क्या AC से भी फैल सकता है कोरोना वायरस संक्रमण?
कोरोना वायरस संक्रमण से बचने सार्वजनिक AC के इस्तेमाल से रहें सावधान
APRIL 10 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि इस समय मानव सभ्यता कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से अपने अतित्व की रक्षा करने में लगी हुई है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती और लापरवाही के कारण 200 से ज़्यादा देशों में फैल गई है। इस लेख को लिखे जाने कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में 96,918 लोगों की मौत हो चुकी है।
आप को यह भी अच्छी तरह से पता होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण का कोई ठोस और प्रामाणिक इलाज अभी तक डॉक्टर्स के पास नहीं है। लेकिन लोगों को उम्मीद है कि तेज़ गर्मी पड़ने से कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा कम हो जाए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 37 डिग्री सेंटीग्रेड से ज़्यादा तापमान होने पर कोरोना वायरस सर्वाइव नहीं कर पाएगा।
यानी लोगों को उम्मीद है कि तेज़ गर्मी से कोरोना वायरस संक्रमण से निज़ात मिल सकती है। लेकिन लोगों में एक डर यह भी है कि तेज़ गर्मी में यदि उन्होंने घरों या ऑफिस में एसी और कूलर चलाए, तो कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा तो नहीं रहेगा? कुछ जानकारों के अनुसार, घरों में लगे निजी एसी व कूलर के कारण कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का कोई अतिरिक्त ख़तरा नहीं है। लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर इस्तेमाल किये जा रहे सेंट्रली एयरकंडीशनिंग यूनिट्स से कोरोना वायरस संक्रमण का विषाणु फैल सकता है।
दरअसल, सार्वजनिक स्थलों पर इस्तेमाल किये जा रहे सेंट्रली एयरकंडीशनिंग यूनिट्स की सीमा में कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित यदि कोई व्यक्ति मौजूद रहेगा, तो ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की आशंका है। जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोनो वायरस संक्रमण का विषाणु बोलने, छींकने, खांसने और थूकने से सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। वहीं इस तरह यह विषाणु आसपास के सामानों पर भी जमा हो सकता है।
ऐसे में सेंट्रली एयरकंडीशनिंग सिस्टम में रीसायकिल हो रही हवा में यदि कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित किसी रोगी के विषाणु पहुंच गये, तो इससे संक्रमण दूसरे स्वस्थ लोगों में फैल सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एयर-कंडीशनिंग के दौरान बाहर से वायुमण्डल की कुछ हवा लेकर उसके साथ भीतर की कुछ हवा मिलाई जाती है। इस तरह से 5,000 नैनोमीटर से छोटे कणों को छानकर अलग नहीं किया जा सकता है। इन विषाणुओं का आकार लगभग 120 नैनोमीटर है, और इन्हें फ़िल्टर करना इन एयर-कंडीशनिंग-तन्त्रों द्वारा असम्भव होता है।
लेकिन जानकारों का कहना है कि घरों में विंडो या स्प्लिट एसी का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं घरों के निजी वॉटर-कूलर के साथ भी कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। लेकिन सेंट्रल एयरकंडीशनिंग के विषय में अधिक सावधानी रखने की ज़रूरत है। भारत में अभी तक तो लॉकडाउन के कारण अधिकांश ऐसे संस्थान बंद हैं, जहां इस तरह के एसी का प्रयोग होता है। लेकिन चूंकि ऑफिस में बाहर से लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में इन जगहों में कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा बना रह सकता है।