बिना लॉकडाउन के ही कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है स्वीडन
स्वीडन में नागरिकों की आज़ादी लॉकडाउन पर भारी!
MAY 28 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी से 185 से ज़्यादा देश मुसीबत का सामना कर रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 3,57,467 लोग मारे जा चुके हैं।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों ने लॉकडाउन का तरीका अपनाया है। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की डेथ रेट सबसे ज़्यादा होने के बाद भी यूरोप के विकसित देश स्वीडन ने अभी तक लॉकडाउन लागू नहीं किया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन अपने बेहतरीन ह्यूमन इंडेक्स के कारण दुनियाभर में सम्मान का पात्र है। दुनिया के सबसे शांतिप्रिय और प्रगतिशील देशों में स्वीडन का नाम आता है। हालांकि, दुनिया के अन्य देशों की ही तरह स्वीडन में भी कोरोना वायरस संक्रमण काफी फैल गया है, लेकिन इतना सब होने के बाद भी स्वीडन की सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए अपने यहां अभी तक कोई भी लॉकडाउन नहीं किया है। इतना ही नहीं, स्वीडन में तो अभी तक हेल्थ इमरजेंसी भी घोषित नहीं हुई है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि स्वीडन में कोरोना डेथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है। लेकिन इसके बाद भी स्वीडन की सरकार द्वारा लॉकडाउन या कोई सख्त कदम न उठाने के पीछे उसका 100 सालों का इतिहास है। दरअसल, स्वीडन ने कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को अभी तक किसी नेशनल इमरजेंसी के तौर पर नहीं देखा है, बल्कि इसे अभी तक एक सीरियस पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम के तौर पर देखा है।
स्वीडन की सरकार का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से निपटने के लिए कड़े कानून लागू करने की बजाए लोगों में जागरुकता पैदा करना ज्यादा जरूरी है। स्वीडन में किसी स्वास्थ्य संबंधित आपदा के दौर में नागरिकों की आजादी को खत्म करना सही नहीं माना जाता है। स्वीडन के पड़ोसी देशों जैसे डेनमार्क और नॉर्वे ने तो अपने देश में लॉकडाउन किया है। लेकिन स्वीडन ने लॉकडाउन को सही नहीं समझा।
दरअसल, लॉकडाउन न करने के पीछे स्वीडन का पिछले सौ सालों का इतिहास भी एक कारण हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन में पिछले सौ सालों के दौरान कोई भी नेशनल इमरजेंसी या त्रासदी नहीं आई है।
111 साल पहले साल 1909 में स्वीडन में हुई बड़ी हड़ताल के बाद से अभी तक कोई भी बड़ा सामाजिक आंदोलन या संघर्ष देश में नहीं हुआ है। यहां तक की स्वीडन ने कोई युद्घ भी इस दौरान नहीं लड़ा है। जबकि इसी दौरान, यूरोप के अन्य देशों ने कई युद्धों में हिस्सा लिया या फिर उनके यहां बड़े सामाजिक आंदोलन हुए।
स्वीडन की सरकार ने सिविल लिबर्टी को कोरोना वायरस से भी ज़्यादा महत्व दिया है। यही वो कारण है जिस वजह से स्वीडन ने कोरोना वायरस संक्रमण के समय में भी लॉकडाउन का फैसला अभी तक नहीं लिया है। दरअसल, स्वीडन का हेल्थ डिपार्टमेंट लॉकडाउन की जगह पर हर्ड इम्यूनिटी की बात करता दिखता है।
स्वीडिश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में आम जनता को बताना ज्यादा जरूरी है, न कि लॉकडाउन के द्वारा लोगों में डर पैदा करना। स्वीडन की सरकार को भरोसा है कि जल्द ही कोरोना वायरस संक्रमण पर जीत हासिल होगी वो भी कोई सख्त कदम उठाए बिना।