अध्ययन का दावा: कोरोना वायरस संक्रमण से कम संक्रमित हो रहे हैं बच्चे
बच्चों में है कोरोना वायरस संक्रमण से बचने की ज़्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता
APRIL 09 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस महामारी इस समय मानव प्रजाति के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी 200 से ज़्यादा देशों में फैल गई है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 88,505 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इटली में अभी तक सबसे ज़्यादा 17,669 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में सबसे ज़्यादा 4,35,128 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।
इस सबके बीच, पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण पर कई तरह के शोध और अध्ययन हो रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण से महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ज़्यादा मौत हो रही है। वहीं एक नए शोध के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण से बच्चे कम प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिका में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण से बच्चे कम प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना वायरस और बच्चों से संबंधित यह ख़बर सबसे पहले चीन से आई थी। जैसा कि आप जानते हैं कि अब कोरोना वायरस महामारी का वैश्विक केंद्र अब अमेरिका बन चुका है। लेकिन अमेरिका में भी कोरोना वायरस संक्रमण का असर बच्चों में कम देखा जा रहा है।
जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर बच्चे कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो भी रहे हैं, तो वे मामूली इलाज से ठीक हो जा रहे हैं। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल के वैज्ञानिकों का कहना है कि वयस्कों की तुलना में 18 साल से कम उम्र के किशोरों और बच्चों में कोरोना वायरस संक्रमण होने के बाद भी उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं उभर पा रहे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद इन्हें अस्पताल में एडमिट कराने की ज़रूरत भी बेहद कम पड़ रही है। वहीं, सिर्फ़ ऐसे ही बच्चों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ रहा है जिन्हें पहले से ही कोई गंभीर रोग है।
हालांकि यह सारी बातें छोटे सैंपल साइज से एकत्रित किए गए डेटा के आधार पर कही जा रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल ने कुल 2,500 बच्चों के आंकड़े एकत्रित किए थे। इससे पहले चीन में हुए अध्ययन में 2,100 बच्चों को शामिल किया गया था। इन अध्ययनों के अनुसार, इन बच्चों में सिर्फ़ 10 प्रतिशत में कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखाई दिए। वहीं
90 प्रतिशत बच्चों में कोरोना वायरस संक्रमण के बेहद हल्के लक्षण दिखाई दिए हैं।
वैसे सामान्य तौर पर देखा जाता है कि फ्लू या इन्फ्लूएंजा की चपेट में बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा आते हैं। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण 18 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों पर ज़्यादा असर दिखा रहा है। अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण के ख़तरनाक असर को उम्र के बढ़ते क्रम के रूप में देखा जा सकता है। वहीं एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों और व्यस्कों के इम्यूनिटी सिस्टम में महत्वपूर्ण अंतर होता है। दरअसल, बच्चों का इम्यूनिटी सिस्टम अपरिपक्व होता है और यह अतिप्रतिक्रिया दे सकता है।
शायद यही कारण है कि बच्चों को बुखार की शिकायत ज़्यादा हो जाती है। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। और शायद इसी कारण से बच्चों में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण ज़्यादा नहीं उभर रहे हैं। माना जाता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के संदर्भ में भी इम्यूसिटी सिस्टम अतिप्रतिक्रिया देता है।
वहीं चीन में नवजात बच्चों को लेकर भी दिलचस्प मामला सामने आया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वुहान में कोरोना वायरस से संक्रमित दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। लेकिन जब नवजातों का टेस्ट किया गया, तो दोनों ही बच्चे निगेटिव आए। डॉक्टर्स का मानना था कि शायद बच्चों ने गर्भ में ही कोरोना वायरस के लिए एंटी बॉडी जेनेरेट कर ली थी। वहीं वुहान में ही नौ गर्भवती महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण मां से बच्चे में ट्रांसफर नहीं होता है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह सभी शुरुआती अध्ययन हैं, और इनके आधार पर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है।