इटली की एक दवा कंपनी का दावा; कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के क़रीब पहुंचे वैज्ञानिक
चूहों पर सफल रहा कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन का परीक्षण
MAY 06 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस बीमारी (COVID-19) 200 से ज़्यादा देशों के लाखों लोगों को संक्रमित कर चुकी है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,58,962 लोगों की मौत हो चुकी है। दरअसल, चीन की वामपंथी सरकार के ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण इतना भयावह रूप ले चुका है।
अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण की अभी तक कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है, तो ऐसे में दुनियाभर के चिकित्सक अपने-अपने स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की दवा और वैक्सीन को लेकर पूरी दुनिया में शोधकार्य काफ़ी तेज़ी से चल रहे हैं।
जहां तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई देशों में वैक्सीन के लिए रिसर्च जारी है और इसके लिए ट्रायल भी हो रहे हैं। वहीं, जहां तक इन रिसर्च और ट्रायल के परिणाम की बात है, तो बता दें कि अभी तक कोई भी ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका है। लेकिन इस सबके बीच, इटली की एक दवा कम्पनी को कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में काफ़ी हद तक सफलता हासिल हो गई है।
दरअसल, इटली की राजधानी रोम के लैजारो स्पालैनजानी नेशनल इस्टीट्यट फॉर इंफेक्शियस डिसीज ने ऐसी वैक्सीन खोजने का दावा किया है जिसने कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ चूहों में सफलतापूर्वक एंटीबॉडी पैदा की है। वहीं, इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन मानवीय कोशिकाओं में नोवेल कोरोना वायरस को बेअसर करने में सफल हुई है।
बता दें कि इटली के वैज्ञानिकों ने जब चूहों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया, तो चूहों ने ऐसे ऐसी एंटीबॉडीज़ बना ली जिन्होंने मानवीय कोशिकाओं में COVID-19 के सक्रमण को रोक दिया है। अभी तक के सफल परीक्षण के बाद, वैज्ञानिक अब इए वैक्सीन की इम्यूनिटि प्रतिक्रिया देख रहे हैं।
इधर, नोवेल कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने का दावा करने वाली दवा कंपनी के प्रमुख ल्यूगी ऑरिसिकियो का इस बारे में कहना है कि नोवेल कोरोना वायरस की यह वैक्सीन टेस्टिंग के मामले में अन्य सभी वैक्सीन से परीक्षण और परिणाम के मामले में सबसे आगे चल रही है। दवा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, इस वैक्सीन का गर्मी में मानवीय परीक्षण शुरू हो सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इटली की यह दवा कंपनी अमेरिकन दवा कंपनी लीनिया आरएक्स के साथ भी काम कर रही है। लेकिन नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण की यह वैक्सीन पूरी तरह से सफल हो सके, इसके लिए इटली की सरकार की मंशा है कि वैक्सीन के सफल परीक्षण के लिए अंतराष्ट्रीय सहयोग की काफ़ी ज़्यादा ज़रूरत है।
वैक्सीन की खोज में लगे वैज्ञानिकों के अनुसार, नोवेल कोरोना वायरस के लिए बनाई जा रही इस वैक्सीन में इलेक्ट्रोपोरोशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक में यह वैक्सीन कोशिका में जाती है और इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर देती है। इस प्रक्रिया के बाद इम्यून सिस्टम क्रियाशील एंटीबॉडी पैदा करती है जो फेफड़ों की कोशिकाओं में स्पाइक प्रोटीन को बेअसर करती है। बता दें कि कोरोना वायरस का संक्रमण फेफड़ों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है।
वैक्सीन की खोज में लगे वैज्ञानिक अब अगले चरण में वैक्सीन के बेहतर परिणाम के इंतज़ार में हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वैक्सीन ख़ुद को वायरस के भविष्य में होने वाले म्यूटेशन से भी निपटने में सक्षम है। लेकिन हमारी आपको सलाह है कि जब तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई प्रामाणिक दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो जाती है, तब तक लॉकडाउन का पालन करते हुए खुद को घर में सुरक्षित रखें और घर के बाहर जाने पर पूरी तरह से सोशल डिस्टेंन्सिंग का पालन करें।