20 अप्रैल से एक बार फिर रफ़्तार पकड़ेगी देश की अर्थव्यवस्था
IMF का अनुमान; कोरोना संकट के बाद तेज़ी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में टॉप 3 में होगी भारतीय अर्थव्यवस्था
APRIL 18 (WTN) - चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती और लापरवाही के कारण कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी मानव सभ्यता के लिए इस समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी (COVID-19) के कारण अभी तक पूरी दुनिया में 1,54,278 लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक भारत का सवाल है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के क़हर ने भारत को भी काफ़ी प्रभावित किया है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण अभी तक भारत में 480 लोगों की मौत हो चुकी है
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस की बीमारी संक्रमण की बीमारी है। ऐसे में जब तक कि इस बीमारी के इलाज की कोई भी वैक्सीन वैज्ञानिक बना नहीं लेते हैं, तब तक व्यक्ति से व्यक्ति के बीच की सामाजिक दूरी ही इस बीमारी को फैलने से रोक सकती है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण की चैन तोड़ने के लिए ही भारत में लॉकडाउन जारी है। लेकिन लॉकडाउन के कारण विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लग गई है।
विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में वैसे तो 3 मई तक लॉकडाउन है। लेकिन 20 अप्रैल से अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर्स में फिर से काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में आशा व्यक्त की जा रही है कि जल्द ही भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ लेगी। आपकी जानकारी के लिए सरकार ने जिन सेक्टर्स में काम शुरू करने की इजाज़त दी है उनमें 65 प्रतिशत लोग काम करते हैं। अर्थशास्त्र के जानकारों के अनुसार, 20 अप्रैल के बाद देश में क़रीब 45 प्रतिशत अर्थव्यवस्था में काम फिर से शुरू हो जाएगा, और इस कारण से देश की जीडीपी विकास दर में जारी गिरावट कुछ कम होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश की कुल जीडीपी में 34.64 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र का है। ऐसे में सरकार की ओर से 20 अप्रैल से जारी छूट से फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस सर्विस, मछलियों का खाना और उनकी प्रोसेसिंग तथा पैकेजिंग, फिश प्रोडक्ट, फिश सीड, चाय और कॉफी, रबर, काजू की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, दूध का कलेक्शन और प्रोसेसिंग, मक्का की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रिब्यूशन आदि का काम शुरू हो सकेगा।
कृषि और उससे जुड़ी सेवाएं को शुरू करने से देश के 50 प्रतिशत लोगों को काम मिलेगा। जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय सरकार रबी फ़सल की ख़रीदी कर रही है जिससे किसानों के पास पैसा आएगा। जब किसानों के पास पैसा आएगा, तो वे ख़रीदी करेंगे जो कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा।
कृषि क्षेत्र के अलावा सरकार ने डेटा, कॉल सेंटर और आईटी ऑफिस खोलने के लिए भी कुछ शर्तो के साथ इजाज़त दे दी है। साथ ही इलेक्ट्रीशियन, मोटर मैकेनिक, प्लम्बर, कारपेंटर, कुरियर, डीटीएच और केबल सेवा देने वाले कर्मचारी भी अपनी सेवाएं शुरू कर सकेंगे। वहीं, ज़रूरी सामान बनाने वाली इंडस्ट्री जैसे चिकित्सा उपकरण, आईटी हार्डवेयर, खनन और जूट उद्योग से जुड़ी कंपनियां भी अपना उत्पादन शुरू कर सकती हैं। बता दें कि इन सबका देश की जीडीपी में योगदान क़रीब 16.57 प्रतिशत है।
20 अप्रैल के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में भी कुछ शर्तो के साथ काम शुरू हो सकेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और सभी इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन शुरू करने की इजाज़त मिल गई है। हालांकि, शहरी इलाक़ों में भी सिर्फ़ उन्हीं को कंस्ट्रक्शन करने की छूट है जहां साइट पर ही मज़दूर उपलब्ध हैं। रियल एस्टेट सेक्टर भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है, और देश की जीडीपी में रियल एस्टेट सेक्टर का योगदान क़रीब 7.74 प्रतिशत है।
20 अप्रैल से कई सेक्टर्स में शर्तो के साथ काम शुरू होने से लगभग बंद सी पड़ी अर्थव्यवस्था को रफ़्तार मिलेगी। मोदी सरकार के प्रयासों के कारण ही भारत में कोरोना वायरस संक्रमण विकराल रूप धारण नहीं कर पाया है। ऐसे में जबकि दुनिया भर के कई देशों की अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस संकट के कारण कमजोर होती जा रही है, ऐसे में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के तुलनात्मक रूप से कम असर के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ सकती है। ख़ुद IMF(International Monetary Fund) यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का ख़तरा कम होने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में टॉप 3 में होगी