लॉकडाउन के कारण पिछले 40 सालों की सबसे बड़ी गिरावट का सामना करेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
चालू वित्त वर्ष 2020-21 में GDP ग्रोथ रेट शून्य रहने का अनुमान
MAY 22 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है। जहां तक भारत की बात है, तो तेज़ी से विकास कर रही भारत की अर्थव्यवस्था की लॉकडाउन ने कमर तोड़कर रख दी है। एक समय 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की और बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को लॉकडाउन ने इतना बड़ा झटका दिया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत को पिछले 40 साल की सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट का सामना करना पड़ेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। दरअसल, स्वतंत्र भारत के ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी महामारी के कारण ‘लॉकडाउन’ करना पड़ा और इसके कारण पूरे देश की आर्थिक गतिविधियों पर लगभग पूरी तरह से रोक लग गई।
अब जबकि लॉकडाउन के कारण देश में सब कुछ 'बंद' सा था, तो इसी कारण से खपत के न्यूनतम स्तर पर जाने और कारोबारी गतिविधियां थमने से चुनौतियों का सामना कर रही घरेलू अर्थव्यवस्था में इस वित्त वर्ष में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, 'लॉकडाउन’ से देश के असंगठित क्षेत्र के सांमने संकट खड़ा हो गया है और इस क्षेत्र का जीडीपी में आधे से ज़्यादा योगदान है।
रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार, "चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर के कारण आई आर्थिक सुस्ती के कारण कोरोना वायरस संकट से पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीमी पड़ गई थी और यह छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।" मूडीज के मुताबिक, "केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज में उठाए गए कदम उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था की समस्याएं इससे बहुत ज्यादा व्यापक हैं।"
भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में मूडीज का अपनी रिपोर्ट में कहना है, "हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP वृद्धि दर में वास्तविक गिरावट आएगी। इससे पहले हमने वृद्धि दर शून्य रहने की संभावना जताई थी। लेकिन मूडीज को उम्मीद है कि कोरोना वायरस संकट से उबरने के बाद आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान से भी ज़्यादा मजबूत रह सकती है।
हालांकि, लॉकडाउन से प्रभावित देश की बहुसंख्यक जनता को 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके हैं। लेकिन सरकार का यह सीधे तौर पर राजकोषीय प्रोत्साहन GDP के एक से दो प्रतिशत के दायरे में ही रह सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सरकार की ज्यादातर राहत योजनाएं ऋण गारंटी या प्रभावित क्षेत्रों की नकदी चिंता को दूर करने को लेकर है। ख़ैर, अब देखना होगा कि लॉकडाउन के बाद भारत की अर्थव्यवस्था कितने दिनों के बाद गति पकड़ पाती है?