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​पीपुल्स यूनिवर्सिटी के तत्वाधान में वस्तुओं को सेनेटाइज करने -बनाया UV स्टेरीलाइजेशन चेम्बर

Sunday - June 7, 2020 9:52 pm , Category : WTN HINDI


COVID-19 से लड़ने के लिए UVC आधारित कीटाणु नाशक चैंबर विकसित किया

WTN- कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की अभी तक कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण से खुद को बचाकर रखना ही कोरोना वायरस से बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सेनेटाइजेशन को एक बढ़िया विकल्प माना गया है।

हाथों का सेनेटाइजेशन तो आसानी से हो जाता है। लेकिन मोबाइल, पर्स, औजार, करेंसी और अन्य वस्तुओं के सेनेटाइजेशन की तरफ लोग ध्यान ही नहीं देते हैं। इसी कड़ी में पीपुल्स यूनिवर्सिटी ने वस्तुओं के सेनेटाइजेशन के लिए एक UV स्टेरीलाइजेशन चेम्बर बनाया है। इसकी खासियत ये है कि इसे किसी भी कार्यालय में बड़ी ही आसानी से स्थापित किया जा सकता है। जैसे कि ऑफिस टेबल की दराज़ या फाइल कैबिनेट आदि में।

जैसा की विदित है 200 और 300 एनएम के बीच तरंग दैर्ध्य की रेंज में यूवी प्रकाश सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में सक्षम है, जैसे कि बैक्टीरिया और वायरस, इस प्रकार दोनों हवा और ठोस सतहों को कीटाणुरहित बनाने के लिए, अक्सर, अस्पतालों और अन्य दूषित वातावरण में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और वायरस को हटाने के लिए रासायनिक कीटाणुनाशक पर्याप्त नहीं होते हैं।वायरस यूवीसी प्रकाश के प्रति संवेदनशील है, जैसा कि अन्य जीवाणु बैक्टीरिया के मामले में है। 254 एनएम पर चरम तीव्रता के साथ यूवीसी विकिरण के कीटाणुनाशक प्रभाव वायरस के सेलुलर प्रक्रिया के नुकसान का कारण बनता है, जिससे सेलुलर प्रक्रिया बाधित होती है। कीटाणु नाशन के लिए रासायनिक दृष्टिकोण के विपरीत, यूवी प्रकाश एक शारीरिक प्रक्रिया के माध्यम से सूक्ष्मजीवों में तेजी से, प्रभावी निष्क्रियता प्रदान करता है।

पीपुल्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉक्टर) भास्कर कुमार गुप्ता एवम्  सौरेश कुलश्रेष्ठ के अनुसार UV स्टेरीलाइजेशन चेम्बर खासतौर पर ऑफिस में दस्तावेज़ एवं वस्तुओं को सेनेटाइज करने के लिए बनाया गया है। डॉक्टर भास्कर कुमार गुप्ता के अनुसार, "यह UV स्टेरीलाइजेशन चेम्बर UV C स्पेक्ट्रा पर काम करता है जो कि सर्वाधिक स्टरलाइजेशन की क्रिया 254  नैनो मीटर तरंग दैर्ध्य पर विशेष रूप से काम करता है। UV 'C' रेंज वाले इस UV स्टरलाइजेशन चेम्बर में किसी भी वस्तु को कम से कम 60 सेकेंड से 120 सेकेंड तक रखने पर संबंधित वस्तु  की सतह वायरस समेत अन्य जीवाणु के संक्रमण से रहित हो जाती है।"

UVC विकरन का अधिक समय के लिए  सीधा  सम्पर्क त्वचा के लिए हानिकारक होता है अतः इस उपकरण के उपयोग हेतु आवश्यक सावधानी भी जरुरी है

जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह के UV स्टेरीलाइजेशन वाले चैम्बर बाजार में महंगे दामों में बिक रहे हैं। लेकिन पीपुल्स विश्वविद्यालय की टीम ने काफी कम लागत में इसे बनाया है। इसमें एक लैंप की मदद से UV विकिरण तैयार कर वस्तुओं को सेनेटाइज किया जा सकता है। UV स्टेरीलाइजेशन चेम्बर बनाने में प्रोफेसर (डॉक्टर) भास्कर कुमार गुप्ता के अलावा सौरेश कुलश्रेष्ठ का भी विशेष योगदान रहा है।