कोरोना वायरस संक्रमण के सामने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका ने टेके घुटने
अमेरिका के सामने कोरोना वायरस संक्रमण इस वक़्त की सबसे 'बड़ी चुनौती'
APRIL 22 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण ने सबसे ज़्यादा बर्बाद किसी देश को किया है, तो वह देश है विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति वाला देश अमेरिका। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और हठधर्मिता के कारण अमेरिका समेत दुनिया के 200 से ज़्यादा देशों में फैल गया है। जहां तक अमेरिका की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण अभी तक अमेरिका में 45,343 लोगों की मौत हो चुकी है, और 8,19,175 लोग अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं।
अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से अमेरिका में लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और 45 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे में कहा जा सकता है कि विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक अमेरिका ने कोरोना वायरस महामारी के सामने घुटने टेक दिये हैं। जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण अब अमेरिका के बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। इस सबसे चिन्तित अमेरिकी वैज्ञानिकों चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि सावधानी नहीं बरती गई, तो अमेरिका में अगले कुछ महीनों में हालात बहुत ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं। वहीं, कुछ अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि हर दिन मरने वालों की संख्या पर यदि नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो सितंबर के महीने तक अमेरिका में 20 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो सकती है।
स्वाभाविक है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 45 हज़ार से ज़्यादा मौते होने के बाद अमेरिका की हालत चिंताजनक है। ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे अमेरिका में आम जनजीवन सामान्य हो सके। ट्रम्प की लोगों से अपील है कि इन दिशानिर्देशों का सख़्ती से पालन करने पर ही हालात सामान्य हो सकते हैं। इन दिशानिर्देशों के जारी होने के बाद, कई क्षेत्र के अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका के लोग काम पर लौट आएंगे, तो कमजोर होती अर्थव्यवस्था को तो सहारा मिल जाएगा, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सरकार को टेस्टिंग और मॉनिटरिंग पर ज़ोर देना होगा।
अमेरिका में जिस तेज़ी से कोरोना वायरस फैल रहा है, उससे अमेरिका में हेल्थकेयर सिस्टम को ध्वस्त होने बचाना अब राष्ट्रपति ट्रम्प की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वहीं, अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि ट्रम्प प्रशासन ने चीन में मौतों और संक्रमितों के आंकड़ों पर तो सवाल उठाए, लेकिन अमेरिकी सरकार ख़ुद सही आंकड़े तैयार करने में चूक गई। दरअसल, अमेरिका में मरीजों की संख्या ज़्यादा होने के कारण मामूली लक्षणों वाले लोगों की जांच ही नहीं की गई है। ऐसे में यदि हर संक्रमित व्यक्ति का पता नहीं लगाया गया, तो यह वायरस आशंका से कहीं ज़्यादा तबाही अमेरिका में मचा सकता है।
इस समय कोरोना वायरस संक्रमण से अमेरिका की हालत यह हो गई है कि 7 अप्रैल के बाद अमेरिका में हर रोज़ क़रीब 1,800 लोगों की मौत हो रही है। वहीं, अमेरिका में दिल की बीमारियों से एक दिन में 1,774 और कैंसर से 1,641 लोगों की मौत होती हैं। वैसे एक समय यह आशंका व्यक्त की गई थी कि गर्मियों के मध्य तक अमेरिका में क़रीब 2.40 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। लेकिन अब लॉकडाउन के बाद अमेरिका में कुछ सुधार हुआ है, और अब क़रीब 60 हज़ार मौतों की आशंका जाहिर की जा रही है।
हालांकि, अमेरिका सरकार लॉकडाउन को बहुत ज़्यादा लम्बे समय तक लागू नहीं रख सकती है। ऐसे में बिना वैक्सीन के कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को काबू करना नामुमकिन है। अभी तक की स्थिति में तो विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका को कोरोना वायरस संक्रमण ने घुटने पर ला दिया है। लेकिन अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस समय कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों पर नियंत्रण पाना है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अमेरिका में हर रोज़ न केवल सैकड़ों लोगों की जान जा रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था को काफ़ी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि अमेरिका कब तक और कैसे कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर विजय हासिल कर पाता है?