कोरोना वायरस पर कितने सच हैं चीन सरकार के दावे?
चीन ने कोरोना वायरस के रूप में जैविक हथियार का आरोपों का किया खण्डन
APRIL 07 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण इस समय मानव जाति के अस्तित्व पर सबसे बड़ा संकट है। क़रीब 200 देशों में कोरोना वायरस संक्रमण फैल चुका है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 74,767 लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी का सटीक इलाज नहीं होने के कारण पूरी दुनिया में हर रोज़ हज़ारों की तादात में लोग इन बीमारी से संक्रमित हो रहे हैं।
इस सबके बीच, पूरी दुनिया में यह बहस काफ़ी दिनों से जारी है कि चीन सरकार का यह दावा कितना सही है कि कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैली है। कई विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कोरोना वायरस दरअसल एक जैविक हथियार है। अमेरिका के नेता समय-समय चीन पर इस बात का आरोप लगाते रहे हैं कि कोरोना वायरस एक जैविक हथियार है और इसे वुहान स्थित एक वायरोलॉजी लैब में बनाया गया है।
इतना ही नहीं, समय-समय पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोरोना वायरस को चाइनीस वायरस भी कह चुके हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ़, अमेरिका के विख्यात माइक्रोबायोलॉजिस्ट रिचर्ड ब्राइट कोरोना वायरस को एक जैविक हथियार मानने से इनकार कर चुके हैं। इधर, अमेरिका द्वारा बार-बार आरोप लगाए जाने के बाद चीन ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ महीने पहले वुहान में हुए वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में आए अमेरिका के सैनिकों ने वुहान में कोरोना वायरस को प्लांट किया था।
वैसे चीनी सरकार हमेशा से यह कहती रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से पैदा हुआ है। इधर, WHO ( World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चीन सरकार के इस दावे को मानता है कि कोरोना वायरस संक्रमण सीफूड मार्केट से ही उपजा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की जिस लैब में जैविक हथियार तैयार किए जाने का दावा किया जा रहा है उसका नाम वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) है। यह लैब चीन के इंस्टिट्यूट एकेडमी ऑफ साइंस के आधीन है। पहले इस लैब का नाम वुहान माइक्रो बायोलॉजी लेबरोटरी था। इस लैब की स्थापना साल 1956 में की गई थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन की ये लैब कई रिसर्च का हिस्सा रही है। चीन सरकार का दावा है कि इस लैब में इस तरह के रिसर्च का मुख्य उद्देश्य SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) बीमारी की दवा और भविष्य में उससे लड़ने के उपाय तलाशना था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2005 में चीन में कुछ शोधकर्ताओं ने SARS कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर एक रिसर्च पेपर पब्लिश किया था, और इन शोधकर्ताओं में वुहान स्थित वायरोलॉजी लैब के शोधकर्ता भी शामिल थे। इसी रिसर्च में खुलासा किया गया था कि चीन के horseshoe चमगादड़ के शरीर में प्राकृतिक रूप से सार्स-कोरोना वायरस पाया जाता है।
वहीं, साल 2015 में इस इंस्टिट्यूट ने एक रिसर्च पेपर पब्लिश किया था। इस रिसर्च पेपर में दावा किया गया था कि चमगादड़ में मौजूद कोरोना वायरस इंसानों में ट्रांसफर हो सकता है। इतना ही नहीं, साल 2017 में इस इंस्टिट्यूट ने एक चेतावनी भी जारी की थी कि युनान की गुफाओं में पाए जाने वाले चमगादड़ों से कोरोना वायरस इंसानों में ट्रांसफर भी हो सकता है। यानी कि चीन सरकार का दावा है कि वुहान स्थित वायरोलॉजी लैब में SARS और कई अन्य बीमारियों के वायरस पर शोध होता था, न कि वहां पर जैविक हथियार बनाये जाते थे।
चीन सरकार का कहना है कि चमगादड़ों पर लंबे समय से चल रहे शोध के कारण ही वुहान स्थित इस इंस्टिट्यूट पर आरोप लगाया जा रहा है कि यहां पर जैविक हथियारों पर काम चल रहा था, और कोरोना वायरस संक्रमण इसी इंस्टिट्यूट से उपजा और फैला है। हालांकि चीन कोरोना वायरस संक्रमण के उपजने और फैलने के बारे में कितनी भी सफाई से। लेकिन चीन ने कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की घटना को जिस तरह से छुपाकर रखा, उससे चीन सरकार के दावों और इरादों पर पूरी दुनिया का शंका करना स्वाभाविक है.।