BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

कोरोना वायरस संकट के कारण महाआर्थिक मंदी की आशंका

Friday - April 10, 2020 2:51 pm , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस के कारण कई देशों में है लॉकडाउन
कोरोना वायरस के कारण कई देशों में है लॉकडाउन

IMF की चेतावनी; बड़ी आर्थिक गिरावट के लिए तैयार रहे दुनिया

APRIL10 (WTN) - चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती और लापरवाही की सज़ा इस समय पूरी दुनिया भुगत रही है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी से 200 से ज़्यादा देशों के लोग प्रभावित हो चुके हैं। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में 95,766 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। ज़ाहिर है कि लॉकडाउन के कारण कई देशों में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लग गई है।

कोरोना वायरस संक्रमण की भयावहता को देखते हुए आशंका है कि कम से कम दो महीनों तक अभी भी आर्थिक गतिविधियां तेज़ी नहीं पकड़ पाएंगी। यदि ऐसा ही रहा, तो पूरी दुनिया को 1930 के दशक की महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महामंदी को दुनिया की अर्थव्यवस्था के सबसे बुरे दौर के रूप में पहचान जाता है। महामंदी की शुरुआत साल 1929 में अमेरिका में वॉलस्ट्रीट पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के ‘ढहने’ से हुई थी। पूरी दुनिया को बुरी तरह से प्रभावित करने वाली महामंदी का दौर क़रीब दस साल चला था।

दरअसल, IMF (International Monetary Fund) यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष का मानना है कि 2020 का साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी ख़राब और सबसे बड़ा चुनौती वाला रहने वाला है। IMF की निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा को आशंका है कि कोरोना वायरस संक्रमण संकट के कारण साल 2020 में दुनिया के 170 से ज़्यादा देशों में प्रति व्यक्ति आय घटेगी।

चीन की वामपंथी सरकार यदि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की जानकारी नहीं छिपाती, तो पूरी दुनिया आज संकट में नहीं पड़ती। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती और लापरवाही के कारण दुनिया इस समय ऐेसे संकट से जूझ रही है जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। कोरोना वायरस संक्रमण महामारी ने कई देशों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को काफ़ी तेज़ी से ख़राब किया है। देखते ही दिखते कोरोना वायरस संक्रमण से हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है। वहीं लॉकडाउन के कारण अरबों लोग प्रभावित हुए हैं।

आशंका है कि लॉकडाउन के कारण साल 2020 में वैश्विक वृद्धि दर में बड़ी गिरावट आएगी। IMF प्रमुख के मुताबिक़, "सिर्फ़ तीन महीने पहले हमारा अनुमान था कि साल 2020 में हमारे 160 सदस्य देशों में प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी। लेकिन अब सब कुछ बदल गया है, और अब 170 से ज़्यादा देशों में प्रति व्यक्ति आय घटने की आशंका है।"

लॉकडाउन के कारण ख़ासतौर से खुदरा, होटल, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और एशिया के एक बड़े हिस्से के उभरते बाज़ारों और कम आय वाले देशों में अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम ज़्यादा है। जहां पर स्वास्थ्य प्रणाली कमज़ोर है, या फिर घनी आबादी ज़्यादा है, वहां पर कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का सबसे ज़्यादा असर हो रहा है।

ज़ाहिर है कि लॉकडाउन के कारण हो रही संसाधनों की कमी से सबसे पहले मांग-आपूर्ति का संतुलन कई देशों में बिगड़ेगा। इसके अलावा कई देशों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी। इसके अलावा ग़रीब और विकासशील देशों पर क़र्ज़ का बोझ बढ़ेगा। IMF के अनुसार, पिछले दो महीने के दौरान उभरते बाज़ारों से पोर्टफोलियो निकासी क़रीब 100 अरब डॉलर की रही है। इन सब बातों से ज़ाहिर होता है कि कोरोना वायरस संकट के कारण दुनिया को 1930 की महामंदी से भी बड़ी मंदी का सामना करने तैयार रहना चाहिए।