जानिए क्यों और भी 'ज़्यादा खतरनाक' होता जा रहा है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस की कांटेदार संरचना धीरे-धीरे होती जा रही और भी 'जटिल'
JUNE 15 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इन दिनों मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। देख्ते ही देखते कोरोना वायरस संक्रमण से लाखों लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के लिए वैक्सीन और दवा बनाने के लिए वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों को कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है।
लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस धीरे-धीरे और भी ज़्यादा ख़तरनाक होता जा रहा है। सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बता दें कि कोरोना वायरस की संरचना नुकीली होती है। कोरोना वायरस एक तरह का प्रोटीन होता है, जो हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाए जाने वाले प्रोटीन से काफी आसानी से और अच्छे से जुड़ जाता है।
दरअसल, हाल ही में एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन से जो नया वायरस बना है, वो चीन से फैले वायरस से कई ज़्यादा खरतनाक है। रिसर्च के अनुसार, म्यूटेशन से बने नए कोरोना वायरस की कांटेदार संरचना काफी ज्यादा है, जिससे यह मानव शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि D614G नाम के इस वायरस स्ट्रेन को अपनी बढ़ी हुई संचरना के कारण पहले वाले वायरस से दस गुना ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। बता दें कि इससे पहले कोरोना वायरस में दो तरह के म्यूटेशन दिखे थे, जिनके वायरस स्ट्रेन को G614 और D614 नाम दिया गया था। वहीं अब वायरस के नए स्ट्रेन को D614G नाम दिया गया है। बता दें कि यह ज्यादा समय तक शरीर में बना रहता है, जो कि ख़तरनाक है।
म्यूटेशन वाले इस वायरस से मरीज के इलाज में ज़्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस का यही स्ट्रेन अमेरिका, इटली और स्पेन जैसे देशों में फैला है।
फ्लोरिडा में स्थित अमेरिकन मेडिकल रिसर्च फैसिलिटी 'Scripps Research' की रिसर्च के अनुसार, नए वायरस में कांटेदार संरचना ज्यादा है, और इसी कारण से यह मानव शरीर में और भी ज़्यादा आसानी से घुस जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हो सकता है कि म्यूटेशन के बाद बने वायरस की संरचना इसे और भी ज़्यादा खतरनाक बना रही हो।
मुख्य शोधकर्ता और वायरोलॉजिस्ट डॉ हायरयून चो के मुताबिक, वायरस में जितना ज्यादा नुकीला होता जाएगा, यह वायरस उतना ही ज्यादा खतरनाक भी होता जाएगा। इस वायरस के नुकीला होने के कारण यह मानव शरीर में आसानी से प्रवेश कर मानव शरीर की कोशिकाओं पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लेता है।
इसी कारण से अब वैज्ञानिक इस कोशिश में लगे हुए हैं कि कोरोना वायरस की कांटेदार प्रोटीन संरचना किसी भी तरह से मानव शरीर से नहीं जुड़ सके। क्योंकि यदि ऐसा होता है तो वायरस के संपर्क में आने के बाद भी कोरोना वायरस से सुरक्षित रहा जा सकता है। वहीं, वैज्ञानिक इस प्रयास में भी हैं कि कोरोना वायरस और मानव शरीर की कोशिकाओं के बीच होने वाली बॉन्डिंग को किसी भी तरह से कमजोर किया जा सके, जिससे वायरल लोड कम होने पर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज जल्दी ठीक हो सकेगा। अब देखना होगा कि वैज्ञानिक अपने इन प्रयासों में कब तक सफल हो पाते हैं?