...तो क्या 21 जून के सूर्य ग्रहण से 'प्राकृतिक रूप' से नष्ट हो जाएगा कोरोना वायरस?
चेन्नई के एक वैज्ञानिक का दावा; 21 जून के सूर्य ग्रहण से कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप होगा कम
JUNE 17 (WTN) - क्या सूर्य ग्रहण और कोरोना वायरस संक्रमण के बीच किसी भी तरह का कोई भी संबंध हो सकता है क्या? यह पढ़कर आप चौक ज़रूर गए होंगे। ख़ैर, इससे पहले बता दें कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इस समय मानव प्रजाति के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 4 लाख 46 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है।
वहीं, आप यह भी जानते हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस काम के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन या दवा बन सके और इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
लेकिन इस सबके बीच, चेन्नई के एक वैज्ञानिक डॉ. के.एल. सुंदर कृष्ण ने तो कोरोना वायरस और सूर्यग्रहण के बीच वैज्ञानिक कनेक्शन का दावा किया है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिक डॉ. सुंदर कृष्ण ने दावा किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के प्रकोप और सूर्य ग्रहण के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध है।
वैज्ञानिक डॉ. सुंदर कृष्ण का कहना है कि 26 दिसंबर, 2019 को हुए सूर्य ग्रहण से कोरोना वायरस संक्रमण का क़हर बढ़ना शुरू हुआ था। और 21 जून को होने वाले सूर्यग्रहण के दिन से कोरोना वायरस संकट संक्रमण का असर खत्म होता चला जाएगा।
परमाणु और पृथ्वी वैज्ञानिक डॉ. के.एल. सुंदर कृष्ण के अनुसार, सूर्य ग्रहण के बाद उत्सर्जित विखंडन ऊर्जा के कारण न्यूट्रॉन के उत्परिवर्तित कण के संपर्क में आने के बाद कोरोना वायरस टूट गया है और यह इतना ज़्यादा खतरनाक हो गया है।
वैज्ञानिक डॉ. सुंदर कृष्ण का मानना है कि 26 दिसंबर के सूर्य ग्रहण के बाद सौर मंडल में ग्रहों की दशा में बदलाव हुआ है और इसके बाद अंतर-ग्रह बल और ऊर्जा की भिन्नता के कारण कोरोना वायरस ऊपरी वायुमंडल से उत्पन्न हुआ है। इसी बदलाव के कारण कोरोना वायरस के लिए उचित वातावरण बना है।
डॉ. सुंदर कृष्ण का मानना है कि सूर्य ग्रहण के बाद न्यूक्लियोन को न्यूक्लियर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। न्यूक्लियर बनने की यह प्रक्रिया बाहरी मटीरियल के कारण शुरू हुई होगी, जो कि ऊपरी वायुमंडल में बायो मॉलिक्यूल और बायो न्यूक्लियर के संपर्क में आने से हो सकता है। वहीं, बायो मॉलिक्यूल संरचना (प्रोटीन) का उत्परिवर्तन इस वायरस का एक संभावित स्रोत हो सकता है।
चेन्नई के वैज्ञानिक डॉ. सुंदर कृष्ण का कहना है कि 21 जून का सूर्य ग्रहण कोरोना वायरस को नष्ट करने का प्राकृतिक उपचार कर सकता है और इससे हमें इस महामारी से छुटकारा मिल सकता है। वैज्ञानिक डॉ. सुंदर कृष्ण का मानना है कि सूर्य की किरणें और सूर्य ग्रहण कोरोना वायरस संक्रमण के प्रभाव को नष्ट करने या उसके असर को कम करने में काफी सहायक हो सकते हैं
वैज्ञानिक डॉ सुंदर कृष्ण ने अनुसार, उत्परिवर्तन प्रक्रिया शायद सबसे पहले चीन में देखी गई थी और इसके कारण ही कोरोना वायरस चीन में सबसे पहले फैल गया और सूर्य ग्रहण ने इस वायरस में बदलाव कर दिए जिससे वायरस इतना ज्यादा खतरनाक हो गया। हो सकता है कि 21 जून को होने वाले सूर्य ग्रहण से प्राकृतिक रूप से कोरोना वायरस खत्म हो जाए।
अब देखना होगा कि डॉ. सुंदर कृष्ण की सूर्य ग्रहण से कोरोना वायरस से उत्पन्न और खतरनाक होने और उसी सूर्य ग्रहण से कोरोना वायरस संक्रमण के खत्म होने की थ्योरी कितनी सही साबित हो पाती है।