इस 'नई नीति' से बदलेगी देश के ऑटो इंडस्ट्री की तकदीर
बहुउद्देश्यीय स्क्रैप नीति पर युद्धस्तर पर काम जारी
MAY 25 (WTN) - जल्द ही देश में एक ऐसी नई नीति बनने वाली है जिससे पुराने वाहनों की ख़रीदी बिक्री के नियमों में परिवर्तन हो जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुरानी कार, बस, ट्रक आदि के निपटान के लिए सरकार वाहन स्क्रैप नीति लाने की तैयारी कर रही है। दरअसल, सरकार की इस योजना से ऑटो उद्योग को संकट से उबारने में मदद मिलने के आसार है।
जानकारी के अनुसार वाहन स्क्रैप नीति को अंतिम रूप देने के लिए तेज़ी से काम चल रहा है और इसके लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार विमर्श काफी हद तक पूरा भी हो गया है। यदि सभी कुछ योजना अनुसार चलता रहा, तो सरकार इस नीति को जल्दी ही घोषित कर देगी।
इस बहुउद्देश्यीय नीति के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसमें वाहन उपभोक्ताओं और वाहन उत्पादकों के हितों का ध्यान रखा गया है। इस नीति के तहत, पुराने वाहनों को एक निश्चित समय के बाद परिचालन से हटा दिए जाने का प्रावधान इस नीति में है। इस नीति के जानकारों के अनुसार, पुराने वाहनों को एक तय समय सीमा में बेचने पर इसके बदले में उपभोक्ताओं को कुछ लाभ दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है ऐसा करने से बाजार में नए वाहनों की मांग पैदा होगी और मंदी की मार झेल रहे ऑटो उद्योग को सहारा और बल मिलेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाहन स्क्रैप नीति के तहत पुराने वाहनों के निपटान के लिए प्रस्तावित संयंत्र बंदरगाहों और राजमार्गों के निकट स्थापित किए जाएंगे। क्योंकि ऐसा करने से वाहन निर्माण लागत कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, निपटान से उत्पन्न संसाधनों को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जा जाने में मदद मिलेगी।
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, योजनाबद्ध तरीके से यदि काम किया जाए तो अगले पांच साल के दौरान दुनिया के ऑटो उद्योग में भारत का प्रमुख स्थान होगा। स्क्रैप नीति को इस तरह से बनाया गया है कि इससे वाहन उद्योग को फायदा होगा। पुराने वाहनों की तय समय के बाद बिक्री से उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल देश में पुराने वाहनों को परिचालन से हटाने के लिए कोई भी नीति नहीं है। ऐसे में काफी वक्त से स्क्रैप नीति की मांग की जा रही है।
स्क्रैप नीति के प्रावधानों के अनुसार, पेट्रोल से चलने वाले वाहन को सिर्फ 15 साल और डीजल से चलने वाले वाहन को सिर्फ 10 साल तक ही परिचालन की अनुमति दी जाएगी। इस तय समय के बाद वाहनों को परिचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, देश के अन्य हिस्सों में यह नियत अवधि समाप्त होने के बाद इन वाहनों को अनुमति से फिर इस्तेमाल किया जा सकता है।
कहा जा सकता है कि नई स्क्रैप नीति से देश के ऑटो मोबाइल उद्योग को काफी सहारा मिलेगा। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण आई वैश्विक आर्थिक सुस्ती से सबसे पहले और सबसे ज़्यादा भारतीय ऑटो उद्योग ही प्रभावित हुआ था। ऐसे में नई स्क्रैप नीति से पुराने वाहन तय समय सीमा के बाद परिचालन से हट जाएंगे और गाड़ियों की बिक्री में इजाफा होगा।