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फ्रांस में हुए एक रिसर्च का दावा; निकोटीन से हो सकता है कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज!

Saturday - May 2, 2020 11:59 am , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस संक्रमण पर जारी हैं रिसर्च
कोरोना वायरस संक्रमण पर जारी हैं रिसर्च

तो क्या निकोटीन से हो सकता है कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज?

MAY 02 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की कोई भी प्रामाणिक दवा अभी तक नहीं बन पाई है। दुनिया भर के चिकित्सक अपने-अपने स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का इलाज कर रहे हैं। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी के कारण अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,39,604 लोगों की मौत हो चुकी है।

ख़ैर, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की वैक्सीन और दवा कब तक बन पाएगी, यह इस समय का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है। लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर तमाम देशों पर शोध जारी हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि जब शुरू में कोरोना वायरस बीमारी फैल रही थी, तब कई रिसर्च में यह दावा किया गया था कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं वे कोरोना वायरस संक्रमण से अन्य लोगों की तुलना में जल्दी और ज़्यादा संक्रमित होते हैं।

लेकिन अब फ्रांस में की गई एक नई रिसर्च के मुताबिक़, जो लोग किसी भी तरह से तंबाकू का सेवन करते हैं, और ख़ासकर जो लोग स्‍मोकिंग करते हैं, ऐसे लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने की आशंका काफ़ी कम होती है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस तरह की रिसर्च रिपोर्ट सामने आने के बाद फ्रांस की सरकार ने देश में तंबाकू की ब्रिक्री पर काफ़ी हद तक रोक लगा दी है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोधकर्ताओं ने पाया है कि निकोटीन का किसी भी तरह से इस्‍तेमाल नहीं करने वालों की तुलना में स्‍मोकिंग करने वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण से कम संक्रमित हो रहे हैं। इस तरह का रिसर्च सामने आने के बाद, फ्रांस की सरकार ने तंबाकू की मांग में तेज़ी की आशंका के कारण निकोटीन उत्‍पादों की ऑनलाइन बिक्री पर कुछ शर्तों के साथ रोक लगा दी है। 

दरअसल, फ्रांस सरकार देश में निकोटीन गम और पैचेज के स्‍टॉक की कमी नहीं होने देना चाहती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज में ज़रूरत पड़े तो पर्याप्‍त मात्रा में तंबाकू उपलब्‍ध कराई जा सके। वहीं, निकोटीन उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री पर कुछ शर्तों के साथ रोक लगाने के पीछे फ्रांस सरकार की मंशा है कि रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर लोग तंबाकू उत्‍पादों का ज़्यादा और ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल न करने लगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब फ्रांस में शोधकर्ताओं ने एक अस्‍पताल में COVID-19 से संक्रमित पाए गए 483 मरीज़ों पर रिसर्च किया, तो पाया कि सिर्फ़ 5 प्रतिशत मरीज़ ही स्‍मोकिंग करते थे। वहीं, पास्‍चर इंस्‍टीट्यूट ने कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित एक क्षेत्र के 700 शिक्षकों और विद्यार्थियों पर रिसर्च किया, तो पाया कि स्मोकिंग ना करने वालों की तुलना में स्‍मोकिंग करने वाले लोगों के संक्रमित होने की संख्‍या एक चौथाई है। इतना ही नहीं, उस क्षेत्र में कोरोना टेस्‍ट में पॉजिटिव पाए गए लोगों में सिर्फ़ 7.2 प्रतिशत लोग ही स्‍मोकिंग करते थे।

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, निकोटिन कोशिकाओं के संग्राहकों (रिसेप्टर्स) पर चिपक जाता है। वहीं, कोरोना वायरस भी शरीर में पहुंचकर कोशिकाओं के इन्‍हीं रिसेप्‍टर्स से जाकर चिपक जाता है और संबंधित इंसान को बीमार कर देता है। अब अगर उन रिसेप्‍टर्स पर पहले से ही निकोटीन चिपका हुआ होगा, तो कोरोना वायरस को कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोका जा सकता है। यानी कि शोध के मुताबिक़, निकोटिन यानी तंबाकू के इस्तेमाल से कोरोना वायरस को शरीर में पहुंचने से रोकना अन्य उपायों की तुलना में आसान होगा।

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, निकोटीन का प्रयोग करने से कोशिकाओं में वायरस की एंट्री को रोका जा सकता है। इससे कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों में लक्षणों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसी आधार पर शोधकर्ताओं के मुताबिक़, यह एक प्रतिरक्षा प्रणाली का तेज़ ओवर रिएक्शन हो सकता है, जो कोरोना वायरस के प्रभाव को ख़त्म या तेज़ी से कम कर सकता है।

रिसर्च करने वालों के अनुसार, यह बात सही है कि निकोटीन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है, लेकिन नियंत्रित तरीके से निकोटीन एजेंट कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर मामलों में प्रभावी इलाज साबित हो सकता है। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है कि अगर स्‍मोकिंग करने वाला व्‍यक्ति कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होता है, तो उसकी हालात गंभीर होने की आशंका बहुत ज़्यादा होती है।

रिसर्च के बाद लोगों में किसी भी तरह की भ्रांतियां न फैले, इसके लिए शोधकर्ताओं ने स्पष्ट कहा है कि निकोटीन शरीर के लिए अच्छा नहीं है। इस रिसर्च का उद्देश्य सिर्फ़ लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से निजात दिलाने के लिए उपाय ढूंढना है। हम किसी भी तरह से निकोटीन के इस्‍तेमाल का समर्थन नहीं करते हैं और न ही हम लोगों को स्मोकिंग या किसी दूसरे तरीके से निकोटीन लेने के लिए प्रोत्‍साहित कर रहे हैं। हम सिर्फ़ यह कह रहे हैं कि निकोटीन के द्वारा भी कोरोना वायरस बीमारी का इलाज किया जा सकता है।

निकोटिन पर रिसर्च के बाद अब फ्रांस का शीर्ष मेडिकल इंस्‍टीट्यूट पिटी साल्‍पेट्रीयर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, निकोटीन पैच के ज़रिए कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज के क्‍लीनिकल ट्रायल की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है। लेकिन हमारी आपको सलाह है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से बचने या उसके इलाज के लिए आप निकोटिन यानी तंबाकू का इस्तेमाल न करें। ख़ुद से किसी भी बीमारी का इलाज करना आपको मुसीबत में डाल सकता है।