क्या चीन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करेगा अमेरिका?
चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाकर WTO और WHO से ख़ुद को अलग कर सकता है अमेरिका!
APRIL 15 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 200 से ज़्यादा देशों के नागरिक बुरी तरह से प्रभावित हैं। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 1,26,758 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन करना पड़ा है, जिसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, कोरोना वायरस संकट के कारण दुनिया को 1930 के दशक की महामंदी जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
कोरोना वायरस संक्रमण से यदि कोई देश सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, तो वह है विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अमेरिका में अभी तक 26,064 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 6,14,246
लोग अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस संकट के कारण अमेरिका की अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर का सामना कर रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला है। और इसी कारण से अमेरिका कोरोना वायरस संकट के कारण हुई मौतों और आर्थिक बर्बादी के लिए चीन को पूरी तरह से ज़िम्मेदार मानता है।
इन्हीं सब कारणों से अनुमान लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस संकट के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अमेरिका चीन पर आने वाले समय में ठोस कार्रवाई करे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोरोनो वायरस संक्रमण संकट के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराते आए हैं। ट्रम्प का साफ़ तौर पर कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को लेकर WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लगातार बेफकूफ बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के मुताबिक़, चीन ने कोरोना वायरस (COVID-19) से संबंधित ग़लत जानकारियां साझा कीं जिसका दुष्परिणाम अब पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। ट्रम्प का दावा है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से ही पूरी दुनिया में फैला है। ट्रम्प ने चीन पर शक करते हुए आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस संक्रमण संकट के कारण पूरी दुनिया में जितना नुकसान उठाना पड़ा है उतना दुष्परिणाम चीन नहीं भुगत रहा है।
माना जा रहा है कि अमेरिका जल्द ही चीन के ख़िलाफ़ कोई कड़ी कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बातों से लगता है कि कोरोना वायरस संक्रमण से निज़ात पाने का बाद अमेरिका अन्य देशों की सहायता से चीन के खिलाफ़ कोई बड़ी आर्थिक कार्रवाई कर सकता है। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि एप्पल समेत कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां चीन में अपना मैनुफेक्चरिंग प्लांट बंद कर सकती हैं और अपना व्यापार वहां समेट सकती हैं। वैसे आपको बता दें कि जापान की कई कंपनियों ने चीन से अपना व्यापार समेटना शुरू कर दिया है।
कोरोनो वायरस संक्रमण के कारण हुईं हज़ारों मौतों के बाद अमेरिकी लोगों में चीन के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त आक्रोश है। अमेरिकी लोगों की मांग है कि अमेरिका सरकार चीन से चिकित्सकीय आपूर्ति एवं उपकरणों पर निर्भरता को समाप्त करे और अमेरिका में दवाइयां बनाने संबंधी नौकरियां वापस लेकर आए। इतना ही नहीं, अमरीका के नागरिकों में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रति ज़बरदस्त आक्रोश है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तो चीन पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ज़रिए अमेरिका का फायदा उठाने का भी आरोप लगाया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प साफ़ कह चुके हैं कि यदि WHO और WTO ने चीन के दबाव में आकर निष्पक्षता से काम नहीं किया, तो अमेरिका WTO की सदस्यता से ख़ुद को अलग कर लेगा, साथ ही अमेरिका WHO के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई भी करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के बयानों और लहज़े से साफ़ लगता है कि वे कोरोना वायरस संक्रमण संकट के लिए पूरी तरह से चीन को दोषी मानते हैं। अब देखना होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के ख़िलाफ़ सिर्फ़ बयानबाज़ी ही करते हैं, या फिर चीन के ख़िलाफ़ कोई ठोस सख़्त कार्रवाई भी कर पाते हैं?