वैज्ञानिकों को मानव मल के ज़रिए सीवेज से कोरोना वायरस संक्रमण फ़ैलने की आशंका
क्या सीवेज के ज़रिए भी फैल सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण? लगातार शोध जारी
MAY 07 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 38 लाख 20 हज़ार से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक क़रीब 2,65,657 लोगों की मौत हो चुकी है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन और दवा नहीं बन पाई है। ऐसे में कोरोना वायरस पर तरह-तरह के शोध जारी हैं।
फ़िलहाल कई वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण आख़िर फैलता कैसे है? इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस का संक्रमण सीवेज के ज़रिए भी फैल सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक़, जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, और जब उनका मल सीवेज में पहुंचेगा तो इसके ज़रिए भी लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की आशंका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्कॉटलैंड की स्टर्लिंग यूनिवर्सिटी के रिसर्च करने वालों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण से प्रभावित मरीज़ों के मल में कोरोना वायरस लंबे समय तक ज़िंदा रहता है। और यदि कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीज़ों का मल सीवेज में आया, तो यह संक्रमण की बहुत बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। लेकिन अभी तक सीवेज के ज़रिए कोरोना वायरस संक्रमण फ़ैलने के कोई भी सबूत नही है।
बता दें कि अमेरिका में भी कुछ दिनों पहले वैज्ञानिक कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान करने के लिए सीवेज की जांच करने की बात कह रहे थे। अब वैज्ञानिक और शोधकर्ता सीवेज की जांच करके देखेंगे कि किन इलाक़ों से कोरोना संक्रमित मल सीवेज में आ रहा है।
दरअसल, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का मानना है कि जब तक COVID-19 की वैक्सीन या दवा विकसित नहीं हो जाती है, तब तक COVID-19 को फैलने से रोकने के लिए संक्रमण की पहचान करना ही इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि COVID-19 के ऐसे मामले सांमने आ रहे हैं जिसमें संक्रमित व्यक्ति को इस बात का ही पता नहीं है कि वो संक्रमित कैसे हुआ।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूरोप के देश नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने वेस्टवाटर या सीवेज की जांच कर कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाया था। दरअसल, वैज्ञानिकों को सीवेज जांच में अहम जानकारियां मिलीं थीं और एक क्षेत्र विशेष में उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगा था।
वैज्ञानिकों के अनुसार अगर किसी इलाके में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या ज़्यादा है कि नहीं, इस बात का पता सीवेज की जांच से चल सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि उस इलाके के सीवेज में संक्रमित मल की मात्रा ज़्यादा होगी और हो सकता है सीवेज से ही कोरोना वायरस संक्रमण बड़ी तादात में फैल रहा हो।
ख़ैर, वैसे रिसर्च करने वालों के मुताबिक़, अभी तक ऐसे संकेत तो नहीं मिले हैं कि सीवेज के मल से संक्रमण फैल सकता है और इसकी आशंका भी कम है। लेकिन फिर भी वैज्ञानिकों और चिकिसकों का कहना है कि सावधानी रखना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है जिससे यदि सीवेज से कोरोना वायरस संक्रमण फैलता भी है तो उसे फैलने से रोका जा सके।