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शोध का दावा; 13 फीट की ऊंचाई तक फैल सकता है कोरोना वायरस

Saturday - April 11, 2020 5:33 pm , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस पर लगातार जारी हैं शोध
कोरोना वायरस पर लगातार जारी हैं शोध

हवा में 4 मीटर ऊंचाई तक पहुंच सकता है कोरोना वायरस संक्रमण

APRIL 11 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण कैसे फैलता है? इस पर डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों की कई तरह की राय है। ख़ैर, जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन की वामपंथी सरकार की लापरवाही और ग़लती का खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से पूरी दुनिया में अभी तक 1,03,512 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हज़ारों की तादात में लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण का अभी तक कोई भी सर्वमान्य ठोस इलाज़ नहीं मिल पाया है। ऐसे में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन खोजने का काम जारी है।

कोरोना वायरस पर लगातार हो रहे शोध के बीच कई तरह के दावे वैजानिकों द्वारा किए जा रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस यानी COVID-19 के मरीज़ों का इलाज करने वाले हॉस्पिटल के वार्डों से हवा के नमूनों की जांच करने वाले एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस 13 फीट की ऊंंचाई तक हवा में रह सकता है। हालांकि हवा में तैरते इन ड्रॉपलेट्स से अस्पताल का कोई भी सदस्य संक्रमित नहीं पाया गया। बता दें कि चीनी शोधकर्ताओं द्वारा जांच के प्रारंभिक परिणाम अमेरिका के सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की एक पत्रिका इमर्जिंग इंफेक्शियस डिजीज में प्रकाशित हुए हैं।

कहा जा सकता है कि इस शोध से इस बात का पता करने में मदद मिलेगी कि आखिरकार कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी कैसे फैलती है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों ने कई बार लोगों को चेतावनी दी है कि वायरस की प्रकृति के बारे में अभी पुख्ता जानकारी एकत्रित की जा रही है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए घर पर ही रहना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

जानकारी के लिए बता दें कि बीजिंग में सैन्य चिकित्सा विज्ञान अकादमी में एक दल के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक ICU और वुहान के हुओशेंसन अस्पताल में एक सामान्य COVID​​-19 वार्ड से जमीन और हवा के सैंपल्स लेकर उनकी टेस्टिंग की थी। इस अस्पताल के वार्ड्स में 19 फरवरी से 2 मार्च के बीच कुल 24 मरीज भर्ती किये गये थे। शोध में पाया गया है कि वार्ड्स के फर्श पर वायरस अधिक था। शोध में कहा गया है कि फर्श पर कोरोना वायरस के ज़्यादा पाए जाने का कारण शायद गुरुत्वाकर्षण और हवा के कारण अधिकांश वायरस ड्रॉपलेट्स का ज़मीन पर गिर जाना है।

वहीं कम्प्यूटर के माऊस, ट्बेड रोल और डोर नॉब्स जैसी सतह पर भी कोरोना वायरस पाए गए हैं। इसके अलावा, आईसीयू मेडिकल स्टाफ के जूतों के सोल के आधे नमूनों में कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव मिला है। यानी मेडिकल स्टाफ के जूतों के सोल से भी वायरस संक्रमण फैल सकता है। इतना ही नहीं, शोध टीम ने एयरोसोल ट्रांसमिशन का भी दावा किया है। इस ट्रांसमिशन में वायरस की बूंदें इतनी महीन होती हैं कि वे दिखती नहीं और कई घंटों तक हवा में रहती हैं। दरअसल, यह खांसी या छींक के ड्रॉपलेट्स के विपरीत हैं जो सेकंड्स के भीतर ज़मीन पर गिर जाती हैं। ख़ैर, कोरोना वायरस संक्रमण पर शोध लगातार जारी हैं। लेकिन हमारी आप से गुजारिश है कि इससे बचने के लिए आप ख़ुद को घर में सुरक्षित रखें।