कोरोना वायरस संक्रमण से बचने घर पर भी करें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन!
आइसोलेशन को अपनाकर ख़ुद को बचाएं कोरोना वायरस संक्रमण से
JUNE 18 (WTN) - मानव सभ्यता के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी अभी तक हज़ारों लोगों की जान ले चुकी है और लाखों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं।
अब जबकि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है, ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे उपायों को अपनाया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी कोरोना वायरस संक्रमण रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।
वैसे, कोरोना वायरस संक्रमण पर कई तरह के शोध लगातार जारी हैं। इसी कड़ी में एक ताजा शोध से पता चला है कि कोरोना वायरस संक्रमण घर में ही ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोध में दावा किया गया है घर के हालातों में कोरोना वायरस यानि SARS-CoV-2 पुराने SARS वायरस की तुलना में दोगुना संक्रमणकारी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण कई पीड़ितों में तब दिखाई देते हैं जब वो इससे से बहुत ज़्यादा संक्रमित हो जाता है।
चीन के गुवांगझोऊ शहर में शोधकर्ताओं ने शोध किया, तो उनके मुताबिक COVID-19 का एक मरीज अपने ही परिवार के सदस्यों या आसपास रहने वालों को जल्दी और ज़्यादा संक्रमित करता है। और ऐसा उन परिस्थितियों में होता है जब मरीज़ में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण दिखाई ही नहीं देते हैं। और इस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की आशंका 39 प्रतिशत है।
शोधकताओं के अनुसार, इनक्यूबेशन काल यानि संक्रमण होने और उसके लक्षण दिखाई देने के बीच के समय में ही कोरोना वायरस संक्रमण आसानी से और तेज़ी से फैलता है। शोध में बताया गया है कि आइसोलेशन से COVID-19 संक्रमण की संख्या में पूरी दुनिया में कमी दर्ज की गई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि क्वारंटाइन का तरीका अपनाया नहीं गया होता, तो आज कोरोना वायरस संक्रमण के 20 से 50 प्रतिशत तक ज़्यादा मामले होते। साफ है कि बिना लक्षण दिखाई देने वाले कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के क्वारंटाइन होने से काफ़ी हद तक संक्रमण रोका जा सका है। तो कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए खुद को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से दूर रखें।