लॉकडाउन की जगह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ले सकते हैं यह 'अहम फैसला'!
लोगों के बीच एक बार फिर से लॉकडाउन की आशंका
JUNE 15 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के मामले भारत में दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इस लेख के लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक भारत में क़रीब 3,32,424 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 9,520 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों पर आरम्भिक स्तर पर ही रोक लगाने के लिए सबसे पहले 25 मार्च को 21 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था, जिसे बाद में धीरे-धीरे करके आगे बढ़ाया गया।
हालांकि, जब तक देश में लॉकडाउन लगा रहा, तब तक देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में काफी नियंत्रण रहा। लेकिन लॉकडाउन को लम्बे समय1।तक लगाना सम्भव नहीं था।
ख़ैर, अब जबकि आम जन जीवन सामान्य करने, और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लॉकडाउन में काफ़ी छूट दी गई है। तो ऐसे में लॉकडाउन में छूट के साथ ही देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले भी काफ़ी तेज़ गति से बढ़ते ही जा रहे हैं। अब जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16 और 17 जून को देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करने वाले हैं, तो लोगों के मन में यह आशंका है कि क्या एक बार फिर से देश में लॉकडाउन लग सकता है।
लेकिन लगता नहीं है कि देश में कोरोनावायरस संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर से लॉकडाउन लगाए जाने का कोई बड़ा फैसला लें। दरअसल, उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को यह सलाह दे सकते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण से लोगों की सुरक्षा में और इस वायरस से सावधानी बरतने में किसी भी तरह की कोई भी लापरवाही ना बरती जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक इंग्लिश समाचार पत्र के मुताबिक, एक बड़े सरकारी अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से डोर टू डोर स्क्रीनिंग ज़्यादा से ज़्यादा कराने पर ज़ोर दे सकते हैं। दरअसल, जिन राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, वहां के शहरी कंटेनमेंट ज़ोन में डोर टू डोर स्क्रीनिंग करने की चर्चा प्रधानमंत्री कर सकते हैं, जिससे लोगों में संक्रमण का जल्द पता लगाया जा सके।
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसके लावा राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का सख्ती से पालन कराने और फेस मास्क के इस्तेमाल से जुड़े कड़े कानून बनाने के लिए भी कह सकते हैं। स्वाभाविक है कि COVID टेस्ट की संख्या जितनी ज्यादा बढ़ेगी, इस बीमारी के मरीजों का उतने ही जल्दी पता लग सकेगा और उनका इलाज जल्दी हो सकेगा जिससे कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों में कमी आएगी।
अब जबकि लॉकडाउन में छूट के बाद कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, तो अब कोरोना संक्रमण की स्थिति पर काबू पाने के लिए सभी उपाय राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ही करने होंगे। लेकिन इस सब पर केन्द्र सरकार पूरी नज़र रखेगी।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बात फिर से लॉकडाउन की घोषणा न करें। क्योंकि अब देश में कोरोना टेस्ट के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर पॉजिटिविटी का अनुपात अभी सिर्फ 5.6% है। अब जबकि एकबार फिर से लॉकडाउन होने के कोई भी आसार नहीं हैं, तो ऐसे में अब सब कुछ राज्य सरकारों की कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ रणनीति और जनता के विवेक पर निर्भर करेगा।