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कोरोना वायरस पर अपनी गलतियों को छिपाने चीन की वामपंथी सरकार ने लिया अपने मुख पत्र का सहारा

Friday - May 1, 2020 12:46 pm , Category : WTN HINDI
चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती का खामियाजा भुगत रही है पूरी दुनिया
चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती का खामियाजा भुगत रही है पूरी दुनिया

COVID-19 पर सफ़ाई देने में जुटी चीन की वामपंथी सरकार

MAY 01 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला है। इतना ही नहीं, अमेरिका समेत यूरोप के कई देशों का आरोप है कि चीन की वामपंथी सरकार की लापरवाही, ग़लती और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में फैला है, जिसके कारण अभी तक 2,34,123 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी कि साफ़ है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के लिए दुनिया भर के देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन को ही ज़िम्मेदार मान रहे हैं।

हालांकि, समय-समय पर चीन की वामपंथी सरकार तमाम तरह के आरोपों का जवाब देती रही है, लेकिन चीन सरकार की बातों पर कई देशों को विश्वास नहीं होता है। दरअसल, कभी चीन की सरकार कहती है कि कोरोना वायरस किसी लैब में नही बना है, बल्कि यह जानवर के द्वारा इंसानों में फैला है। तो कभी चीन की वामपंथी सरकार वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी फैलने के पीछे अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराती है। ऐसे में चीन की वामपंथी सरकार की बातों पर फ़िलहाल किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा है।

इस सबके बीच, अब चीन के सरकारी समाचार पत्र पीपुल्स डेली ने चीन सरकार पर लग रहे तमाम तरह के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की है। समाचार पत्र में चीन की वामपंथी सरकार ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि वे तमाम आरोप झूठे हैं जो यह कहते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण यानी COVID-19 प्राकृतिक नहीं है और इसे चीन की लैब में तैयार किया गया है।

चीन की वामपंथी सरकार का पुरज़ोर तरीके से पक्ष रखते हुए पीपुल्स डेली लिखता है, "अभी तक के सभी वैज्ञानिक साक्ष्य सिद्ध कर रहे हैं कि COVID-19 प्राकृतिक वायरस है और इस बात की पुष्टि ख़ुद WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है। हालांकि, शोधकर्ता विश्वास के साथ अभी यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि वायरस स्प्ष्ट रूप से कहां से उत्पन्न हुआ है। लेकिन कई शोधकर्ताओं के मुताबिक़, कोरोना वायरस चमगादड़ या पैंगोलिन से निकला हुआ वायरस है।"

चीन सरकार के मुख पत्र पीपुल्स डेली का कहना है कि फरवरी के महीने में जर्मनी के प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट क्रिस्टीन ड्रोस्टन समेत 26 अन्य वैज्ञानिकों ने लैंसेट जर्नल में कोरोना वायरस को प्राकृतिक बताया था। साथ ही इन वैज्ञानिकों ने COVID-19 वायरस को लैब में पैदा किए जाने वाले आरोपों की आलोचना तक थी।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस संक्रमण फैलने में हुई अपनी ग़लती को छिपाने के लिए बार-बार WHO का सहारा ले रही है। दरअसल, WHO का कहना है कि वुहान में इस वायरस का पहला केस मिलने का अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि वुहान शहर इस वायरस का स्रोत है।

वहीं, जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने COVID-19 की जानकारी पूरी दुनिया से छिपाकर रखी जबकि चीन को इस वायरस के बारे में पहले से पता था। इस आरोप पर चीन की वामपंथी सरकार का पक्ष रखते हुए पीपुल्स डेली लिखता है, "वुहान के स्थानीय प्रशासन ने कोरोना वायरस का पहला केस 27 दिसंबर को दर्ज किया था। जिसके बाद चीन के वैज्ञानिकों ने इस वायरस को लेकर अध्ययन शुरू किया था और 24 जनवरी को लैंसेट जर्नल में इसे लेकर पहला शोध प्रकाशित कर दिया था।"

पीपुल्स डेली ने चीन की वामपंथी सरकार पर लगे उस आरोप पर भी सफ़ाई दी है, जिसमें कहा जा रहा है कि चीन सरकार ने उस डॉक्टर को प्रताड़ित किया जिसने सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया था। चीन सरकार का पक्ष लेते हुए पीपुल्स डेली लिखता है, "सच्चाई यह है कि जिस डॉक्टर ली वेनलियांग ने इस बीमारी (COVID-19) के बारे में सबसे पहले बताया था उसे पुरस्कृत किया गया था। किसी भी डॉक्टर को इस महामारी के प्रति सचेत करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया गया है।"

दरअसल, चीन सरकार का दावा है कि डॉक्टर ली वेनलियांग कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे। डॉक्टर ली ने सोशल मीडिया पर  अपने कुछ परिचितों को कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को लेकर सचेत किया था। चीन सरकार का कहना है कि डॉक्टर ली के इस मैसेज के कारण ही लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता पैदा हुई। लेकिन चीन सरकार की यह बात समझ से परे है कि बीमारी के बारे में जागरूक करने के बाद भी लोकल पुलिस डॉक्टर ली को पूछताछ के लिए थाने क्यों लेकर गई? क्या एक डॉक्टर के द्वारा बीमारी के बारे में जागरूक करना कोई गुनाह है?

ख़ैर, चीन की वामपंथी सरकार अपने मुख पत्र के ज़रिए कितनी भी सफ़ाई पेश करे, लेकिन सच्चाई यह है कि चीन की वामपंथी सरकार कुछ सच्चाई छिपा रही है। अब जबकि कई वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक रूप से फैला होता, तो यह हर वातावरण में सर्वाइव नहीं कर पाता। इस पर चीन की वामपंथी सरकार फ़िलहाल चुप्पी साधे हुए है। इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अभी भी इस बात पर अड़े हुए हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण का कहीं न कहीं से वुहान की वायरोलॉजी लैब से कोई न कोई संबंध है। अब देखना होगा कि आख़िर कब तक चीन की वामपंथी सरकार सच्चाई को छिपाकर रखने में सफल हो पाती है।