अपनी गलतियों का खामियाजा भुगत रहा है इटली!
इटली में नहीं सुधर रहे हालात, कोरोना वायरस के कारण अभी तक 10,779 लोगों की मौत
MARCH 30 (WTN) - जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय मानव सभ्यता कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ एक बड़ी जंग लड़ रही है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कारण अभी तक 33,983 लोगों की जान जा चुकी है। 190 से ज़्यादा देश इस समय कोरोना वायरस संक्रमण से अपने नागरिकों को बचाने में लगे हुए हैं। चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण दुनिया के तमाम विकसित देशों के लिए एक चुनौती बन गया है। जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनिया के विकसित देशों में शुमार इटली में सबसे ज़्यादा 10,779 लोगों की मौत अभी तक हो चुकी है।
लेकिन इस समय लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर इटली में कोरोना वायरस के कारण 10,779 लोगों की मौत कैसे हो गई ? जबकि इटली स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में दुनिया के सबसे विकसित देशों में आता है। इटली में अभी भी कोरोना वायरस के कारण हर रोज़ 700 से ज़्यादा लोगों की जान जा रही है। दरअसल, इटली में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो रही इतनी मौतों के पीछे एक नहीं कई कारण और गलतियां हैं। आइये आपको बताते हैं कि वो कौन-कौन से कारण और गलतियां हैं जिनके कारण इटली में कोरोना वायरस के कारण इतने लोगों की जान चली गई।
वैसे तो कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हर उम्र के लोग संक्रमित हो रहे हैं। लेकिन बुज़ुर्गों पर कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा सबसे ज़्यादा है। एक रिसर्च के मुताबिक़, पूरी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मरने वाले लोगों में बुज़ुर्गों की तादाद सबसे ज़्यादा है। जानकारी के लिए बता दें कि 65 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के बाद मौत का ख़तरा सबसे ज़्यादा है। और इसका कारण है बुज़ुर्गों की कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता।
दरअसल, जनसंख्या में प्रतिशत के हिसाब से जापान के बाद सबसे ज़्यादा बुज़ुर्गों की आबादी इटली में है। इटली की कुल जनसंख्या के 23 प्रतिशत लोग 65 या 65 साल से ज़्यादा उम्र के हैं। इटली में 65 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों की जनसंख्या क़रीब एक करोड़ 76 लाख है। ऐसे में इटली में बड़ी संख्या में बुज़ुर्गों की मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हो गई। आंकड़ों के अनुसार, इटली में ज़्यादातर ऐसे लोगों की मौत हुई है जिसकी उम्र 78 साल से ज़्यादा रही है। हालांकि, कई बुज़ुर्ग कई दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद ठीक होकर घर वापस भी आए हैं।
वहीं चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद तुरन्त ही पूरे शहर को लॉकडाउन कर दिया गया था। लेकिन इटली ऐसा करने से चूक गया। इटली की सरकार ने काफी समय बाद शहरों को लॉकडाउन करने का फ़ैसला लिया। वहीं इटली में शुरू में कई लोगों ने लॉकडाउन का काफ़ी विरोध तक किया था। बस इन्हीं गलतियों के कारण इटली में कोरोना वायरस संक्रमण इतने तेज़ी से फैला की दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।
किताबों के अनुसार तो इटली की स्वास्थ्य सुविधाएं विश्व में दूसरे नंबर पर हैं। लेकिन ज़मीनी सच यह है कि कोरोना वायरस को लेकर इटली में काफ़ी कम टेस्ट हो रहे हैं।
इटली के उत्तरी शहर लोमबार्डी, जहां पर कोरोना वायरस संक्रमण सबसे ज़्यादा फैला है, वहां पर एक दिन में सिर्फ़ 5 हज़ार लोगों के टेस्ट हो रहे हैं। वहीं इटली में अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्सेस और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है, साथ ही कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिये संसाधनों की कमी भी हो रही है।
वहीं इटली में कोरोना वायरस संक्रमण के इतना ज़्यादा फैलने का एक कारण है संक्रमित युवाओं का बुज़ुर्गों के सम्पर्क में आना। काफ़ी समय तक लोमबार्डी शहर में वुहान से लोग आते रहे और इस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण इटली के युवाओं में फैलता रहा। यही युवा बुज़ुर्गों के सम्पर्क में आते गए और संक्रमण फैलता चला गया। दरअसल, कई ग़लतियों के कारण इटली में कोरोना वायरस संक्रमण दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान ले चुका है। इटली सरकार की तरफ से कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए काफी उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी तरह की कोई भी सफलता हासिल होती फ़िलहाल तो नहीं दिख रही ह