प्रधानमंत्री मोदी की 'इस योजना' से किसानों को मिलेंगी कई सुविधाएं
मोदी सरकार के इस कदम से किसानों को खेती से संबंधित योजनाओं का मिलेगा लाभ
APRIL 01 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है। देश की क़रीब 70 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती के काम से जुड़ी हुई है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में किसानी सबसे बड़ा व्यवसाय है। आज़ादी के बाद से ही किसान विधानसभा और लोकसभा चुनावों के परिणाम की दशा और दिशा तय करते आए हैं। लेकिन देखा गया है कि आज भी करोड़ों किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल है। ख़राब मौसम की मार और क़र्ज़ समेत कई परेशानियों के कारण भारतीय किसान अभी तक आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हो सका है।
लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार किसानों के हित के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। माना जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार की यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार किसानों के लिए यूनिक फार्मर आईडी यानी पहचान पत्र बनाने की तैयारी कर रही है। क्या है यह योजना और इससे किसानों को क्या लाभ होगा? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, पीएम-किसान सम्मान निधि स्कीम और अन्य योजनाओं के डेटा को राज्यों द्वारा बनाए जा रहे भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस से जोड़ने की केन्द्र सरकार की योजना है। इसी डेटाबेस के आधार पर किसानों का विशिष्ट किसान पहचान पत्र बनेगा। दावा किया जा रहा है कि किसान पहचान पत्र बनने के बाद किसानों तक खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं को पहुंचाना आसान हो जाएगा। और वे आसानी से खेती से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में क़रीब 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं। जिनमें से 12 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं। जानकारी के लिए बता दें कि यह वो किसान होते हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन होती है। लेकिन कौन व्यक्ति किसान है और कौन नहीं? इसके लिए तकनीकी तौर पर एक सरकारी पैमाना होता है। तकनीकी तौर पर किसान कहलाने के लिए इस पैरामीटर पर खरे उतरने वाले ही किसान1 कहलाते हैं और खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
दरसअल, राष्ट्रीय किसान नीति-2007 के अनुसार 'किसान' वो है जो उगाई गई फसलों की आर्थिक या आजीविका क्रियाकलाप में सक्रिय रूप से शामिल होता है और अन्य प्राथमिक कृषि उत्पादों को उगाने वाला होता है। जो व्यक्ति खेती से जुड़े हैं और इस पैमाने को पूरा करते हैं, वही लोग सरकार के रिकॉर्ड में किसान माने जाते हैं, और इन्ही लोगों को किसानी से संबंधित योजनाओं का लाभ मिलता है।
इस योजना के तहत केन्द्र सरकार राज्यों के परामर्श से एक संयुक्त किसान डेटाबेस बनाने की प्रक्रिया में है। इसके तहत पहले चरण में पीएम-किसान योजना के तहत रजिस्टर्ड क़रीब 10 करोड़ किसानों को इसमें कवर किया जाएगा। बता दें कि केन्द्र सरकार के पास क़रीब 10 करोड़ किसान परिवारों की आधार कार्ड की जानकारी, उनके बैंक अकाउंट नंबर और उनके रेवेन्यू रिकॉर्ड की जानकारी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत एकत्र हो चुकी है। इस डेटाबेस को मिलाकर यदि पहचान पत्र बनाने की कल्पना यदि साकार होती है तो किसानों को किसानी से संबंधित योजनाओं का लाभ काफ़ी आसानी से मिल पाएगा।