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जानिए कैसे दी बंगलुरू ने कोरोना वायरस संक्रमण को अभी तक मात?

Saturday - June 13, 2020 12:26 pm , Category : WTN HINDI
बंगलुरू में तुलनात्मक रूप से कम हैं कोरोना वायरस के केस
बंगलुरू में तुलनात्मक रूप से कम हैं कोरोना वायरस के केस

कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ उदाहरण बनकर सामने आया बंगलुरू का मॉडल

JUNE 13 (WTN) - भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। जहां तक देश के बड़े शहरों की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बात दें कि मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में कोरोना वायरस संक्रमण के केस बढ़ते ही जा रहे हैं। लेकिन देश के मेट्रोपोलिटन शहरों में शामिल बंगलुरू कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण पाने में एक मिसाल बन गया है।

दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर हमारे बड़े शहरों को जो प्लानिंग करना चाहिए था उसमें वो असफल साबित हो गए हैं। लेकिन बंगलुरू जैसे बड़े शहर ने सिविल सेंस के बल पर कोरोना को काफी हद तक कंट्रोल करके दिखाया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 11 जून तक बेंगलुरु में केवल 3,195 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित थे, जिसमें से 2,976 लोग ठीक होकर अस्पतालों से अपने घर चले गए हैं।

जैसा कि आप जानते हैं कि बेंगलुरु को सुविधाओं की नजर से वर्ल्डसिटी कहते हैं। यहां पर हज़ारों की संख्या में अन्य प्रदेशों के लोग रहते हैं। आईटी सिटी बंगलुरू में जब कोरोना वायरस फैला, तो इस शहर को उस पर नियंत्रण पाना बहुत ज़रूरी था क्योंकि एक बहुत बड़ा साफ्टवेयर व्यापार यहां से होता है।

वे कई कारण हैं जिनके कारण बंगलूरू जैसे बड़े शहर में कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद नियंत्रण अभी तक पा लिया गया है। सबसे पहले तो इस शहर के लोगों ने कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ जबरदस्त जागरूकता दिखाई है। यहां पर लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर घर में रहने और मास्क लगाने जैसे काम को कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया।

भारत के दूसरे महानगरों की तुलना में बंगलूरू के निवासी नियमों का ज्यादा पालने करते हैं। यही कारण है कि कोरोना संकट के दिनों में यहां शायद ही कहीं ज़्यादा भीड़ दिखाई दी। इतना ही नहीं, प्रशासन ने भी यहां पर मुस्तैदी दिखाई। साथ ही यहां पर लोगों ने हाईजीन और साफ सफाई की तरफ भी पूरा ध्यान दिया।

लॉकडाउन के बाद से अभी तक बंगलुरू में एक बेहतरीन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम देखने को मिला है। ज़रूरत का सामान लोगों के घर तक पहुंचाया गया इसलिए लोग बिना वजह घर से नहीं निकले और संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण लग गया।

इतना ही नहीं, बंगलुरू में युवा प्रोफेशनल्स ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एक हाईटेक वार रूम बनाया, जिसमें कोरोना वायरस के केसों की ट्रेसिंग के साथ-साथ संक्रमित इलाकों पर नजर रखने और आंकड़ों को जुटाने में बेहतर काम किया।

वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों से निपटने के लिए बेंगलुरु का सबसे बड़ा अस्पताल विक्टोरिया पर्याप्त बेड के साथ पहले से ही तैयार कर दिया गया था। हालांकि, लॉकडाउन के दिनों तक यहां मरीज कम ही थे। अब जबकि लॉकडाउन के बाद कोरोना वायरस संक्रमण के मामले ढ़ रहे हैं, तो राज्य सरकार ने बेंगलुरु में हास्टल्स में बेड की व्यवस्था भी की है। इतना ही नहीं, यहां पर सरकार ने कोरेंटाइन और आइसोलेशन के नियमों का भी यही तरीके से लोगों से पालन कराया है। यही वो कारण हैं जिनके चलते बंगलुरू जैसे महानगर में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के मामले नियंत्रण में हैं।