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अपने नागरिकों की समझदारी के दम पर कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है स्वीडन

Friday - April 3, 2020 5:44 pm , Category : WTN HINDI
स्वीडन में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद भी लागू नहीं हुआ है लॉकडाउन
स्वीडन में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद भी लागू नहीं हुआ है लॉकडाउन

स्वीडन में लॉकडाउन की बजाय 'इस तरह' से कोरोना वायरस को दी जा रही है मात


APRIL 03 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण से पूरी दुनिया डरी हुई है। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी 200 से ज़्यादा देशों में फैल गई है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 54,207 लोगों की मौत हो चुकी है। पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध इटली में अभी तक कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा 10,935 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण सबसे ज़्यादा 2,45,380 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

 

कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन किया गया है। लेकिन यूरोप के देश स्वीडन में स्थिति कुछ अलग है। दरअसल, स्वीडन में अभी भी लोग आराम से सामान्‍य तरीक़े से रह रहे हैं। यानी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर जो हड़कम्प की स्थिति बनी हुई है, उससे अलग स्वीडन में लोग

अभी भी बिना फेस मास्‍क लगाए और बिना ग्‍लव्‍स पहने सार्वजनिक जगहों पर घूम रहे हैं। ऐसा नहीं है कि स्वीडन में कोरोना वायरस संक्रमण नहीं फैला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन में कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 5,568 लोग संक्रमित हो चुके हैं, और कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 308 लोगों की मौत हो चुकी है।

 

दरअसल, स्‍वीडन में आइसोलेशन की अपनी अलग ही व्‍यवस्‍था है। शायद आपको जानकर आश्चर्य होगा कि स्‍वीडन में आधे से ज़्यादा घर सिंगल रूम अपार्टमेंट हैं। साफ़ ज़ाहिर है कि स्वीडन के लोग अधिकतर अपना समय अपने घर में ही अकेले में बिताना पसंद करते हैं। स्वीडन के लोग दुनिया की दूसरी संस्‍कृतियों की तरह एकदूसरे से बहुत मिलना-जुलना पसंद नहीं करते हैं। यही उन कारणों में से एक कारण है कि स्वीडन में लॉकडाउन नहीं किया गया है।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन में अधिकांश बच्चे 18 साल की उम्र के बाद अपने माता-पिता या पेरेंट्स से अलग रहने लगते हैं। साथ ही, यहां के लोग अन्य देशों के लोगों की तरह ज़्यादा सामाजिक नहीं होते हैं। इसलिए ख़ुद से ही अलग-थलग रहना इन लोगों की आदत में शुमार है। खाली समय में स्वीडन के लोग बाहर जाने और अन्य लोगों से मिलने के बजाय अपने घर में ही रहकर कुछ काम करना ज़्यादा पसन्द करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीडन के लोगों का रहने का यह तरीक़ा कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए काफ़ी है।


वहीं, स्वीडन के लोगों का व्यवहार सार्वजनिक जगहों पर काफी संयमित और अनुशासन से भरा होता है। स्वीडन में लोग सार्वजनिक वाहनों में एकदूसरे के ज़्यादा पास बैठना और सह यात्रियों से ज़्यादा बात करना पसन्द नहीं करते हैं। दुकानों और होटल्स में भी स्वीडन के लोग हमेशा से सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों को अपनाते आए हैं।

 

जानकारी के लिए बता दें कि स्‍वीडन यूरोपीय संघ की सबसे एडवांस डिजिटल इकोनॉमी मानी जाती है। स्‍वीडन में दो तिहाई लोग हमेशा घर से ही ऑनलाइन काम करते हैं। स्वीडन में इंटरनेट स्पीड काफ़ी अच्छी है। और इसी कारण से यहां पर पेशेवर लोगों को घर से काम करने में किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होती है। स्वीडन में लोग सामान्य सिरदर्द और सामान्य बीमारी पर घर से ही काम करते हैं। ऐसे में अगर किसी को कोरोना वायरस के मामूली लक्षण भी होंगे, तो वो व्यक्ति वायरस को आगे नहीं फैलाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन में मामूली खांसी-जुकाम पर भी बिना मांगे छुट्टी दे दी जाती है। और यहां पर दवाई खाकर कोई भी ऑफिस में काम नहीं कर सकता है।

 

जैसा कि हमने आपको बताया कि कोरोना वायरस के कारण स्वीडन में अभी तक लॉकडाउन नहीं किया गया है। हालांकि, स्‍वीडन की सरकार द्वारा कोरोना वाायरस को ज़्यादा सीरियस नहीं लेने पर सरकार की आलोचना की जा रही है। इधर, स्वीडन की सरकार ने साफ कर दिया है कि वे वायरस को धीमी गति से बढ़ने देना चाहते हैं, जिसे नियंत्रित तरीके से खत्‍म कर दिया जाएगा। वैसे स्‍वीडन में बड़े कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है और यूनिवर्सिटीज बंद हो गई हैं। ख़ैर, अब देखना होगा कि स्वीडन बिना लॉकडाउन किये अपने नागरिकों के दम पर कोरोना वायरस ख़िलाफ़ जंग कैसे जीत पाता है?