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तो क्या कोरोना वायरस के मरीजों के लिए हानिकारक है क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन की डोज़?

Monday - April 20, 2020 11:48 am , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए हो रहा है क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन का इस्तेमाल
कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए हो रहा है क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन का इस्तेमाल

कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज में क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन के इस्तेमाल को शोधकर्ताओं ने बताया खतरनाक!

APRIL 20 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजा और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी इस समय पूरी मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण अभी तक पूरी दुनिया में 1,65,073 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर के वैज्ञानिक और चिकित्सक कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का इलाज ढूंढने में लगे हुए हैं। लेकिन अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन नहीं बन सकी है। वैसे चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मरीज़ों के इलाज में क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवाइयों का डोज़ काफ़ी असरदार दवा है। लेकिन अब एक नए अध्‍ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज के लिए क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन का इस्तेमाल बेअसर और खतरनाक है।

दरअसल, जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका सहित कई देश भारत से इस दवा को आयात कर रहे हैं। इन देशों के कई चिकित्सकों को आशा है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों को ठीक किया का सकेगा।

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ सैन डियागो के साथ ही चीन के शैंडॉन्‍ग में यंताई युहंगदिंग हॉस्पिटल और शेंयांग में शैंगजिंग हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं का अध्ययन के बाद दावा है कि ये दोनों दवाइयां कोरोना वायरस के कई मरीज़ों को ठीक ना करके उन्हें अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रही हैं।

शोधकर्ताओं ने क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन के ज़रिये जिन मरीज़ों का इलाज किया जा रहा है, उन मरीजों में होने वाले बदलावों का अध्‍ययन किया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने दोनों दवाइयों के वायरल इंफेक्‍शन पर होने वाले असर और मरीज़ों की सुरक्षा का भी अध्‍ययन किया। शोधकर्ताओं के मुताबिक़, उनके शोध में पाया गया कि क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा देने के बाद मरीज़ के प्‍लाज्‍मा में वायरस की संख्‍या और संक्रमण के लक्षणों में बहुत ज़्यादा अंतर नहीं आया था। वहीं यह दोनों दवाइयां देने के बाद 31.4 प्रतिशत मरीज़ों के नर्वस सिस्‍टम पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया था। इतना ही नहीं,  95 प्रतिशत मरीज़ों के गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल सिस्‍टम पर भी असर हुआ है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण के मरीज़ों को क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन की दवा देने के बाद उनके हार्ट की मसल्‍स के डैमेज होने की आशंका भी बढ़ जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीज़ों के इलाज में क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवाइयों के इस्‍तेमाल के ख़िलाफ़ हैं। 

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन दोनों दवाइयों के खतरनाक साइड इफेक्‍ट भी हैं। ऐसे में इसका इस्‍तेमाल कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमितों मरीज़ों की हालात ज़्यादा ख़राब कर सकता है। वहीं, शोधकर्ताओं का दावा है कि फ्रांस के एक डॉक्‍टर ने क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन के क्‍लीनिकल ट्रायल के नतीजों को ग़लत तरीक़े से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

शोधकर्ताओं के दावों के बाद, कुछ लीगल और मेडिकल ग्रुप्‍स का मानना है कि COVID-19 के इलाज में क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन के इस्‍तेमाल को ज़रूरी बताने वाले डॉक्टर्स, हॉस्पिटल्स, स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों और सरकारों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, इनकी राय है कि मरीज़ों और उनके परिजनों को भी अपने क़ानूनी अधिकारों का इस्‍तेमाल करते हुए इन दवाइयों के ज़रिए इलाज कराने से मना कर देना चाहिए।

दरअसल, जबकि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का कोई इलाज नहीं मिल रहा था, तो फ्रांस के एक डॉक्टर के दावे को सही मानकर बहुत देशों के डॉक्टर्स ने ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल पर यकीन करते हुए क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन डोज़ से कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीज़ों का इलाज करना शुरू कर दिया। इसी कारण से अमेरिका समेत कई देश भारत से बड़ी मात्रा में हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा का आयात कर रहे हैं।

जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका ने क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवाइयों के निर्यात के लिए भारत पर दबाव बनाया था क्योंकि अमेरिका की FDA ( Food and Drug Administration) ने शुरुआत में इस दवा के कोरोना वायरस बीमारी के इलाज में इस्‍तेमाल की सिफारिश की थी, लेकिन अब FDA अपनी सिफारिश से मुकर गया है और WHO (World Health Organization) और CDC की बात से सहमत दिखता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WHO और चीन की कुछ सरकारी एजेंसियों के साथ ही अमेरिका की FDA और CDC जैसी संस्थाए भी अब कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज के दावे के लिए क्‍लोरोक्‍वीन और हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन के दावे को फ़र्जी बता रहे हैं।