लॉकडाउन के बाद रफ्तार पकड़ेगी देश की अर्थव्यवस्था
औद्योगिक उत्पादन और सप्लाई चेन को लॉकडाउन ने दिया तगड़ा झटका
MAY 21 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से जारी लॉकडाउन ने आर्थिक मोर्चे पर देश को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। लेकिन लॉकडाउन के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सबसे ज़्यादा विपरीत असर पड़ा है। इतना ही नहीं, लॉकडाउन के कारण सप्लाई चेन पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है।
दरअसल, लॉकडाउन में सख्ती के कारण मैन्युफक्चरिंग में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। लॉकडाउन के कारण पूरे देश में औद्योगिक गतिविधियां लगभग ठप सी हो गई थीं। इसी कारण से अप्रैल महीने के दौरान भारत की मैन्युफक्चरिंग गतिविधियां रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गईं। इस बात की पुष्टि निक्केई आईएचएस मार्किट द्वारा जारी सर्वे में सामने आई है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अप्रैल महीने के लिए आईएचएस मार्किट द्वारा जारी परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) गिरकर सिर्फ 27.4 रह गया। बता दें कि आईएचएस मार्किट हर महीने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के आंकड़े जारी करता है। जब भी यह सूचकांक 50 से ऊपर रहता है तो यह वृद्धि दर्शाता है।
वहीं, इस सूचकांक का 50 से नीचे रहना गिरावट को दर्शाता है। जबकि इस सूचकांक का 50 पर होना स्थिरता दिखाता है। साफ जाहिर है कि परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) का 27.4 पर आना मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में भारी गिरावट को दर्शा रहा है जो कि चिंता का बड़ा कारण है।
इधर, अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़, भारत को लॉकडाउन के कारण वित्तवर्ष 2020-21 में ऐतिहासिक भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन वित्त वर्ष 2021-2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी होने के आसार हैं। लेकिन लॉकडाउन हटने के बाद भारत में आर्थिक गतिविधियों को एक बार फिर से गति मिलेगी। रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 प्रतिशत तक जा सकती है।
साफ जाहिर है कि लॉकडाउन ने भारत की अर्थव्यवस्था को काफी बड़ा झटका दिया है। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन बेहद ज़रूरी था। अब आशा की जा रही है कि एक जून से देश के अधिकांश इलाकों में लॉकडाउन खत्म हो जाएगा। ऐसे में आर्थिक गतिविधियों को एक बार फिर से गति मिल सकेगी।