चीन की ग़लती के कारण पूरी दुनिया में 1.1 करोड़ लोग होंगे ग़रीब!
कोरोना वायरस पर उल्टी पड़ी चीन की चाल; आर्थिक विकास दर सिर्फ़ 2.3 प्रतिशत रहने का अनुमान
MARCH 31 (WTN) - चीन की वामपंथी सरकार की गलती, लापरवाही और साज़िश का खामियाजा आज पूरी दुनिया भुगत रही है। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी 190 से ज़्यादा देशों में फैल चुकी है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया में 37,820 लोगों की मौत हो चुकी है। यूरोप के विकसित देश इटली में तो कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक 11,591 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1,64,253 हो गई है।
स्वाभाविक है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है। ऐसे में वर्ल्ड बैंक ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस साल चीन और पूर्वी एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में आर्थिक विकास की रफ़्तार बहुत धीमी रहने वाली है। और ऐसा होने पर इस क्षेत्र के करीब 1.1 करोड़ लोग गरीब हो जाएंगे। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, पूूर्वी एशिया में इस साल आर्थिक विकास की दर सिर्फ 2.1 प्रतिशत ही रह सकती है, जो कि साल 2019 में 5.8 प्रतिशत थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक का यह अनुमान पहले के उस अनुमान के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि इस साल आर्थिक विकास दर पर्याप्त रहेगी और क़रीब 3.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाएंगे। साफ़ है कि आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगने से GDP ग्रोथ रेट पर बुरा असर पड़ रहा है। जहां तक बाहर की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए भारत में 21 दिन का लॉकडाउन है। और अनुमान है कि लॉकडाउन के कारण भारत सरकार को क़रीब 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
बात करें चीन की, तो चीन को भी कोरोना वायरस संक्रमण संकट के कारण बड़ा आर्थिक नुकसान होने जा रहा है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण चीन में क़रीब 2 महीने तक आर्थिक उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में चीन की विकास दर भी पिछले साल की तुलना में बहुत कम रहने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन की विकास दर 6.1 प्रतिशत से घटकर इस साल सिर्फ़ 2.3 प्रतिशत ही रह जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण एक विश्वव्यापी संकट है, लेकिन इसके कारण चीन समेत पूर्वी एशिया के कई देशों में तेज़ी से ग़रीबी में वृद्धि होगी। कोरोना वायरस संकट के कारण पूर्वी एशिया में 1.1 करोड़ लोगों के ग़रीब होने की आशंका है। इतना ही नहीं दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति होने के कारण उन देशों की भी आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इधर, भारत के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की आर्थिक विकास दर सिर्फ़ 2.5 प्रतिशत के आसपास ही रह सकती है। साफ़ ज़ाहिर है कि चीन की वामपंथी सरकार की गलती, लापरवाही और साज़िश का नुकसान ख़ुद चीन की जनता को और पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।