और कोरोना वायरस के कारण 20 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि भारत की मोदी सरकार ने बड़ा क़दम उठाते हुए पूरे भारत में 21 दिन का लॉक डाउन घोषित कर दिया है। ऐसे में आशा की जा रही है कि इन 21 दिनों में संक्रमण की चैन टूट जाएगी। इन सबके बीच, आम जनता के दिल में यही सवाल है कि आख़िर कोरोना वायरस संक्रमण का कहर कब ख़त्म होगा।

 

जबकि पुरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में एक वैज्ञानिक रिसर्च ने लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के ख़ात्मे को लेकर एक आशा जगाई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक स्टडी के मुताबिक़, जहां पर गरमी बढ़ती है वहां पर कोरोना वायरस संक्रमण में कमी देखी जा सकती है। स्टडी के मुताबिक़, जिन देशों में तापमान कम रहा है वहां पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर ज़्यादा देखा गया है। लेकिन गरम मौसम वाले देशों पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर कम देखा गया है जबकि यह देश तुलनात्मक रूप से ग़रीब देश हैं।

 

जैसा कि आप जानते है कि इस बार भारत में मार्च में बारिश का 120 साल का रिकॉर्ड टूटा है। मौसम वैजानिकों के अनुसार, मार्च महीने में हुई यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई है। लेकिन एक से दो दिन में भारत में तापमान में वृद्धि होगी और 4 अप्रैल तक ही दिल्ली समेत पश्चिमी भारत में तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच जाएगा। वैसे कई डॉक्टर्स का मानना है कि गर्मी बढ़ने से हो सकता है कि कोरोना वायरस संक्रमण भारत में ख़त्म हो जाए।

 

दरअसल, जानकारों के मुताबिक़, दुनिया के कई देश जहां पर वार्षिक औसत तापमान बहुत ज़्यादा रहता है उन देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण तुलनात्मक रूप से उतनी तेज़ी से नहीं फैल पाया है जितने तेज़ी से कम तापमान वाले देशों में फैला है। जानकारी के लिए बता दें कि अफ्रीका के देश सूडान में औसत तापमान क़रीब 52 डिग्री होता है। इस गर्म देश में कोरोना वायरस संक्रमण के अभी तक 3 मामले सामने आए हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है वहीं पश्चिम एशिया के देश

ओमान में औसत तापमान तापमान 50 डिग्री के आसपास होता है। वहां पर ओमान में कोरोना वायरस संक्रमण के 109 मामले सामने आए हैं लेकिन मौत किसी की नहीं हुई। इसी तरह से इराक़, सऊदी अरब, मलेशिया समेत कुछ अन्य गर्म देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के तुलनात्मक रूप से कम मामले देखे गए हैं।

 

लेकिन जिन देशों में कोरोना वायरस बीमारी ने तांडव मचा दिया है, उन देशों में तापमान बेहद कम है। इटली जहां पर कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है वहां पर इस समय 14 डिग्री के क़रीब तापमान है। स्पेन में जहां 5,000 से ज़्यादा लोगों की मौत कोरोना वायरस से हो चुकी है,वहां पर इस समय तापमान 3 डिग्री पर आ चुका है। वहीं फ्रांस में इस समय तापमान क़रीब 

6 डिग्री के क़रीब है, और वहां पर 1,900 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान की बात करें तो वहां पर तापमान 14 डिग्री के आसपास है, और वहां पर 2,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

 

अब बात करते हैं चीन की, जहां से कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में फैला है। तो चीन में इस समय तापमान 13 डिग्री के आसपास है और चीन में अभी तक कोरोना वायरस के कारण 3,200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अमेरिका जहां पर इस समय कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले आ चुके हैं वहां पर इस समय 12 डिग्री के आसपास तापमान है।

 

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में इस समय औसत तापमान 28 डिग्री के आसपास है। ऐसे में भारत की जनसंख्या के हिसाब से कोरोना वायरस संक्रमण काफ़ी हद तक नियंत्रित है। आशा की जा रही है कि भारत में जल्द ही तापमान में वृद्धि हो और इसके असर से कोरोना वायरस संक्रमण कम और ख़त्म हो। वैसे यह सिर्फ़ अनुमान है कि ज़्यादा तापमान होने पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर कम हो जाता है। अब देखना होगा कि भारत के मामले में यह कितना सही साबित हो पाता है?