तो क्या एक आतंकी रहे हैं WHO के वर्तमान प्रमुख?
क्या चीन को बचाने वामपंथी चाल चल गए WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस
APRIL 07 ( WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण जिस तरह से पूरी दुनिया में फैल चुका है और हज़ारों लोगों की जान ले चुका है। ऐसे में चीन की वामपंथी सरकार पर लापरवाही का आरोप लग रहा है। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण संकट के समय WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके प्रमुख की कार्यप्रणाली पर दुनिया के कई देश सवाल खड़े कर रहे हैं। 7 अप्रैल 1948 को अस्तित्व में आए इस संगठन और उसके वर्तमान प्रमुख टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस की भूमिका पर कर तरह के गम्भीर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि इस संगठन ने कोरोना वायरस संकट के समय चीन को बचाने का काम किया। इतना ही नहीं, आरोप तक यह भी लग रहे हैं कि इस संगठन के वर्तमान प्रमुख का एक आतंकी संगठन से संबंध रहा है।
जी हां, यह सब पढ़कर आप चौक ज़रूर गए होंगे। दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि चीन की वामपंथी सरकार द्वारा सतर्कता नहीं बरतने और सच्चाई छुपाने के कारण कोरोना वायरस संक्रमण क़रीन 200 देशों में फैल गया है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी WHO प्रमुख टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस ने चीन का बचाव किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WHO प्रमुख टेड्रोस एक समय एक वामपंथी आतंकी संगठन के पदाधिकारी रहे हैं।
आरोप है कि वामपंथी विचारधारा समर्थक होने के कारण ही ट्रेडोस ने कोरोना वायरस संक्रमण पर हर समय चीन का बचाव किया है। टेड्रोस के अतीत के बारे में पता करने पर जानकारी मिलती है कि वह वामपंथी विचारधारा वाले नेता रहे हैं। इतना ही नहीं, एक विदेशी पोर्टल ने तो टेड्रोस की पुरानी तस्वीरों के साथ एक रिपोर्ट छापी है, और उस रिपोर्ट का उसका शीर्षक है 'डब्ल्यूएचओ का प्रमुख एक इथोपियन आतंकी है'। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेड्रोस इथोपिया के एक आतंकी संगठन टिगरे पीपल्स लिबरेशन फ्रंट/आर्मी के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टिगरे पीपल्स लिबरेशन आर्मी इथोपिया की एक राजनीतिक पार्टी मानी जाती है। लेकिन 1990 के दशक में अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया था। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, यह पार्टी एक लम्बे संघर्ष के बाद इथोपिया की सत्ता में आई थी, और 90 के दशक की शुरूआत में इसे ग्लोबल टेररिज़्म डेटाबेस में सूचीबद्ध किया गया था। इस पार्टी से जुड़े होने के कारण ही टेड्रोस को आतंकी कहा जा रहा है।
बता दें कि मानवाधिकार हनन समेत कई अन्य आरोप ट्रेडोस की पार्टी TPLA पर लग चुके हैं। एक रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि इस संगठन के प्रमुख सदस्यों में से एक टेड्रोस के इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए वहां पर अमहारा प्रजाति के लोगों की जन्मदर काफी कम हुई। इतना ही नहीं, इथोपिया की जनगणना के दौरान इस प्रजाति के 20 लाख सदस्य गायब कर दिए गए।
इतना ही नहीं, साल 2000 और 2010 के दौरान इथोपिया में कॉलरा महामारी के समय भी टेड्रोस पर नज़रअंदाज़ी बरतने के गम्भीर आरोप लगे हैं। वहीं, इथोपिया के विदेश मंत्री रहते हुए टेड्रोस पर एक ब्रिटिश नागरिक को जबरन प्रताड़ित करने के आरोप भी लगे थे। इसके अलावा, नस्लीय हिंसा को लेकर मानवाधिकार वॉच ने इथोपिया सरकार पर 400 मौतों, 70 हज़ार प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और 15 हज़ार लोगों के विस्थापन का ज़िम्मेदार माना था।
इधर, कोरोना वायरस संक्रमण के दुनिया भर में फैल जाने के पीछे चीन को ज़िम्मेदार ठहराए जाने के मामले में भी टेड्रोस की भूमिका संदिग्ध, एकतरफा और विवादास्पद रही है। कोरोना वायरस जैसी महामारी पर भी वामपंथी विचारधारा वाले टेड्रोस ने चीन का हर बार पक्ष लिया और चीन को दुनिया के संकट के लिए ज़िम्मेदार मानने से इनकार किया है। दरअसल, एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इथोपिया में भारी निवेश किया है, इसलिए टेड्रोस ने चीन द्वारा कोरोना वायरस महामारी की जानकारी छुपाने के बाद भी चीन का पूरी तरह से बचाव किया।
दुनिया के कई देशों का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर यदि WHO सही समय पर सही निर्देशों और गाइडलाइन्स को जारी करता, तो इस त्रासदी को कम किया जा सकता था। WHO और उसके प्रमुख पर यह आरोप लगातार लग रहे हैं कि दोनों ही अपनी भूमिका सही से तरीक़े से नहीं निभा पाए हैं।
बता दें कि टेड्रोस लगातार अमेरिका के निशाने पर रहे हैं। अब अमेरिका के अलावा दुनिया के अन्य कई देश भी टेड्रोस की कार्यप्रणाली से नाराज़ हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस संकट से निजात मिलने के बाद WHO में बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है।